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दुर्ग। ओडिशा के बरगढ़ विधानसभा क्षेत्र के भाजपा विधायक अश्विनी कुमार सारंगी छत्तीसगढ़ प्रवास के दौरान दुर्ग पहुंचे। उनके आगमन पर स्थानीय प्रबुद्ध नागरिकों, प्रवासी समुदाय और विभिन्न सामाजिक संगठनों की ओर से भव्य नागरिक अभिनंदन किया गया। इस दौरान विधायक सारंगी ने छत्तीसगढ़ और ओडिशा के बीच सदियों पुराने सामाजिक, सांस्कृतिक और पारिवारिक संबंधों के साथ कृषि, व्यापार और विकास से जुड़े मुद्दों पर अपने विचार साझा किए।
दोनों राज्यों की आत्मा किसानों और खेतों में बसती है
विशेष परिचर्चा के दौरान विधायक अश्विनी कुमार सारंगी ने कहा कि ओडिशा का बरगढ़ और छत्तीसगढ़, दोनों ही अपनी समृद्ध कृषि परंपरा के कारण ‘धान का कटोरा’ के रूप में पहचाने जाते हैं। उन्होंने कहा कि दोनों प्रदेशों की अर्थव्यवस्था और सामाजिक जीवन में किसान और कृषि की महत्वपूर्ण भूमिका है।
उन्होंने छत्तीसगढ़ में कृषि क्षेत्र और ग्रामीण बुनियादी ढांचे में हो रहे बदलावों की सराहना की। सारंगी ने कहा कि सीमावर्ती क्षेत्रों में जल संसाधनों के बेहतर प्रबंधन और आधुनिक कृषि तकनीकों के आदान-प्रदान से दोनों राज्यों के किसानों को बड़ा लाभ मिल सकता है। इससे सीमांत क्षेत्रों में कृषि उत्पादन और किसानों की आय बढ़ाने के नए अवसर पैदा किए जा सकते हैं।

संबलपुरी संस्कृति और धनु यात्रा का भी किया जिक्र
विधायक सारंगी ने ओडिशा की प्रसिद्ध संबलपुरी वेशभूषा और संबलपुरी जैकेट के प्रति अपने लगाव का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि बरगढ़ का हथकरघा उद्योग और विश्व प्रसिद्ध धनु यात्रा केवल ओडिशा की पहचान नहीं हैं, बल्कि इनसे छत्तीसगढ़ के लोगों का भी गहरा जुड़ाव है।
उन्होंने कहा कि दोनों राज्यों के बीच बेहतर सड़क और कनेक्टिविटी से सीमावर्ती क्षेत्रों में व्यापार और आवागमन को बढ़ावा मिला है। आने वाले समय में छत्तीसगढ़ और ओडिशा के बीच आपसी व्यापार, खासकर टेक्सटाइल और कुटीर उद्योगों के क्षेत्र में नई संभावनाएं विकसित हो सकती हैं।
उड़िया समुदाय और स्थानीय नागरिकों के भाईचारे को बताया मिसाल
विधायक सारंगी ने छत्तीसगढ़ में रह रहे उड़िया समुदाय और स्थानीय नागरिकों के बीच अटूट भाईचारे की सराहना करते हुए इसे पूरे देश के लिए अनुकरणीय मिसाल बताया। उन्होंने कहा कि राजनीतिक सीमाएं लोगों के आपसी रिश्तों और सांस्कृतिक जुड़ाव को नहीं रोक सकतीं।
उन्होंने कहा कि दोनों राज्यों के नागरिकों के बीच आपसी सहयोग, सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक संबंध विकास की नई इबारत लिख रहे हैं। ‘सबका साथ, सबका विकास’ की भावना से सीमावर्ती क्षेत्रों को और मजबूत किया जा सकता है।
सारंगी ने विश्वास जताया कि उनका छत्तीसगढ़ दौरा महज औपचारिक प्रवास तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इससे छत्तीसगढ़ और ओडिशा के बीच सौहार्द, सांस्कृतिक आदान-प्रदान, व्यापार और परस्पर सहयोग को नई दिशा मिलेगी।