

Copyright © 2026 rights reserved by Inkquest Media
अन्य समाचार

sant ravidas jayanti public holiday chhattisgarh cm vishnu deo sai big announcements
रायपुर। संत शिरोमणि गुरु रविदास महाराज की 650वीं जयंती वर्ष के उपलक्ष्य में राजधानी रायपुर के दीनदयाल उपाध्याय ऑडिटोरियम में आयोजित कलश वंदन महाअभियान में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय शामिल हुए। इस दौरान उन्होंने संत रविदास के सम्मान में कई महत्वपूर्ण घोषणाएं करते हुए कहा कि संत रविदास ने समरसता, समानता, भक्ति और सामाजिक न्याय का जो मार्ग दिखाया, वही विकसित, समरस और सशक्त भारत की आधारशिला है।

कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने वाराणसी के सीर गोवर्धनपुर स्थित संत रविदास की जन्मस्थली से लाए गए पवित्र मिट्टी और जल से भरे कलश का श्रद्धापूर्वक वंदन किया तथा विधिवत पूजन-अर्चन कर संत रविदास को नमन किया। इसके बाद उन्होंने प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए प्रतिनिधियों को पवित्र कलश सौंपे और गांव-गांव तक इन्हें पहुंचाने वाले वाहनों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।

संत रविदास के सम्मान में बड़ी घोषणाएं
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने घोषणा की कि वर्ष 2027 में संत रविदास जयंती (माघी पूर्णिमा) के अवसर पर पूरे प्रदेश में सार्वजनिक अवकाश रहेगा। साथ ही इस दिन राज्यभर में मांस एवं मदिरा की बिक्री पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगी।

उन्होंने यह भी घोषणा की कि छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना दिवस पर दिए जाने वाले राज्य अलंकरण पुरस्कारों में संत गुरु रविदास के नाम से एक नया राज्य अलंकरण पुरस्कार शुरू किया जाएगा। इसके अलावा नवा रायपुर के एक प्रमुख चौक का नामकरण भी संत गुरु रविदास के नाम पर किया जाएगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि संत रविदास का प्रसिद्ध संदेश— “ऐसा चाहूं राज मैं, जहाँ मिले सबन को अन्न। छोट-बड़ो सब सम बसैं, रविदास रहैं प्रसन्न।” को छत्तीसगढ़ विधानसभा में अंकित कराने के लिए विधानसभा अध्यक्ष से चर्चा कर प्रयास किया जाएगा।
संत रविदास का संदेश आज भी प्रासंगिक
मुख्यमंत्री ने कहा कि जब-जब समाज में अन्याय, भेदभाव और छुआछूत जैसी कुरीतियां बढ़ीं, तब-तब संतों और महापुरुषों ने समाज को नई दिशा दी। संत रविदास ने अपने जीवन और उपदेशों से सामाजिक समरसता, समानता और भक्ति का संदेश दिया, जो आज भी समाज को प्रेरित करता है।

उन्होंने संत रविदास के प्रसिद्ध संदेश "मन चंगा तो कठौती में गंगा" का उल्लेख करते हुए कहा कि यह केवल आस्था का प्रतीक नहीं, बल्कि आंतरिक शुद्धता और सच्ची भक्ति का संदेश है।
"विकास भी, विरासत भी" पर जोर
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश "सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास" के मंत्र पर आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि "विकास भी, विरासत भी" का संदेश देश की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक धरोहर के संरक्षण का मार्गदर्शक है।
उन्होंने बताया कि संत रविदास की जन्मभूमि से लाई गई पवित्र मिट्टी और जल का कलश देशभर के मठों, मंदिरों और आस्था केंद्रों तक पहुंचाया जा रहा है, जिससे सामाजिक समरसता और राष्ट्रीय एकता को मजबूती मिलेगी।
सामाजिक समरसता का जनआंदोलन बनेगा अभियान
मुख्यमंत्री ने डॉ. सनम जांगड़े के नेतृत्व में सीर गोवर्धनपुर से पवित्र कलश लेकर आए प्रतिनिधिमंडल की सराहना करते हुए कहा कि यह अभियान संत रविदास के विचारों को जन-जन तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। उन्होंने विश्वास जताया कि यह अभियान प्रदेश के हर गांव और हर समाज तक समरसता और समानता का संदेश पहुंचाएगा।
कई जनप्रतिनिधि रहे मौजूद
कार्यक्रम में मंत्री गुरु खुशवंत साहेब, टंकराम वर्मा, दयाल दास बघेल, लक्ष्मी राजवाड़े, सांसद सरोज पाण्डेय, अजय जामवाल सहित अनेक जनप्रतिनिधि, संत समाज के प्रतिनिधि और बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।