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जगदलपुर। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू छत्तीसगढ़ के दो दिवसीय दौरे के दूसरे दिन 23 अक्टूबर को बस्तर पहुंचीं। उनका यह दौरा विश्व प्रसिद्ध बस्तर दशहरा की ऐतिहासिक परंपरा और आदिवासी संस्कृति के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है। राष्ट्रपति जगदलपुर में मां दंतेश्वरी मंदिर में पूजा-अर्चना करने के बाद ऐतिहासिक मुरिया दरबार में शामिल हो रही हैं। इस दौरान वे बस्तर के पारंपरिक जनजातीय प्रतिनिधियों मांझी-चालकियों से मुलाकात कर रही हैं। इसके बाद राष्ट्रपति लालबाग मैदान में आयोजित सार्वजनिक कार्यक्रम और आमसभा को संबोधित करेंगी।
राष्ट्रपति के दौरे को देखते हुए जिला प्रशासन और बस्तर पुलिस ने सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए हैं। जगदलपुर एयरपोर्ट, मां दंतेश्वरी मंदिर और सिरहासार भवन के आसपास के क्षेत्रों को नो-ड्रोन फ्लाइंग जोन घोषित किया गया है। प्रशासन ने प्रतिबंधित क्षेत्र में ड्रोन उड़ाने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी है।
700 साल से अधिक पुरानी परंपरा में राष्ट्रपति की मौजूदगी
बस्तर दशहरा देश के सबसे विशिष्ट सांस्कृतिक आयोजनों में गिना जाता है। इसकी पहचान केवल धार्मिक उत्सव तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें बस्तर की जनजातीय परंपराओं, सामुदायिक व्यवस्था और ऐतिहासिक विरासत की महत्वपूर्ण भूमिका है। इसी परंपरा से जुड़ा मुरिया दरबार आदिवासी समाज के लिए विशेष महत्व रखता है।
मुरिया दरबार में बस्तर के पारंपरिक प्रतिनिधि मांझी, चालकी और अन्य समुदायों के प्रतिनिधि एकत्र होते हैं। ऐतिहासिक रूप से यह ऐसा मंच रहा है, जहां स्थानीय समुदायों के मुद्दों और समस्याओं को तत्कालीन शासक के सामने रखा जाता था। समय के साथ इस परंपरा ने आधुनिक प्रशासन और जनजातीय नेतृत्व के बीच संवाद के मंच का रूप लिया है।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की मुरिया दरबार में भागीदारी को बस्तर की सांस्कृतिक पहचान और जनजातीय विरासत के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस कार्यक्रम के माध्यम से देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद पर आसीन व्यक्ति की मौजूदगी में बस्तर की विशिष्ट परंपराओं को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिलेगी।
मांझी-चालकियों से मुलाकात, स्थानीय मुद्दों पर संवाद
मुरिया दरबार की प्रमुख विशेषता इसमें बस्तर के पारंपरिक जनजातीय नेतृत्व की भागीदारी है। मांझी-चालकी समुदाय के प्रतिनिधियों के साथ नाइक-पाइक और अन्य पारंपरिक प्रतिनिधि भी इस व्यवस्था से जुड़े हैं।
राष्ट्रपति के कार्यक्रम में इन प्रतिनिधियों से मुलाकात और संवाद को विशेष महत्व दिया जा रहा है। बस्तर जैसे जनजातीय बहुल क्षेत्र में स्थानीय समुदायों की सामाजिक, सांस्कृतिक और विकास संबंधी जरूरतों को समझने के लिहाज से यह कार्यक्रम अहम है।
मुरिया दरबार की परंपरा स्थानीय लोगों को अपनी बात रखने का अवसर देती है। ऐसे में राष्ट्रपति की मौजूदगी से इस ऐतिहासिक मंच का महत्व और बढ़ गया है।
लालबाग मैदान में आमसभा, राष्ट्रपति के संबोधन पर रहेगी नजर
मुरिया दरबार में सहभागिता के बाद राष्ट्रपति लालबाग मैदान में आयोजित सार्वजनिक कार्यक्रम में शामिल होंगी। यहां वे आमसभा को संबोधित करेंगी। कार्यक्रम में बस्तर की जनजातीय संस्कृति, परंपराओं और सामाजिक जीवन से जुड़े विषय प्रमुख रहेंगे।
राष्ट्रपति का यह दौरा ऐसे समय हो रहा है, जब बस्तर की सांस्कृतिक विरासत को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने और क्षेत्र के विकास को गति देने पर जोर दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने भी राष्ट्रपति के बस्तर आगमन को प्रदेश और यहां की जनजातीय संस्कृति के लिए गौरवपूर्ण अवसर बताया है।
एयरपोर्ट से मंदिर तक सुरक्षा सख्त, जानिए नो-ड्रोन जोन के नियम
राष्ट्रपति की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए प्रशासन ने जगदलपुर के प्रमुख स्थानों पर ड्रोन उड़ाने पर प्रतिबंध लगाया है। जारी आदेश के अनुसार
जगदलपुर एयरपोर्ट: मां दंतेश्वरी एयरपोर्ट से 25 किलोमीटर की परिधि में 23 अक्टूबर को सुबह 6 बजे से शाम 4 बजे तक ड्रोन उड़ाने पर प्रतिबंध है।
मां दंतेश्वरी मंदिर और सिरहासार भवन: इन स्थानों से 3 किलोमीटर के दायरे में सुबह 7 बजे से शाम 5 बजे तक ड्रोन संचालन प्रतिबंधित है।
उल्लंघन पर कार्रवाई: प्रतिबंधित क्षेत्र में ड्रोन उड़ाने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
सुरक्षा व्यवस्था के तहत संवेदनशील स्थानों पर निगरानी, बैरिकेडिंग और पुलिस बल की तैनाती की गई है। राष्ट्रपति के कार्यक्रम को देखते हुए स्थानीय प्रशासन यातायात व्यवस्था पर भी नजर रख रहा है। लोगों से सुरक्षा संबंधी निर्देशों का पालन करने की अपील की गई है।
क्या है मुरिया दरबार? क्यों है इतना खास
मुरिया दरबार बस्तर दशहरा की एक महत्वपूर्ण ऐतिहासिक परंपरा है। इसका संबंध बस्तर की पारंपरिक शासन व्यवस्था और जनजातीय समुदायों की सामूहिक निर्णय लेने की परंपरा से है।
इस मंच पर मांझी-मुखिया और दूसरे पारंपरिक प्रतिनिधि अपनी समस्याएं, सुझाव और सामुदायिक मुद्दे रखते रहे हैं। पहले जहां राजा के समक्ष जनसमस्याएं रखी जाती थीं, वहीं अब इस परंपरा में प्रशासन की भूमिका भी महत्वपूर्ण हो गई है।
बस्तर दशहरा की खासियत यह भी है कि यह सामान्य दशहरा उत्सवों से अलग है। यहां रावण दहन नहीं होता, बल्कि मां दंतेश्वरी की आराधना, देवी-देवताओं की परंपराएं, रथ यात्रा और जनजातीय रीति-रिवाज इस उत्सव का केंद्र हैं। यह पर्व लगभग 75 दिनों तक चलने वाली सांस्कृतिक परंपरा के लिए जाना जाता है।
भारत सरकार के पर्यटन पोर्टल और बस्तर जिला प्रशासन के अनुसार, मुरिया दरबार इस उत्सव के समापन चरण से जुड़ा एक प्रमुख आयोजन है। यह बस्तर की सामाजिक एकजुटता और जीवंत जनजातीय विरासत को प्रदर्शित करता है।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का जगदलपुर दौरा केवल एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि बस्तर की ऐतिहासिक परंपराओं और आदिवासी समाज की विशिष्ट पहचान को राष्ट्रीय स्तर पर सामने लाने का अवसर है। मुरिया दरबार में उनकी मौजूदगी से पारंपरिक जनजातीय नेतृत्व और संवैधानिक व्यवस्था के बीच संवाद को भी विशेष महत्व मिलेगा।
अब इस दौरे के दौरान राष्ट्रपति के संबोधन और स्थानीय समुदायों से संवाद पर सबकी नजर रहेगी। बस्तर के लोगों के लिए यह अपनी संस्कृति, परंपरा और ऐतिहासिक विरासत को देश के सामने प्रस्तुत करने का एक महत्वपूर्ण अवसर है।