

Copyright © 2026 rights reserved by Inkquest Media
अन्य समाचार

raipur daldal seoni 220kv substation electricity supply 60 crore project
रायपुर। राजधानी रायपुर में बिजली आपूर्ति व्यवस्था को और मजबूत करने की दिशा में बड़ी उपलब्धि हासिल हुई है। शहर की करीब 40 फीसदी आबादी को बेहतर और भरोसेमंद बिजली आपूर्ति देने के लिए दलदलसिवनी में करीब 60 करोड़ रुपये की लागत से तैयार 220 केवी के नए उपकेंद्र को ऊर्जीकृत कर दिया गया है। इस उपकेंद्र के शुरू होने से राजधानी की ढाई लाख से अधिक घरेलू, गैर-घरेलू और औद्योगिक बिजली मांग को पहले की तुलना में अधिक सुदृढ़ तरीके से पूरा करने में मदद मिलेगी।
इस उपलब्धि पर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और पावर कंपनीज के चेयरमैन सुबोध कुमार सिंह ने अधिकारी-कर्मचारियों को बधाई दी है। पावर ट्रांसमिशन कंपनी के एमडी राजेश कुमार शुक्ला और डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी के एमडी भीम सिंह कंवर ने स्विच ऑन कर उपकेंद्र को ऊर्जीकृत किया।
160 एमवीए और 63 एमवीए के ट्रांसफार्मर लगाए गए
दलदलसिवनी के इस नए उपकेंद्र में फिलहाल 160 एमवीए क्षमता का एक ट्रांसफार्मर और 63 एमवीए क्षमता के दो ट्रांसफार्मर ऊर्जीकृत किए गए हैं। इसके अलावा 160 एमवीए क्षमता का एक और ट्रांसफार्मर अगले दो महीने में स्थापित किया जाएगा। इससे उपकेंद्र की क्षमता और बढ़ेगी तथा भविष्य में बढ़ती बिजली मांग को पूरा करने में सहायता मिलेगी।
यह उपकेंद्र करीब 10 एकड़ क्षेत्र में विकसित किया गया है। राजधानी बनने के बाद शहर के बीच बड़े विद्युत उपकेंद्र के लिए जमीन और लाइन निर्माण जैसी कई चुनौतियां थीं। रायता से दलदलसिवनी तक लाइन बिछाने के काम में जिला प्रशासन, पुलिस प्रशासन और स्थानीय निकायों की सामूहिक सहभागिता से इन समस्याओं का समाधान किया गया।
कोरबा से रायपुर तक ऐसे पहुंचती है बिजली
राजधानी की बिजली व्यवस्था में दलदलसिवनी उपकेंद्र की भूमिका काफी महत्वपूर्ण है। कोरबा के मड़वा से आने वाली बिजली पहले 400 केवी की लाइनों के माध्यम से 400 केवी उपकेंद्र तक पहुंचती है। इसके बाद बिजली को 220 केवी और फिर 132 केवी के उपकेंद्रों तक पहुंचाया जाता है।
आगे डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी के 33 केवी और 11 केवी उपकेंद्रों के माध्यम से एलटी लाइनों से घरेलू और अन्य उपभोक्ताओं तक बिजली पहुंचती है। इस पूरी व्यवस्था में नया दलदलसिवनी उपकेंद्र एक महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में जुड़ा है।
कचना और उरला के लिए 132 केवी की दो लाइनें
दलदलसिवनी उपकेंद्र से वर्तमान में 132 केवी की दो लाइनें कचना और उरला की ओर बिजली आपूर्ति के लिए निकाली गई हैं। इसके अलावा यहां से 33 केवी की आठ फीडर लाइनें निकाली जाएंगी। इनमें सात फीडर रायपुर शहर और एक फीडर रायपुर ग्रामीण क्षेत्र के लिए होगी।
अधिकारियों के अनुसार, इससे बिजली आपूर्ति का लोड अलग-अलग क्षेत्रों में बेहतर तरीके से बांटा जा सकेगा। किसी एक उपकेंद्र पर अधिक निर्भरता कम होगी और बिजली व्यवस्था को स्थिर बनाए रखने में मदद मिलेगी।
डोमा उपकेंद्र पर निर्भरता होगी कम
अब तक राजधानी के एक बड़े हिस्से की बिजली आपूर्ति डोमा स्थित 220 केवी उपकेंद्र से होती थी। शहर के कई हिस्सों से डोमा की दूरी अधिक होने के कारण बिजली आपूर्ति व्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव पड़ता था। दलदलसिवनी उपकेंद्र के जुड़ने से राजधानी में बिजली आपूर्ति का नेटवर्क अधिक मजबूत और संतुलित होगा।
भविष्य में सिलतरा, मंदिर हसौद और नवा रायपुर को भी लाभ
परियोजना में 220 केवी की करीब साढ़े चार किलोमीटर लंबी नई मल्टीसर्किट लाइन भी शामिल है। इस लाइन की वजह से भविष्य में यहां से 132 केवी की दो और लाइनें निकाली जा सकेंगी। इससे आने वाले समय में सिलतरा, मंदिर हसौद और नवा रायपुर क्षेत्र की बिजली व्यवस्था को भी लाभ मिलेगा।
बढ़ते शहरीकरण, नए आवासीय क्षेत्रों, व्यावसायिक गतिविधियों और औद्योगिक मांग को देखते हुए यह उपकेंद्र रायपुर की भविष्य की बिजली जरूरतों के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
अधिकारियों और कर्मचारियों की रही अहम भूमिका
उपकेंद्र के ऊर्जीकृत होने के अवसर पर पावर कंपनी के वरिष्ठ अधिकारी और कर्मचारी मौजूद रहे। कार्यक्रम में ईडी एमएस चौहान, केएस मनोठिया, संजय पटेल, वीके दीक्षित, सीई अब्राहम वर्गीस, प्रसन्ना गोसावी, संजय तिवारी, संजीव सिंह, अनीस लखेरा, एसीई आरके तिवारी, एसई पुष्पा पिल्लई समेत बड़ी संख्या में अधिकारी उपस्थित रहे।
इसके अलावा वीए देशमुख, एम. विश्वकर्मा, करुणेश यादव, धरमजीत भट्ट, विक्रम मंधान, धनेश देवांगन, उमाकांत यादव, सुचिंद्र उइके, जितेंद्र झा, प्रदीप साहू, अनिल द्विवेदी, अखिलेश गजपाल, अभिषेक दीवान, अमृता महाजन, रोहित वर्मा, सुरेश वर्मा, प्रबोल मित्रा, पीके तिवारी, अरुण एंटोनी, नैनेश गोटे और रामकुमार ठाकुर सहित अन्य अधिकारी-कर्मचारी भी मौजूद रहे।
कुल मिलाकर, दलदलसिवनी का 220 केवी उपकेंद्र रायपुर की बिजली आपूर्ति व्यवस्था में एक महत्वपूर्ण विस्तार है। इससे न केवल वर्तमान में ढाई लाख से अधिक उपभोक्ताओं की बिजली जरूरतों को बेहतर ढंग से पूरा करने में मदद मिलेगी, बल्कि आने वाले वर्षों में राजधानी और आसपास के तेजी से विकसित हो रहे क्षेत्रों की बढ़ती बिजली मांग को पूरा करने के लिए भी मजबूत आधार तैयार होगा।