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नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में गहराते संकट और वैश्विक स्तर पर तेल की आपूर्ति में आ रही बाधाओं को देखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक बड़ी मिसाल पेश की है। पीएम मोदी ने न केवल देशवासियों से पेट्रोल-डीजल की बचत करने की अपील की, बल्कि खुद आगे बढ़कर अपने सरकारी काफिले की गाड़ियों में भारी कटौती कर इस मुहिम की शुरुआत की है।
हैदराबाद में एक जनसभा के दौरान प्रधानमंत्री ने देशवासियों से ईंधन बचाने, अनावश्यक विदेश यात्राओं से बचने और 'वर्क फ्रॉम होम' को प्राथमिकता देने की अपील की थी। इस अपील के तुरंत बाद, प्रधानमंत्री ने अपने बड़ोदरा (गुजरात) और गुवाहाटी (असम) दौरों के दौरान अपने काफिले की सुरक्षा गाड़ियों की संख्या काफी हद तक कम कर दी।
आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, काफिले में गाड़ियों की संख्या कम करते समय SPG (स्पेशल प्रोटेक्शन ग्रुप) के सुरक्षा प्रोटोकॉल और प्रधानमंत्री की सुरक्षा का पूरा ध्यान रखा गया है। आवश्यक सुरक्षा व्यवस्थाओं को बरकरार रखते हुए केवल अतिरिक्त वाहनों को हटाया गया है।
असम में हिमंत विस्वा सरमा के शपथ ग्रहण समारोह के दौरान पीएमओ की ओर से सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों को प्रधानमंत्री के संबोधन की कॉपी और एक विशेष एक्शन प्लान सौंपा गया। जिसमें सरकारी कार्यों में इलेक्ट्रिक वाहनों को प्राथमिकता देना। भौतिक यात्राओं के बजाय ऑनलाइन बैठकों को बढ़ावा देना। संकट के समय संसाधनों का न्यूनतम उपयोग करना।
प्रधानमंत्री की अपील का सबसे व्यापक असर उत्तर प्रदेश में देखने को मिला है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश के लिए कड़े निर्देश जारी किए हैं। सीएम ने कहा कि गाड़ियों में पेट्रोल और डीजल का कम से कम इस्तेमाल करें। बिना जरूरत के सोने की खरीदारी से बचें. मुख्यमंत्री और मंत्रियों के काफिले की गाड़ियों को 50 फीसदी किया जाए। मुख्यमंत्री ने ये भी कहा कि सीएम ने कहा कि मंत्री, सांसद, विधायक, जनप्रतिनिधि सप्ताह में एक दिन पब्लिक ट्रांसपोर्ट का इस्तेमाल करें। वर्क फ्रॉम होम कल्चर की भी उन्होंने अपील की।