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कवर्धा। छत्तीसगढ़ के कबीरधाम (कवर्धा) जिले की उच्च गुणवत्ता वाली लौह अयस्क खदानें देश की बड़ी स्टील कंपनियों के लिए आकर्षण का केंद्र बन गई हैं। जिले के सबसे समृद्ध लौह अयस्क क्षेत्रों में शामिल केसदा-एकलामा-चेलिकामा लौह अयस्क ब्लॉक की नीलामी रिकॉर्ड 117.55 प्रतिशत अंतिम प्रीमियम बोली पर हुई है। इस खदान को देश की अग्रणी स्टील कंपनी ArcelorMittal Nippon Steel India Limited ने अपने नाम किया है।
खनिज विभाग के अनुसार, यह प्रीमियम दर सरकार द्वारा निर्धारित आधार दर से दोगुने के करीब है, जो खदान के विशाल भंडार और उच्च गुणवत्ता वाले लौह अयस्क की मांग को दर्शाती है। यह ब्लॉक लगभग 755.039 हेक्टेयर क्षेत्र में फैला हुआ है और इसमें करीब 60.07 मिलियन टन उच्च गुणवत्ता वाले लौह अयस्क का अनुमानित भंडार मौजूद है।
उच्च गुणवत्ता के कारण बढ़ी प्रतिस्पर्धा
जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (GSI) और खनिज विभाग की रिपोर्ट के अनुसार, एकलामा क्षेत्र के लौह अयस्क में 65 से 69 प्रतिशत तक लौह तत्व (Fe) पाया जाता है। सामान्य तौर पर 60 प्रतिशत लौह तत्व वाले अयस्क को उच्च गुणवत्ता का माना जाता है, लेकिन कवर्धा का अयस्क इससे कहीं अधिक शुद्ध माना जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि इसकी गुणवत्ता प्रदेश के प्रसिद्ध लौह अयस्क क्षेत्रों Bailadila और Dalli-Rajhara से भी बेहतर मानी जा रही है।
नए ब्लॉकों की नीलामी भी तेज
छत्तीसगढ़ सरकार के खनिज साधन विभाग ने राज्य में खनिज ब्लॉकों की ई-नीलामी प्रक्रिया को और तेज कर दिया है। इसी क्रम में कवर्धा जिले के खारा ए एवं बी लौह अयस्क ब्लॉक के लिए हाल ही में कंपोजिट लाइसेंस (CL) हेतु निविदाएं जारी की गई हैं। लगभग 301 हेक्टेयर क्षेत्रफल वाले इस ब्लॉक में भी 65 प्रतिशत से अधिक लौह तत्व वाला उच्च श्रेणी का अयस्क मौजूद है, जिससे उद्योग जगत में इसे लेकर भारी उत्साह देखा जा रहा है।
इसके अलावा जिले के बिरुटोला-नवापारा-सोहागपुर चूना पत्थर ब्लॉक की नीलामी प्रक्रिया भी जारी है।
सरकार को मिलेगा बड़ा राजस्व
खनिज विभाग का मानना है कि पारदर्शी ई-नीलामी प्रणाली और रिकॉर्ड प्रीमियम दरों के कारण राज्य सरकार को आने वाले वर्षों में हजारों करोड़ रुपये का अतिरिक्त खनिज राजस्व प्राप्त होगा। इस राशि का उपयोग कबीरधाम जिले में आधारभूत संरचना, स्थानीय विकास कार्यों, वनांचल क्षेत्रों के कल्याण और रोजगार सृजन के लिए किया जा सकेगा।
विशेषज्ञों के अनुसार, कवर्धा की उच्च गुणवत्ता वाली लौह अयस्क खदानों की बढ़ती मांग न केवल राज्य की अर्थव्यवस्था को मजबूती देगी, बल्कि छत्तीसगढ़ को देश के प्रमुख खनिज एवं इस्पात निवेश केंद्रों में भी स्थापित करेगी।