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मुंबई/नई दिल्ली। दिवंगत सेलिब्रिटी मैनेजर दिशा सालियान की मौत का मामला एक बार फिर सुर्खियों में है। बॉम्बे हाईकोर्ट के दिशा सालियान की मौत की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को सौंपने के आदेश के एक दिन बाद शिवसेना (यूबीटी) नेता आदित्य ठाकरे ने उन पर लगाए जा रहे आरोपों को खारिज किया है। नई दिल्ली में गुरुवार को मीडिया से बातचीत के दौरान ठाकरे ने कहा कि उनका इस मामले से कोई संबंध नहीं है और इसलिए वह आरोपों पर जवाब देना जरूरी नहीं समझते।
आदित्य ठाकरे ने कहा, “इस मामले से मेरा कोई लेना-देना नहीं है, तो मैं इन आरोपों पर जवाब क्यों दूं।” उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले छह वर्षों से उन्हें बदनाम करने की कोशिश की जा रही है।
‘मेरा इस मामले से कोई लेना-देना नहीं’
आदित्य ठाकरे ने कहा कि उन्होंने इस मामले के बारे में सोचा तक नहीं है। उनका कहना था कि जब किसी व्यक्ति का किसी मामले से कोई संबंध ही नहीं है तो उस पर प्रतिक्रिया देकर उसे महत्व देने का कोई कारण नहीं है।
ठाकरे ने कहा कि जो भी भारतीय जनता पार्टी (BJP) को चुभता है, उसे लेकर परेशानी खड़ी की जाती है। उन्होंने दोहराया कि दिशा सालियान की मौत के मामले से उनका कोई लेना-देना नहीं है और वह अपने खिलाफ लगाए जा रहे आरोपों को महत्व नहीं देना चाहते।
हाईकोर्ट ने CBI जांच के दिए आदेश
बॉम्बे हाईकोर्ट ने 2 सितंबर को दिशा सालियान की मौत की जांच CBI को सौंपने का आदेश दिया। अदालत ने मालवणी पुलिस स्टेशन को मामले से जुड़े सभी रिकॉर्ड और दस्तावेज CBI को सौंपने के निर्देश भी दिए हैं।
कोर्ट ने CBI को जांच के लिए एक अनुभवी वरिष्ठ अधिकारी नियुक्त करने को कहा है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि जांच के दौरान किसी व्यक्ति को केवल आरोपों या संदेह के आधार पर आरोपी नहीं माना जा सकता। जांच अधिकारी को उपलब्ध सामग्री के आधार पर किसी व्यक्ति के खिलाफ संदेह के मजबूत आधार मिलने जरूरी होंगे।
यदि जांच में कोई आपराधिक मामला सामने नहीं आता है, तो CBI को अदालत के समक्ष समरी रिपोर्ट दाखिल करनी होगी। दिशा के पिता सतीश सालियान को ऐसी रिपोर्ट के खिलाफ अदालत में आपत्ति दर्ज कराने और उसे चुनौती देने का अधिकार भी रहेगा।
दिशा के पिता ने की थी नए सिरे से जांच की मांग
दिशा सालियान के पिता सतीश सालियान ने बॉम्बे हाईकोर्ट में याचिका दायर कर अपनी बेटी की मौत की नए सिरे से जांच कराने की मांग की थी। उन्होंने आरोप लगाया था कि दिशा के साथ गैंगरेप और हत्या हुई तथा मामले को दबाने की कोशिश की गई।
उन्होंने आदित्य ठाकरे सहित अन्य लोगों के खिलाफ FIR दर्ज करने की मांग भी की थी। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है।
हाईकोर्ट के आदेश के बाद सतीश सालियान भावुक नजर आए। उन्होंने कहा कि वह पिछले छह वर्षों से इस दिन का इंतजार कर रहे थे। उन्होंने कहा कि बेटी को खोने के बाद खुशी की कोई वजह नहीं है, लेकिन अदालत के आदेश से उन्हें राहत महसूस हुई है। उन्होंने जज के प्रति हाथ जोड़कर आभार जताया।
2020 में इमारत से गिरने के बाद हुई थी दिशा की मौत
दिशा सालियान एक सेलिब्रिटी मैनेजर थीं। 8 जून 2020 को मुंबई के मलाड इलाके में एक इमारत की 14वीं मंजिल से गिरने के बाद उनकी मौत हो गई थी। शुरुआती जांच करीब तीन महीने में बंद कर दी गई थी।
बाद में सोशल मीडिया पर दिशा की मौत को लेकर अलग-अलग दावे सामने आए। इन दावों और आरोपों के बीच 2023 में मामले को दोबारा जांच के लिए खोला गया और SIT गठित की गई।
दिशा की मौत के कुछ दिनों बाद ही अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत अपने बांद्रा स्थित आवास पर मृत पाए गए थे। दोनों घटनाओं को लेकर सोशल मीडिया पर लंबे समय से तरह-तरह के दावे किए जाते रहे हैं।
BJP नेताओं ने भी उठाए थे सवाल
दिशा सालियान केस को लेकर BJP की ओर से आदित्य ठाकरे समेत कई लोगों पर सवाल उठाए जाते रहे हैं। महाराष्ट्र के मंत्री नितेश राणे ने भी कहा था कि यदि आदित्य ठाकरे और इस मामले से जुड़े अन्य लोगों की कोई भूमिका नहीं है, तो उन्हें सामने आकर अपनी स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।
राणे ने कहा था कि वह शुरुआत से ही दिशा सालियान की मौत को आत्महत्या नहीं मानते रहे हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि CBI जांच के बाद पूरे मामले की सच्चाई सामने आएगी।
आदित्य ठाकरे ने भी हाईकोर्ट में दिया था आवेदन
इस मामले में आदित्य ठाकरे ने खुद भी हाईकोर्ट में आवेदन देकर कार्यवाही में शामिल होने की मांग की थी। अपने आवेदन में उन्होंने सतीश सालियान की याचिका को झूठी, निराधार और किसी मकसद से दायर बताया था।
ठाकरे ने अदालत से यह भी मांग की थी कि उनके खिलाफ कोई आदेश जारी करने से पहले उन्हें अपना पक्ष रखने का अवसर दिया जाए।
अब हाईकोर्ट के CBI जांच के आदेश के बाद करीब छह साल पुराने इस मामले की जांच नए सिरे से केंद्रीय एजेंसी करेगी। जांच के दौरान सामने आने वाले साक्ष्यों के आधार पर ही आगे की कार्रवाई तय होगी। फिलहाल किसी भी व्यक्ति को केवल आरोपों के आधार पर दोषी या आरोपी नहीं माना जा सकता।