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रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में साइबर अपराध के खिलाफ चलाए जा रहे ‘ऑपरेशन साइबर शील्ड’ के तहत पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। रेंज साइबर थाना रायपुर की टीम ने दो अलग-अलग साइबर ठगी के मामलों में उत्तर प्रदेश से दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इनमें एक आरोपी पर वरिष्ठ IAS अधिकारी सुबोध कुमार सिंह के नाम से फर्जी फेसबुक आईडी बनाकर उनके परिचितों से पैसे मांगने का आरोप है। वहीं, दूसरे आरोपी पर शेयर ट्रेडिंग में मुनाफा दिलाने का झांसा देकर 88 लाख रुपये की ठगी से जुड़े मामले में संलिप्त होने का आरोप है।

पुलिस के मुताबिक, दोनों मामलों में तकनीकी साक्ष्यों, मोबाइल नंबरों, बैंक खातों और सोशल मीडिया से मिली जानकारियों का विश्लेषण कर आरोपियों की पहचान की गई। पुलिस अब दोनों के कथित नेटवर्क, अन्य सहयोगियों और साइबर अपराध से जुड़े संभावित लेन-देन की जांच कर रही है।
IAS अधिकारी सुबोध कुमार सिंह के नाम से बनाई फर्जी फेसबुक आईडी
पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, सुशांत पनका ने शिकायत दर्ज कराई थी कि फेसबुक पर वरिष्ठ IAS अधिकारी सुबोध कुमार सिंह के नाम से एक फर्जी प्रोफाइल बनाई गई है। आरोप है कि इस प्रोफाइल के जरिए अधिकारी के परिचितों को मैसेज भेजे जा रहे थे और उनसे पैसों की मांग की जा रही थी।
शिकायत के आधार पर राखी थाने में मामला दर्ज किया गया। इसके बाद जांच की जिम्मेदारी रेंज साइबर थाना रायपुर की टीम को सौंपी गई। जांच के दौरान पुलिस ने फेसबुक, गूगल और मोबाइल सेवा प्रदाता कंपनियों से संबंधित जानकारियां जुटाईं। इन सूचनाओं और तकनीकी साक्ष्यों का विश्लेषण करने के बाद पुलिस ने उत्तर प्रदेश के हमीरपुर निवासी अर्जुन कुमार जाटव (23) की पहचान की।
पुलिस का आरोप है कि अर्जुन अपने साथियों के साथ मिलकर वरिष्ठ IAS अधिकारी के नाम से फर्जी फेसबुक आईडी बनाने और उसके जरिए लोगों से पैसे मांगने की गतिविधियों में शामिल था। पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया है।
मोबाइल फोन की जांच में अन्य अधिकारियों के नाम से भी फर्जी आईडी के संकेत
पुलिस के मुताबिक, गिरफ्तार आरोपी के मोबाइल फोन की जांच के दौरान स्थानीय और राष्ट्रीय स्तर के अन्य अधिकारियों तथा जनप्रतिनिधियों के नाम से भी फर्जी फेसबुक आईडी बनाए जाने से जुड़े साक्ष्य मिले हैं।
इस खुलासे के बाद पुलिस इन प्रोफाइलों और उनसे जुड़ी गतिविधियों की भी जांच कर रही है। जांच एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इन फर्जी आईडी का इस्तेमाल केवल पहचान की नकल करने के लिए किया गया था या उनके जरिए अन्य लोगों से भी पैसों की मांग की गई।
पुलिस का कहना है कि जांच में सामने आने वाले तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर आगे कानूनी कार्रवाई की जाएगी। हालांकि, अन्य फर्जी प्रोफाइलों से जुड़े मामलों में किस हद तक अपराध हुआ है, यह जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा।
शेयर ट्रेडिंग में मुनाफे का झांसा देकर 88 लाख रुपये की ठगी का आरोप
दूसरा मामला शेयर ट्रेडिंग में निवेश के नाम पर कथित साइबर ठगी से जुड़ा है। पुलिस के अनुसार, रश्मि शर्मा ने शिकायत दर्ज कराई थी कि उन्हें शेयर ट्रेडिंग में अच्छा मुनाफा दिलाने का झांसा देकर 88 लाख रुपये की ठगी की गई।
शिकायत मिलने के बाद रेंज साइबर थाने में मामला दर्ज कर जांच शुरू की गई। पुलिस ने कथित लेन-देन से जुड़े बैंक खातों, मोबाइल नंबरों और वॉट्सऐप पर हुई बातचीत की जानकारी की पड़ताल की।
तकनीकी साक्ष्यों के विश्लेषण के आधार पर पुलिस ने उत्तर प्रदेश के कानपुर निवासी प्रवीण कुमार दीक्षित (46) की पहचान की। इसके बाद उसे गिरफ्तार किया गया।
पुलिस का आरोप है कि प्रवीण अपने साथियों के साथ मिलकर ‘दीक्षित एजेंसी’ नाम की कंपनी के माध्यम से बैंक खाते खुलवाता था। इन खातों का इस्तेमाल कथित तौर पर साइबर ठगी से हासिल रकम जमा कराने के लिए किया जाता था।
जांच में पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इन बैंक खातों को किस-किस व्यक्ति ने खुलवाया, उनका संचालन कौन करता था और ठगी से मिली रकम किन खातों में स्थानांतरित की गई।
ठगी में इस्तेमाल बैंक खातों से जुड़े 11 थानों और साइबर सेल में शिकायतें
इस मामले में एक अहम जानकारी यह भी सामने आई है कि आरोपी से जुड़े बैंक खातों के संबंध में देश के 11 थानों और साइबर सेल में शिकायतें दर्ज हैं।
पुलिस के अनुसार, इन शिकायतों के आधार पर बैंक खातों के कथित इस्तेमाल और दूसरे साइबर अपराधों के बीच संबंधों की जांच की जा रही है। इससे यह पता लगाने में मदद मिल सकती है कि संबंधित खाते केवल एक मामले में इस्तेमाल हुए या कई अलग-अलग साइबर ठगी की घटनाओं से जुड़े हैं।
पुलिस पूछताछ के दौरान आरोपी से जुड़े अन्य लोगों के बारे में भी जानकारी मिलने की बात कही गई है। अब जांच का एक प्रमुख हिस्सा उन सहयोगियों की पहचान करना है, जो कथित तौर पर बैंक खाते उपलब्ध कराने, रकम जमा कराने या उसे आगे स्थानांतरित करने में शामिल हो सकते हैं।
हालांकि, 11 स्थानों पर दर्ज शिकायतों का होना अपने आप में सभी मामलों में आरोपी की संलिप्तता साबित नहीं करता। प्रत्येक मामले में संबंधित साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
तकनीकी जांच के आधार पर आरोपियों तक पहुंची पुलिस
दोनों मामलों में पुलिस ने डिजिटल और वित्तीय साक्ष्यों को जोड़कर जांच आगे बढ़ाई। पहले मामले में सोशल मीडिया प्रोफाइल, मोबाइल फोन और सेवा प्रदाता कंपनियों से मिली जानकारियों का विश्लेषण किया गया। दूसरे मामले में बैंक खातों, मोबाइल नंबरों और वॉट्सऐप से संबंधित जानकारी की पड़ताल की गई।
पुलिस का मानना है कि ऐसे मामलों में फर्जी सोशल मीडिया प्रोफाइल, दूसरे व्यक्तियों के नाम पर संपर्क और बैंक खातों के इस्तेमाल की जांच महत्वपूर्ण होती है। इन जानकारियों के जरिए संदिग्धों की पहचान करने के साथ-साथ कथित अपराध से जुड़े अन्य लोगों और पैसों के लेन-देन का पता लगाया जा सकता है।
दोनों आरोपियों से जुड़े नेटवर्क की जांच जारी
रायपुर पुलिस ने दोनों मामलों में उत्तर प्रदेश के रहने वाले आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस अब उनके कथित साथियों की पहचान करने, फर्जी सोशल मीडिया खातों से जुड़ी गतिविधियों की पड़ताल करने और ठगी में इस्तेमाल किए गए बैंक खातों के लेन-देन की जानकारी जुटाने में लगी है।
पुलिस के अनुसार, दोनों आरोपियों को न्यायालय में पेश करने और आगे की कानूनी प्रक्रिया पूरी करने की कार्रवाई की जा रही है। फिलहाल, दोनों मामलों में जांच जारी है। पुलिस की आगे की कार्रवाई और न्यायिक प्रक्रिया के दौरान ही आरोपों से जुड़े सभी तथ्यों की पुष्टि हो सकेगी।