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pankaj jha hit back at charandas mahant over rambhadracharya
रायपुर: छत्तीसगढ़ में सनातन और संतों के अपमान को लेकर शुरू हुआ राजनीतिक गतिरोध थमने का नाम नहीं ले रहा है। मनेन्द्रगढ़ में नेता प्रतिपक्ष चरणदास महंत द्वारा जगद्गुरु रामभद्राचार्य को 'भाजपा का प्रचारक' बताए जाने के बाद, अब मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के मीडिया सलाहकार पंकज झा ने मोर्चा संभाल लिया है। झा ने सोशल मीडिया पर एक बेहद तीखा और तार्किक पोस्ट लिखकर चरणदास महंत को घेरा है और दावा किया है कि कांग्रेस में बने रहने के लिए 'बुरा दिखना' और 'सनातन विरोधी' होना पहली शर्त है।
पंकज झा ने चरणदास महंत के बयान को जगद्गुरु रामभद्राचार्य के खिलाफ एक "नया फतवा" बताया। उन्होंने कांग्रेस की अंदरूनी राजनीति पर तंज कसते हुए लिखा “अगर कांग्रेस में कोई अच्छा आदमी भी बचा होगा, तो उसके बचे रहने की पहली शर्त यही है कि आपको बुरा आदमी बनकर दिखाना होगा। महंत जी भी शायद इसी अर्हता (योग्यता) को पूरी करने की कोशिश में हैं।”
झा ने आगे कहा कि कांग्रेस में भविष्य सुरक्षित रखने के लिए नेताओं को समय-समय पर सनातन और देश के विरुद्ध दिखना पड़ता है, ताकि उन्हें बाहरी और भीतरी दुश्मनों का साथ मिलता रहे। उन्होंने हैरानी जताते हुए कहा कि चरणदास महंत, जिनका उपनाम (महंत) ही सनातन परंपरा में बेहद आदरणीय है, वे अकारण ऐसी बयानबाजी करके खुद को कांग्रेस की इन्हीं कसौटियों पर खरा साबित करने की कोशिश कर रहे हैं।
पंकज झा ने कांग्रेस के इतिहास को खंगालते हुए याद दिलाया कि कांग्रेस पार्टी का संतों से पुराना नाता रहा है। उन्होंने लिखा कि इंदिरा गांधी से लेकर पी.वी. नरसिम्हा राव के कार्यकाल तक कांग्रेस में कैसे-कैसे संत रहे हैं और उनके क्या संबंध थे, यह पूरा देश जानता है। ऐसे में कांग्रेस नेताओं द्वारा वर्तमान संतों और उद्भट विद्वानों के विरुद्ध इस तरह की अमर्यादित टिप्पणी करना पूरी तरह से अनुचित है।
अपने हमले को और धार देते हुए मुख्यमंत्री के मीडिया सलाहकार ने चरणदास महंत के पुराने विवादित दौर और बयानों की याद दिलाई। उन्होंने तंज कसते हुए दो प्रमुख घटनाओं का जिक्र किया।
झा ने कहा कि महंत जी बड़े कद के नेता हैं, लेकिन वे अक्सर अपने बयानों से अपना कद छोटा कर लेते हैं। उन्होंने याद दिलाया कि केंद्रीय मंत्री रहते हुए चरणदास महंत ने सिर्फ एक सपने में सोना देखने के दावे के आधार पर खुदाई शुरू करवा दी थी, लेकिन वहां सोना तो दूर, 'आलू' तक नहीं मिला।
उन्होंने महंत के उस पुराने बयान को भी दोहराया जिसमें महंत ने कहा था कि यदि सोनिया गांधी कहेंगी, तो वे उनके घर में झाड़ू-पोछा लगाने से भी पीछे नहीं हटेंगे।
पंकज झा ने अंत में यह आशंका जताई कि चरणदास महंत स्वभाव से एक शालीन नेता माने जाते हैं, इसलिए जगद्गुरु रामभद्राचार्य और बागेश्वर धाम सरकार (पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री) जैसी पूजनीय विभूतियों के खिलाफ उनका यह बयान स्वतंत्र नहीं हो सकता। उन्होंने बिना किसी हिचक के दावा किया कि महंत जी ने यह तीखा बयान निश्चित रूप से कांग्रेस आलाकमान या किसी अन्य के इशारे पर ही दिया है।
क्या है पूरा विवाद?
गौरतलब है कि मनेन्द्रगढ़ दौरे के दौरान पत्रकारों ने नेता प्रतिपक्ष चरणदास महंत और उनकी पत्नी व कोरबा सांसद ज्योत्स्ना महंत से पूछा था कि क्या वे चिरमिरी में चल रही श्रीराम कथा में जगद्गुरु रामभद्राचार्य से आशीर्वाद लेने जाएंगे? इस पर चरणदास महंत ने दोटूक कहा था कि “वे धर्म के नाम पर राजनीति करने आए हैं। मैं उन्हें न जगद्गुरु मानता हूँ और न गाँव का गुरु। वे भाजपा के प्रचारक हैं।”
इसके बाद चिरमिरी की व्यासपीठ से जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने मंच से खुली चुनौती देते हुए कहा था कि जिन्हें उनके जगद्गुरु होने पर शक है, वे आकर शास्त्रों के आधार पर उनकी परीक्षा ले लें। अब इस धार्मिक विवाद में सीएम के सलाहकार के कूदने से छत्तीसगढ़ की राजनीति पूरी तरह गर्मा गई है।