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नई दिल्ली – रिटायरमेंट के दिन 10 हजार रुपये रिश्वत लेते हुए पकड़े गए हरियाणा राज्य औद्योगिक विकास निगम (HSIIDC) के वरिष्ठ प्रबंधक दलबीर सिंह भाटी को अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायालय ने पांच साल की सजा सुनाई है। अदालत ने दोषी पर पांच हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। जुर्माना अदा न करने पर अतिरिक्त तीन महीने की कठोर सजा भुगतनी होगी।
भाटी को एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) की टीम ने 30 सितंबर 2021 को मानेसर स्थित कार्यालय में उसकी रिटायरमेंट फेयरवेल पार्टी के दौरान रंगे हाथ गिरफ्तार किया था। अदालत ने अपने 42 पन्नों के फैसले में कहा कि भ्रष्टाचार जैसे अपराधों में नरमी न्याय व्यवस्था और समाज के साथ अन्याय है। न्यायाधीश पुनीत सहगल ने कहा कि सार्वजनिक पद पर बैठे लोगों की जिम्मेदारी अधिक होती है और उनके अपराध का प्रभाव व्यापक होता है।
भाटी कोर्ट के सामने गिड़गिड़ाया कि वह हृदय रोग और अन्य शारीरिक बीमारियों से पीड़ित है और उसकी पत्नी भी बीमार है। वहीं, अभियोजन पक्ष ने तर्क दिया कि भाटी ने गंभीर अपराध किया है। अदालत ने कहा कि कम सजा देने से अपराधियों को प्रोत्साहन मिलता है और अनुचित सहानुभूति से न्याय व्यवस्था पर जनता का विश्वास कमजोर पड़ता है।
यह मामला HSIIDC में ठेकेदार अजीत कुमार की शिकायत पर दर्ज हुआ था। ठेकेदार ने बताया कि उनके 4.25 लाख रुपये के बिल पास होने थे और भाटी ने इसके बदले 10 हजार रुपये रिश्वत मांगी थी। शिकायत के बाद एसीबी की टीम ने जाल बिछाया और फेयरवेल पार्टी में भाटी को रकम अपनी जेब में रखने के दौरान गिरफ्तार किया। जांच के दौरान फेनालफ्थेलीन टेस्ट से भी रिश्वत लेने की पुष्टि हुई। भाटी को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7 के तहत दोषी ठहराया गया।