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prahlad joshi additional charge education ministry after dharmendra pradhan resignation
नई दिल्ली। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा स्वीकार कर लिया है। राष्ट्रपति भवन की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सलाह पर संविधान के अनुच्छेद 75(2) के तहत धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा तत्काल प्रभाव से मंजूर किया गया है।
इसके साथ ही राष्ट्रपति ने प्रधानमंत्री की सलाह पर केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी को उनके मौजूदा मंत्रालयों के साथ-साथ शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार सौंप दिया है।
प्रह्लाद जोशी वर्तमान में उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय तथा नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (MNRE) का कार्यभार संभाल रहे हैं। वे कर्नाटक के धारवाड़ लोकसभा क्षेत्र से सांसद हैं और इंटरनेशनल सोलर अलायंस के अध्यक्ष भी हैं।
धर्मेंद्र प्रधान ने क्यों दिया इस्तीफा?
धर्मेंद्र प्रधान ने शनिवार को शिक्षा मंत्री पद से इस्तीफा देने की घोषणा करते हुए कहा कि उनका यह फैसला छात्रों के भविष्य की रक्षा और जंतर-मंतर पर चल रहे युवाओं के विरोध प्रदर्शनों का "देश-विरोधी ताकतों" द्वारा फायदा उठाने से रोकने के उद्देश्य से लिया गया है।
प्रधान का इस्तीफा मोदी सरकार में किसी वरिष्ठ मंत्री के सड़क पर लगातार जारी विरोध प्रदर्शनों और बढ़ते राजनीतिक दबाव के बीच पद छोड़ने की एक दुर्लभ घटना माना जा रहा है।
CJP ने किया दावा
इस्तीफा केंद्र सरकार और कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के बीच प्रस्तावित तीसरे दौर की बातचीत से कुछ घंटे पहले आया। CJP नेताओं ने पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा उनकी "नॉन-नेगोशिएबल" मांग है।
प्रह्लाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी मिलने के बाद CJP के मुख्य प्रवक्ता सौरव दास ने कहा कि यदि छात्रों और युवाओं की मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया तो आंदोलन फिर से तेज होगा। उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ने पर युवा दोबारा जंतर-मंतर पर लौटकर सरकार से जवाबदेही मांगेंगे।
हालांकि, केंद्र सरकार की ओर से इस बयान पर तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।