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राजनांदगांव: राजनांदगांव रेंज अब भी पूरी तरह से माओवाद मुक्त नहीं हो सकी है। रेंज के मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी क्षेत्र में अब भी आठ माओवादियों के सक्रिय होने की जानकारी मिली है। यह इलाका पिछले तीन दशकों से माओवादी गतिविधियों से प्रभावित रहा है। सुरक्षा एजेंसियां इन कैडरों के आत्मसमर्पण के लिए स्वजनों के माध्यम से लगातार अपील कर रही हैं। केंद्र सरकार ने छत्तीसगढ़ को 31 मार्च तक माओवाद मुक्त बनाने का लक्ष्य रखा है, जिसके चलते सुरक्षा बलों की गतिविधियां और तेज कर दी गई हैं।
आरकेबी (राजनांदगांव-कांकेर बार्डर) डिवीजन में सक्रिय माओवादी कैडरों में सेंट्रल कमेटी मेंबर विजय रेड्डी की पत्नी रुपी, मंगती पुनेन, मंगेश पोडियाम, रंजित होड़ी, हिड़मे मरकाम, महेश डोड़ी, राजे और गणेश शामिल हैं। ये सभी मूलतः बीजापुर-नारायणपुर क्षेत्र के निवासी हैं और घने जंगलों में अलग-अलग जगहों पर छिपे हुए हैं। सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि माओवादी अब स्थानीय नागरिकों की मदद के बिना भी छिपे हुए हैं और किसी भी तरह का आत्मसमर्पण नहीं कर रहे।
13 अगस्त 2025 को हुई मुठभेड़ में सेंट्रल कमेटी मेंबर विजय रेड्डी और डिवीजनल कमेटी सचिव लोकेश सलामे ढेर हो चुके हैं। इसके बावजूद बचे हुए माओवादी हथियार नहीं डाल रहे हैं और शीर्ष नेतृत्व के उन सदस्यों के साथ जुड़े हुए हैं, जो आत्मसमर्पण के विरोध में हैं। सुरक्षा बल अब घोर प्रभावित क्षेत्रों में सामुदायिक पुलिसिंग और स्थानीय लोगों को मुख्यधारा से जोड़ने के प्रयास कर रहे हैं।
राजनांदगांव रेंज के बाकी जिले जैसे खैरागढ़, छुईखदान, गंडई, राजनांदगांव और कबीरधाम जिले अब माओवादी गतिविधियों से पूरी तरह मुक्त हो चुके हैं। नवंबर-दिसंबर 2025 में एक के बाद एक 33 बड़े माओवादी कैडर ने आत्मसमर्पण किया था, जिसमें एक करोड़ रुपये के इनामी सेंट्रल कमेटी मेंबर रामधेर भी शामिल थे।