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नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में एक ऐतिहासिक कदम उठाया। उन्होंने एसआईआर (वोटर लिस्ट विशेष गहन पुनरीक्षण) मामले में खुद बहस की, जो सुप्रीम कोर्ट के इतिहास में पहली बार किसी सिटिंग मुख्यमंत्री द्वारा की गई बहस है। इससे पहले कुछ मुख्यमंत्री सुप्रीम कोर्ट में पेश हुए थे, लेकिन उन्होंने बहस नहीं की थी।
सुप्रीम कोर्ट की बेंच के सामने ममता बनर्जी ने हाथ जोड़कर कहा: “सेव डैमोक्रेसी।” उन्होंने कोर्ट में अपनी दलील में कहा कि हमें एसआईआर के मुद्दे पर न्याय नहीं मिल रहा है और कोई भी हमारे सवालों का जवाब देने को तैयार नहीं है।
ममता बनर्जी वकीलों की कतार में सबसे आगे बैठीं और कहा कि “मैं इसी राज्य से हूं, इसलिए इस मामले को समझा सकती हूं। मैं सामान्य परिवार से हूं, लेकिन अपनी पार्टी और आम लोगों के लिए लड़ रही हूं।” उन्होंने कोर्ट को बताया कि वोटर लिस्ट में कुछ महिलाओं के नाम नहीं हैं, जो शादी के बाद ससुराल चली गई हैं। ममता ने कहा कि उन्होंने चुनाव आयोग को छह बार पत्र लिखा, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। इससे लग रहा है कि न्याय कहीं पिछले दरवाजे पर अटक गया है।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने ममता से कहा कि उन्होंने बहुत अच्छे वकील चुने हैं, उन्हें बहस करने दें। ममता ने पांच मिनट की बहस की अनुमति मांगी, सीजेआई ने तुरंत कहा कि हम 15 मिनट देंगे। सीजेआई ने कहा कि हर समस्या का समाधान होता है और आपकी राज्य सरकार भी यहां मौजूद है। आपके पास देश के सबसे वरिष्ठ वकील मौजूद हैं।
ममता ने इस दौरान कहा “पहले मुझे बोलने और खत्म करने की इजाजत दीजिए। मैं कुछ तस्वीरें देना चाहती हूं। सारे बंगाली अखबारों ने इसे छापा है। हम चाहते हैं कि समस्या का समाधान निकले। हम अपने दायित्व से पीछे नहीं हटेंगे।”
ममता ने कहा कि भाषा संबंधी दिक्कतों या नामों की वर्तनी में अंतर के कारण किसी को मतदाता सूची से बाहर नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग आपके आदेशों का उल्लंघन कर रहा है, कई BLO (बेसिक लेवल ऑफिसर) की मौत हो चुकी है और बंगाल को विशेष रूप से निशाना बनाया जा रहा है, जबकि असम में ऐसा नहीं हुआ।
सीजेआई ने कहा कि आधार कार्ड को लेकर अभी कोई निर्णय नहीं होगा। कोर्ट ने यह स्पष्ट किया कि मौजूदा समस्या का समाधान निकाला जाएगा और राज्य सरकार की ओर से उठाए गए मुद्दे रिकॉर्ड पर हैं।