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राजनांदगांव। छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव जिले में 14 वर्षीय नाबालिग बालिका के स्वास्थ्य परीक्षण में गंभीर लापरवाही बरते जाने के मामले में राज्य सरकार ने बड़ी कार्रवाई करते हुए खंड चिकित्सा अधिकारी (बीएमओ) डॉ. एन.के. टण्डन को निलंबित कर दिया है। जांच में स्वास्थ्य विभाग की गंभीर चूक सामने आने के बाद यह कदम उठाया गया।
मामला सोमनी थाना क्षेत्र का है, जहां एक बीमार 14 वर्षीय नाबालिग बालिका को स्वास्थ्य केंद्र में जांच के दौरान गर्भवती बताया गया था। डॉक्टर की रिपोर्ट के आधार पर पुलिस ने बच्ची से पूरी रात पूछताछ की और उससे कथित तौर पर यह जानने का प्रयास किया कि वह किसके साथ संबंध बनाकर गर्भवती हुई है।
हालांकि बाद में जब बालिका का दोबारा परीक्षण राजनांदगांव जिला अस्पताल में कराया गया, तो रिपोर्ट पूरी तरह निगेटिव आई। इससे स्पष्ट हो गया कि प्रारंभिक स्वास्थ्य जांच रिपोर्ट गलत थी और बच्ची गर्भवती नहीं थी। इस खुलासे के बाद पुलिस प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया।
मामले के सामने आने के बाद राज्य सरकार ने इसे गंभीरता से लिया और राजनांदगांव कलेक्टर जीतेंद्र यादव के नेतृत्व में जांच के निर्देश दिए। कलेक्टर के आदेश पर दो अलग-अलग जांच समितियों का गठन किया गया था।
जांच समितियों की रिपोर्ट में स्वास्थ्य विभाग की गंभीर लापरवाही उजागर हुई। रिपोर्ट के आधार पर राज्य शासन ने खंड चिकित्सा अधिकारी डॉ. एन.के. टण्डन को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। सरकार ने संकेत दिए हैं कि मामले में दोषी पाए जाने वाले अन्य जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों पर भी कार्रवाई की जा सकती है।
यह मामला न केवल स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता है, बल्कि एक गलत मेडिकल रिपोर्ट के कारण नाबालिग बच्ची को मानसिक प्रताड़ना झेलनी पड़ी, जिसने पूरे घटनाक्रम को बेहद संवेदनशील और गंभीर बना दिया है।