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rahul gandhi on education system
नई दिल्ली। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने बुधवार को राजस्थान के कोटा में आयोजित ‘छात्रों की गूंज’ महा रैली और छात्र संवाद कार्यक्रम में देश की वर्तमान शिक्षा व्यवस्था, बेरोजगारी और पेपर लीक जैसे मुद्दों पर केंद्र सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि भारत की शिक्षा प्रणाली अब “सेलेब्रेशन सिस्टम” नहीं, बल्कि “रिजेक्शन सिस्टम” और “वसूली मशीन” बन चुकी है, जो छात्रों और उनके परिवारों पर आर्थिक और मानसिक दबाव बढ़ा रही है।
राहुल गांधी ने कहा कि देश की मौजूदा शिक्षा व्यवस्था बच्चों के सपनों को पूरा करने के बजाय उन पर दबाव और तनाव बढ़ा रही है। उन्होंने कहा कि यह व्यवस्था छात्रों को आगे बढ़ाने के बजाय उन्हें कुचलने का काम कर रही है।
उन्होंने कहा, “युवा देश का भविष्य हैं, लेकिन वर्तमान शिक्षा प्रणाली उनके सपनों का सम्मान नहीं करती। यह उन्हें केवल डॉक्टर, इंजीनियर, वकील, आईएएस या सेना जैसी सीमित संभावनाओं तक बांध देती है। हमें ऐसा सिस्टम चाहिए जो हर युवा को अपने बड़े सपने देखने और उन्हें पूरा करने का अवसर दे।”
राहुल गांधी ने दावा किया कि देश की शिक्षा व्यवस्था लाखों-करोड़ों रुपये की वसूली का माध्यम बन गई है। उन्होंने कहा कि केवल नीट (NEET) परीक्षा में हर साल करीब 22 लाख छात्र शामिल होते हैं, जिनके परिवारों की जेब से लगभग 1.32 लाख करोड़ रुपये खर्च होते हैं।
उन्होंने आगे कहा कि SSC, UPSC, RRB, JEE और NEET जैसी पांच प्रमुख परीक्षाओं के जरिए देश के परिवारों से लगभग 3.5 लाख करोड़ रुपये खर्च कराए जाते हैं, जो केंद्र सरकार के पांच बड़े मंत्रालयों के बजट के बराबर है।
राहुल गांधी ने कहा कि पेपर लीक और बेरोजगारी जैसी समस्याओं ने युवाओं का भरोसा तोड़ा है। उन्होंने आरोप लगाया कि देश की शिक्षा प्रणाली एक “रिजेक्शन सिस्टम” बन गई है, जहां हजारों-लाखों छात्र मेहनत करने के बावजूद अवसरों से वंचित रह जाते हैं।
उन्होंने दावा किया कि 1,000 में से केवल 12 छात्रों को ही स्थायी रोजगार मिल पाता है, जबकि बड़ी संख्या में इंजीनियर और पढ़े-लिखे युवा बेरोजगारी का सामना कर रहे हैं।
छात्रों की नारों के बीच राहुल गांधी ने मध्य प्रदेश की नीट अभ्यर्थी आकांक्षा की आत्महत्या का मुद्दा उठाते हुए कहा कि यह किसी एक छात्र या उसके परिवार की विफलता नहीं, बल्कि शिक्षा प्रणाली की असफलता है। उन्होंने कहा कि ऐसी घटनाएं बताती हैं कि छात्रों पर अत्यधिक दबाव बनाया जा रहा है।
उन्होंने कहा, “हमारी लड़ाई आज से शुरू हुई है। हमें ऐसी शिक्षा व्यवस्था बनानी होगी, जिसमें किसी भी बच्चे को तनाव और निराशा के कारण आत्महत्या जैसा कदम उठाने की नौबत न आए।”
राहुल गांधी ने छात्रों से संवाद के दौरान कहा कि देश को ऐसी शिक्षा प्रणाली की जरूरत है, जो कम लागत में युवाओं को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा दे और उन्हें अपने सपनों को साकार करने का अवसर प्रदान करे। उन्होंने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल परीक्षाएं पास कराना नहीं, बल्कि युवाओं की क्षमता और रचनात्मकता को आगे बढ़ाना होना चाहिए।
कोचिंग हब के रूप में प्रसिद्ध कोटा में आयोजित इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं ने हिस्सा लिया और पेपर लीक, प्रतियोगी परीक्षाओं की लागत, रोजगार और मानसिक दबाव जैसे मुद्दों पर अपनी बात रखी।