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राजधानी रायपुर में एक रिटायर्ड पशु चिकित्सा अधिकारी को डिजिटल अरेस्ट का झांसा देकर कुल ₹1 करोड़ 28 लाख से अधिक की ठगी करने वाले आरोपी को पुलिस ने हरियाणा से गिरफ्तार किया है। इस मामले में अब तक 58 लाख रुपए पीड़ित को वापस लौटाए जा चुके हैं, जबकि बाकी पैसा पुलिस ने अन्य खातों में होल्ड करा दिया है।
क्या हुआ पूरा मामला?
31 दिसंबर 2025 को रिटायर्ड पशु पालन विभाग के डॉक्टर सपन कुमार को अचानक एक अनजान नंबर से WhatsApp कॉल आया। कॉल करने वाले ने खुद को मुंबई क्राइम ब्रांच का अधिकारी बताया और एक नकली FIR की कॉपी भेजी। ठगों ने कहा कि सपन कुमार के क्रेडिट कार्ड से कई धोखाधड़ी हुई है और वे मनी लांड्रिंग केस में फँसे हैं। इस डर से उन्होंने उन्हें फर्जी दावा करते हुए डिजिटल अरेस्ट की धमकी दी और गिरफ्तार होने की बात कहकर व्यक्तिगत बैंक डिटेल, क्रेडिट कार्ड व एफडी (Fixed Deposit) की जानकारी ले ली।
ठगों ने पहली बार 3 जनवरी 2026 को 34 लाख रुपए एक खाते में RTGS के जरिए जमा करने को कहा, जो सपन कुमार ने ट्रांसफर कर दिए। इसके बाद 13 जनवरी को दूसरी बार 39 लाख रुपए और 16 जनवरी को तीसरी बार 55 लाख रुपए ट्रांसफर करवाए गए। कुल ₹1,28,00,000 से अधिक की रकम ठग ली गई। तीसरी किश्त के बाद ही पीड़ित को ठगी का एहसास हुआ और वह फौरन विधानसभा थाना पहुंचे तथा रिपोर्ट दर्ज कराई।
IG अमरेश मिश्रा के निर्देश पर रेंज साइबर थाना रायपुर ने ऑपरेशन साइबर शील्ड शुरू किया। तकनीकी साक्ष्यों की जांच में पता चला कि ठगी की रकम कई अलग-अलग खातों में ट्रांसफर की गई थी। पुलिस ने तत्काल कदम उठाते हुए कई खातों को फ्रीज कराया और लगभग ₹58 लाख रुपए पीड़ित को वापस कर दिए। शेष रकम भी ठग के अन्य खातों में होल्ड कराई गई है।
दिल्ली–हरियाणा क्षेत्र में बदलती रही। पुलिस टीम रवाना हुई, लेकिन वह लगातार ठिकाने बदल रहा था। अंत में सोमनाथ महतो (27) को गुड़गांव के सोहना रोड से गिरफ्तार किया गया, जहां वह आर मंगलम यूनिवर्सिटी के पास** छिपा हुआ था। उसे रायपुर लाकर कोर्ट में पेश किया गया, जहां से न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया।
इस तरह के डिजिटल अरेस्ट के मामलों में धोखेबाज़ फर्जी अधिकारी बनाकर लोगों को डराते हैं और पैसे की मांग करते हैं। पुलिस ने नागरिकों से सावधानी बरतने और किसी भी संदिग्ध कॉल पर व्यक्तिगत जानकारी साझा न करने की चेतावनी दी है।