

Copyright © 2026 rights reserved by Inkquest Media
अन्य समाचार

indian railways loud talking mobile video fine jail rules 2026
ट्रेन में सफर के दौरान मोबाइल फोन पर तेज आवाज में बात करना, स्पीकर पर वीडियो या ऑडियो चलाना अब भारी पड़ सकता है। रेलवे ने यात्रियों की सुविधा और आरामदायक यात्रा सुनिश्चित करने के लिए इस तरह के व्यवहार पर सख्ती बरतने के निर्देश जारी किए हैं। रेलवे के निर्देशों के मुताबिक, यदि कोई यात्री दूसरे यात्रियों को परेशान करता है और समझाने के बाद भी अपना व्यवहार नहीं बदलता, तो उसके खिलाफ रेलवे अधिनियम की धारा 145 के तहत कार्रवाई की जा सकती है। इसमें 1,000 रुपये तक का जुर्माना और छह महीने तक की जेल का प्रावधान बताया गया है।
रेलवे का कहना है कि सार्वजनिक परिवहन में सभी यात्रियों को आराम से सफर करने का अधिकार है। ऐसे में मोबाइल पर तेज आवाज में बातचीत करना, स्पीकर पर गाने या वीडियो चलाना और दूसरे यात्रियों की शांति भंग करना परेशानी का कारण बनता है। इसी को देखते हुए यात्रियों को जागरूक करने और नियमों का पालन कराने के निर्देश दिए गए हैं।
जानकारी के अनुसार, 6 अक्टूबर 2026 को जारी निर्देश में रेलवे के संबंधित अधिकारियों से कहा गया है कि वे यात्रियों को इस तरह के व्यवहार से होने वाली परेशानी के बारे में जागरूक करें। निर्देश में सार्वजनिक घोषणा प्रणाली (Public Address System) के माध्यम से स्थानीय भाषाओं के साथ हिंदी और अंग्रेजी में संदेश प्रसारित करने की बात कही गई है।
इसके अलावा रेलवे स्टेशनों और संबंधित परिसरों में नोटिस लगाकर यात्रियों को बताया जाएगा कि तेज आवाज में मोबाइल पर बात करने या बिना ईयरफोन के ऑडियो-वीडियो चलाने से अन्य यात्रियों को असुविधा होती है। रेलवे ने यात्रियों को मोबाइल फोन इस्तेमाल करते समय ईयरफोन का उपयोग करने की सलाह भी दी है।
रेलवे के निर्देशों का उद्देश्य उन गतिविधियों पर रोक लगाना है, जिनसे दूसरे यात्रियों की यात्रा प्रभावित होती है। इनमें मुख्य रूप से शामिल हैं:
- ट्रेन में मोबाइल फोन पर तेज आवाज में बात करना।
- मोबाइल के स्पीकर पर गाने, वीडियो या अन्य ऑडियो चलाना।
- समझाने के बाद भी ऐसा व्यवहार जारी रखना, जिससे दूसरे यात्रियों को परेशानी हो।
- गाली-गलौज, अभद्र भाषा या अन्य ऐसी गतिविधियां करना, जिनसे रेलवे परिसर में अव्यवस्था पैदा हो।
हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि मोबाइल फोन पर सामान्य बातचीत करने या वीडियो देखने पर अपने आप जुर्माना लग जाएगा। कार्रवाई संबंधित नियमों और परिस्थितियों के आधार पर होगी।
निर्देश में बताया गया है कि रेलवे अधिनियम के प्रावधानों के तहत टिकट एग्जामिनर (TTE) या उससे ऊपर के रैंक के वाणिज्यिक कर्मचारियों को निर्धारित परिस्थितियों में कार्रवाई करने का अधिकार है। ऐसे मामलों में यात्रियों को पहले नियमों का पालन करने और दूसरों को परेशानी नहीं पहुंचाने के लिए समझाया जा सकता है।
यदि कोई यात्री मना करने के बावजूद परेशानी पैदा करना जारी रखता है, तो उसके खिलाफ लागू कानूनी प्रावधानों के तहत कार्रवाई की जा सकती है। संबंधित प्रावधानों में जुर्माने के साथ कुछ मामलों में जेल की सजा और रेलवे परिसर से हटाने जैसी कार्रवाई भी शामिल हो सकती है।
मोबाइल फोन के कारण दूसरे यात्रियों को होने वाली परेशानी का मुद्दा नया नहीं है। रेलवे ने अपने ताजा निर्देश में 23 जुलाई 2012 को जारी रेलवे बोर्ड के एक पुराने पत्र का भी उल्लेख किया है।
उस समय खासकर एसी कोच में यात्रियों द्वारा मोबाइल फोन पर तेज आवाज में बातचीत करने, लंबे समय तक फोन पर बात करने और तेज या आपत्तिजनक रिंगटोन बजाने की शिकायतें सामने आई थीं। इसके बाद रेलवे बोर्ड ने अधिकारियों को यात्रियों को जागरूक करने के निर्देश दिए थे।
यात्रियों को मोबाइल फोन साइलेंट या वाइब्रेशन मोड पर रखने, कम आवाज वाली रिंगटोन का इस्तेमाल करने और तेज आवाज में बातचीत से बचने की सलाह दी गई थी। अब मोबाइल इंटरनेट और ऑनलाइन वीडियो के बढ़ते इस्तेमाल के बीच रेलवे ने इस मुद्दे पर फिर से ध्यान केंद्रित किया है।
जानकारी के अनुसार, निर्देश चेन्नई, पलक्कड़, तिरुवनंतपुरम, तिरुचिरापल्ली, मदुरै और सलेम डिवीजनों के वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधकों को जारी किए गए हैं। इन अधिकारियों को यात्रियों तक संदेश पहुंचाने और जरूरी कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए कहा गया है। संबंधित डिवीजनों को 20 अक्टूबर 2026 तक मुख्यालय को अनुपालन रिपोर्ट सौंपने का निर्देश भी दिया गया है।
रेलवे में सफर करते समय कुछ छोटी-छोटी बातों का ध्यान रखकर दूसरों की परेशानी कम की जा सकती है। मोबाइल पर बात करते समय आवाज धीमी रखें, वीडियो या गाने सुनने के लिए ईयरफोन का इस्तेमाल करें और फोन की रिंगटोन कम रखें। रात के समय और एसी कोच में विशेष रूप से शांति बनाए रखें।
ध्यान दें: जुर्माने और जेल की सजा का उल्लेख संबंधित कानूनी प्रावधानों के तहत किया गया है। हर मामले में सजा अपने आप लागू नहीं होती; कार्रवाई घटना की परिस्थितियों और कानून के लागू प्रावधानों के अनुसार होगी।