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president droupadi murmu appoints new governors six states 2026
नई दिल्ली। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने छह राज्यों में नए राज्यपालों की नियुक्ति की है। राष्ट्रपति भवन की ओर से जारी बयान के अनुसार, इन नियुक्तियों का प्रभाव संबंधित राज्यपालों के पदभार ग्रहण करने की तारीख से लागू होगा। इस फेरबदल में केरल, तमिलनाडु, ओडिशा, कर्नाटक, उत्तराखंड और सिक्किम के राज्यपालों के नाम शामिल हैं।
नई नियुक्तियों के तहत सिक्किम के मौजूदा राज्यपाल ओम प्रकाश माथुर को केरल भेजा गया है। वहीं, केरल के राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर को तमिलनाडु का राज्यपाल नियुक्त किया गया है। इसके अलावा ब्रज मोहन राम को ओडिशा, डॉ. सुधा यादव को कर्नाटक, डॉ. ढाल सिंह बिसेन को उत्तराखंड और दुष्यंत गौतम को सिक्किम का नया राज्यपाल बनाया गया है।
ओम प्रकाश माथुर को केरल की जिम्मेदारी
ओम प्रकाश माथुर भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता हैं और राजस्थान से पूर्व राज्यसभा सांसद रह चुके हैं। उन्हें जुलाई 2024 में सिक्किम का राज्यपाल नियुक्त किया गया था। अब राष्ट्रपति ने उन्हें केरल का राज्यपाल नियुक्त किया है।
माथुर लंबे समय से भाजपा संगठन में सक्रिय रहे हैं। केरल जैसे राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण राज्य में उनकी नियुक्ति को प्रशासनिक और राजनीतिक दृष्टि से अहम माना जा रहा है।
आर्लेकर अब संभालेंगे तमिलनाडु का प्रभार
राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर को केरल से स्थानांतरित कर तमिलनाडु का राज्यपाल नियुक्त किया गया है। वह गोवा विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष रह चुके हैं। इसके अलावा बिहार और हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल के रूप में भी जिम्मेदारी निभा चुके हैं।
आर्लेकर ने जनवरी 2025 में केरल के राज्यपाल का पद संभाला था। तमिलनाडु के पूर्व राज्यपाल आर.एन. रवि के पश्चिम बंगाल स्थानांतरित होने के बाद आर्लेकर तमिलनाडु का अतिरिक्त प्रभार भी संभाल रहे थे। अब उन्हें तमिलनाडु के पूर्णकालिक राज्यपाल की जिम्मेदारी दी गई है।
तमिलनाडु में राज्यपाल और राज्य सरकार के बीच विभिन्न मुद्दों पर पहले भी चर्चा और विवाद देखने को मिलते रहे हैं। ऐसे में आर्लेकर की नियुक्ति को राज्य के प्रशासनिक और राजनीतिक परिदृश्य के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
ब्रज मोहन राम बनाए गए ओडिशा के राज्यपाल
ब्रज मोहन राम को ओडिशा का नया राज्यपाल नियुक्त किया गया है। वह झारखंड के आदिवासी नेता और पूर्व सांसद हैं। ओडिशा में राज्यपाल पद की रिक्ति के बाद उनकी नियुक्ति की गई है।
आदिवासी समुदाय से जुड़े नेतृत्व और क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व के संदर्भ में इस नियुक्ति को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि, उनके कार्यकाल की वास्तविक प्राथमिकताएं पदभार ग्रहण करने के बाद ही स्पष्ट होंगी।
डॉ. सुधा यादव होंगी कर्नाटक की राज्यपाल
डॉ. सुधा यादव को कर्नाटक का राज्यपाल नियुक्त किया गया है। वह हरियाणा के महेंद्रगढ़ से पूर्व भाजपा सांसद रह चुकी हैं। इसके अलावा वह राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग की पूर्व सदस्य भी रही हैं।
सुधा यादव कर्नाटक की दूसरी महिला राज्यपाल होंगी। वह थावरचंद गहलोत की जगह लेंगी, जिनका कार्यकाल समाप्त हो रहा है। उनकी नियुक्ति के साथ कर्नाटक के राजभवन में नेतृत्व परिवर्तन होगा।
डॉ. ढाल सिंह बिसेन को उत्तराखंड की जिम्मेदारी
मध्य प्रदेश के वरिष्ठ भाजपा नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ. ढाल सिंह बिसेन को उत्तराखंड का नया राज्यपाल नियुक्त किया गया है। वह लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (सेवानिवृत्त) की जगह लेंगे।
बिसेन मध्य प्रदेश की राजनीति में लंबे समय से सक्रिय रहे हैं। अब उन्हें उत्तराखंड जैसे पहाड़ी राज्य में संवैधानिक पद की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
दुष्यंत गौतम बने सिक्किम के नए राज्यपाल
भाजपा के पूर्व राष्ट्रीय महासचिव और पूर्व राज्यसभा सांसद दुष्यंत गौतम को सिक्किम का राज्यपाल नियुक्त किया गया है। वह ओम प्रकाश माथुर की जगह लेंगे, जिन्हें केरल स्थानांतरित किया गया है।
गौतम की नियुक्ति के साथ सिक्किम में भी राज्यपाल का पदभार बदल जाएगा। उनका कार्यकाल संबंधित पदभार ग्रहण करने की तारीख से प्रभावी होगा।
विधानसभा चुनावों से पहले नियुक्तियों के राजनीतिक मायने
छह राज्यों में राज्यपालों के इस फेरबदल को आगामी विधानसभा चुनावों से पहले संगठनात्मक, जातीय और क्षेत्रीय समीकरणों के संदर्भ में भी देखा जा रहा है। खास तौर पर केरल और तमिलनाडु जैसे राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण राज्यों में अनुभवी भाजपा नेताओं को राज्यपाल की जिम्मेदारी दी गई है।
हालांकि, इन नियुक्तियों के पीछे सरकार की आधिकारिक मंशा को लेकर अलग से कोई निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा। राज्यपालों की नियुक्ति संवैधानिक प्रक्रिया के तहत की जाती है और संबंधित राज्यों में उनकी भूमिका संविधान के प्रावधानों के अनुसार होती है।
कुल मिलाकर, छह राज्यों में हुए इस बदलाव से राज्यपालों के स्तर पर नई जिम्मेदारियों का निर्धारण हुआ है। अब इन सभी नियुक्तियों के प्रभावी होने की तारीख और संबंधित राज्यपालों के पदभार ग्रहण करने पर आगे की प्रशासनिक प्रक्रिया पूरी होगी।