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ग्वालियर में आबकारी विभाग के अपर आयुक्त राजेश हेनरी पर आपराधिक षड्यंत्र करके फर्जी जाति प्रमाणपत्र बनवाने का गंभीर आरोप लगा है। आरोप है कि उन्होंने इस फर्जी प्रमाणपत्र का इस्तेमाल कर पिछले 35 साल से विभाग में नौकरी की है।
फर्जी प्रमाणपत्र का मामला
राजेश हेनरी के फर्जी प्रमाणपत्र में छत्तीसगढ़ के बिलासपुर तहसील का सील और साइन मिले हैं। इस प्रमाणपत्र के आधार पर उन्होंने खुद को अनुसूचित जनजाति (एसटी) समुदाय का बताया और आबकारी विभाग में नौकरी शुरू की।
इंदौर के वकील और आरटीआई एक्टिविस्ट राजेंद्र गुप्ता ने इस मामले में शिकायत दर्ज कराई। उन्होंने बताया कि साल 1990-91 में राजेश हेनरी ने फर्जी जाति प्रमाणपत्र बनवाया और इसके आधार पर नौकरी पर कब्जा जमाया।
राजेंद्र गुप्ता का आरोप है कि आबकारी विभाग के कई अफसरों को लंबे समय से पता था कि राजेश हेनरी ने फर्जी प्रमाणपत्र का सहारा लिया है। बावजूद इसके, विभागीय अफसर उनके मामले को दबाने की कोशिश करते रहे और उन्हें बचाते रहे।
सूचना के अधिकार (RTI) के तहत जुटाई गई जानकारी के अनुसार, राजेश हेनरी ने बिलासपुर तहसील का सील और साइन लगे जाति प्रमाणपत्र का उपयोग किया। लेकिन तहसील के कोर्ट के दायरा पंजी में उनके जाति प्रमाणपत्र का कोई रिकॉर्ड नहीं पाया गया।
छत्तीसगढ़ में जांच लंबित
इस मामले की जानकारी छत्तीसगढ़ की उच्च स्तरीय प्रमाणीकरण छानबीन समिति को मिली, जिसने राजेश हेनरी के एसटी प्रमाणपत्र की जांच के लिए नोटिस जारी किया और इसे जिला स्तरीय जाति छानबीन समिति को भेजा। लेकिन दो साल से यह जांच लंबित पड़ी हुई है। आदिवासी विकास विभाग के सहायक आयुक्त संजय चंदेल ने बताया कि राजेश हेनरी को अपने जाति संबंधी दस्तावेज़ प्रस्तुत करने के लिए बुलाया गया, लेकिन वह अब तक उपस्थित नहीं हुए।
इस मामले की शिकायत अब राष्ट्रीय अनुसूचित जाति-जनजाति आयोग तक पहुंच गई है। आयोग ने बिलासपुर कलेक्टर और मध्यप्रदेश के आबकारी विभाग के मुख्य सचिव को नोटिस जारी किया है और 15 दिन के भीतर जवाब मांगा है।