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रायपुर। केरल विधानसभा में वंदे मातरम के संक्षिप्त संस्करण को बजाने को लेकर शुरू हुए विवाद की गूंज अब छत्तीसगढ़ की राजनीति में भी सुनाई देने लगी है। वरिष्ठ कांग्रेस नेता एवं पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के बयान पर पलटवार करते हुए उन्हें बिना पढ़े वंदे मातरम गाने की चुनौती दी है।
शनिवार को पत्रकारों से चर्चा के दौरान भूपेश बघेल ने कहा कि कांग्रेस की सभाओं में राष्ट्रगान और वंदे मातरम दोनों का गायन किया जाता है, जबकि भाजपा अपने कार्यक्रमों में ऐसा नहीं करती। उन्होंने कहा कि लोकसभा से लेकर विभिन्न मंचों पर वंदे मातरम को लेकर लंबे समय से चर्चा होती रही है, ऐसे में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय को अपने मंत्रियों से भी वंदे मातरम गवाना चाहिए।
बघेल ने कहा, “मैं मुख्यमंत्री विष्णु देव साय को चुनौती देता हूं कि वे बिना पढ़े वंदे मातरम गाकर दिखाएं। कांग्रेस की सभाओं में हम राष्ट्रगान और वंदे मातरम दोनों गाते हैं, लेकिन भाजपा के कार्यक्रमों में ऐसा नहीं होता।”
साय ने की थी आलोचना
दरअसल, मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने शुक्रवार को केरल विधानसभा में वंदे मातरम के गायन को लेकर हुए विवाद पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा था कि देश के लोग उन लोगों को स्वीकार नहीं करेंगे जो वंदे मातरम का अपमान करते हैं या “भारत माता की जय” कहने से बचते हैं।
साय ने कहा था कि देश के नागरिक ऐसे लोगों को बर्दाश्त नहीं करेंगे जो वंदे मातरम का सम्मान नहीं करते, भारत माता की जय बोलने से परहेज करते हैं या भगवान राम के अस्तित्व पर सवाल उठाते हैं।
क्या है केरल विधानसभा का विवाद?
केरल विधानसभा में पहली बार सत्र की शुरुआत पुलिस बैंड द्वारा वंदे मातरम के शुरुआती हिस्से की वाद्य प्रस्तुति से की गई। इसके बाद इसके प्रारूप और पूर्ण गायन को लेकर विवाद खड़ा हो गया।
राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर ने इस पर आपत्ति जताते हुए वंदे मातरम के पूर्ण स्वरूप को लेकर सवाल उठाए। वहीं विधानसभा अध्यक्ष ए.एन. शमसीर और राज्य सरकार की ओर से कहा गया कि वंदे मातरम का पूरा गायन अनिवार्य नहीं है।
इस बीच, सीपीआई केरल के सचिव बिनॉय विश्वम ने भी कहा कि वंदे मातरम राष्ट्रगान नहीं है और इसके कुछ निर्धारित छंदों का उपयोग विशेष अवसरों पर किया जाता रहा है। उन्होंने कहा कि इसका गायन अनिवार्य नहीं बल्कि स्वैच्छिक है।
राजनीतिक बयानबाजी तेज
केरल में शुरू हुआ यह विवाद अब राष्ट्रीय स्तर पर राजनीतिक बहस का विषय बन गया है। भाजपा और कांग्रेस समेत विभिन्न दल वंदे मातरम, राष्ट्रगान और राष्ट्रीय प्रतीकों से जुड़े प्रोटोकॉल को लेकर आमने-सामने नजर आ रहे हैं। छत्तीसगढ़ में भी मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बीच इस मुद्दे पर बयानबाजी तेज हो गई है।