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रायपुर। भारतीय राजनीति और छत्तीसगढ़ के इतिहास में रविवार को एक ऐसा अनोखा और जमीन से जुड़ा नजारा देखने को मिला, जिसने हर किसी को हैरान भी किया और प्रेरित भी। बेमेतरा से पहली बार भाजपा विधायक बने दीपेश साहू की बारात जब बैलगाड़ी पर निकली, तो उसके सारथी और कोई नहीं बल्कि खुद प्रदेश के उप मुख्यमंत्री (डिप्टी सीएम) अरुण साव बने। डिप्टी सीएम विशेष रूप से राजधानी रायपुर से बेमेतरा पहुंचे और बैलगाड़ी की कमान संभालकर खुद उसे हांकते हुए आगे-आगे चल पड़े।

शिक्षक से राजनीति के सफर में आए विधायक दीपेश साहू अपने इस सादगीपूर्ण और ऐतिहासिक फैसले को लेकर देश भर में चर्चा का विषय बन गए हैं। उन्होंने किसी आलीशान पैलेस या महंगे वीआईपी रिसॉर्ट के बजाय सरकार की 'मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना' के तहत आयोजित सामूहिक विवाह समारोह में एक बीपीएल (गरीब) परिवार की बेटी तरुणा साहू के साथ सात फेरे लिए।

इस भव्य और सादगीपूर्ण सामूहिक विवाह समारोह में विधायक दीपेश साहू और तरुणा साहू के साथ-साथ क्षेत्र के करीब दो दर्जन (24 से अधिक) अन्य जोड़ों का भी विवाह पूरे रीति-रिवाज के साथ संपन्न हुआ।
विधायक दीपेश साहू ने अपने इस कदम के पीछे की बेहद खूबसूरत वजह बताते हुए कहा कि उनका मुख्य उद्देश्य समाज को फिजूलखर्ची छोड़कर सादगीपूर्ण विवाह का संदेश देना है।

"आज के दौर में विवाह समारोहों में अनावश्यक खर्च और दिखावा लगातार बढ़ता जा रहा है, जिसकी वजह से कई मध्यमवर्गीय और गरीब परिवारों को भारी आर्थिक बोझ का सामना करना पड़ता है। ऐसे में सामूहिक विवाह जैसी सरकारी और सामाजिक पहल, समाज में समरसता लाने और बचत करने का सबसे बेहतर माध्यम है।" -दीपेश साहू, विधायक (बेमेतरा)

एक मौजूदा विधायक द्वारा तामझाम छोड़कर मुख्यमंत्री कन्या विवाह के मंडप में एक गरीब परिवार की बेटी का हाथ थामने और सूबे के उपमुख्यमंत्री द्वारा उनकी बैलगाड़ी चलाने के इस ऐतिहासिक निर्णय की पूरे छत्तीसगढ़ में जमकर सराहना हो रही है। इस विवाह समारोह में शामिल होने के लिए कई बड़े जनप्रतिनिधि और वीआईपी भी पहुंचे। लोग इसे राजनेताओं के अहंकार से दूर, जनता के बीच रहकर एक बेहद सकारात्मक और अनुकरणीय उदाहरण पेश करने वाला कदम मान रहे हैं।
