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ग्वालियर। मध्य प्रदेश के प्रतिष्ठित सिंधिया राजघराने में पिछले 38 वर्षों से चल रहा संपत्ति विवाद आखिरकार समाप्त हो गया है। केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया, उनकी बुआ वसुंधरा राजे, यशोधरा राजे और उषा राजे के बीच लंबे समय से चल रहे विवाद का अदालत के बाहर समझौता हो गया है। इस समझौते के बाद परिवार ने न्यायालय में संयुक्त आवेदन प्रस्तुत किया, जिसे अदालत ने स्वीकार कर लिया।
यह विवाद वर्ष 1988-89 में तत्कालीन कांग्रेस सरकार में मंत्री रहे माधवराव सिंधिया और उनकी तीन बहनों के बीच शुरू हुआ था। पिता जीवाजीराव सिंधिया की संपत्ति के बंटवारे को लेकर असहमति थी। माधवराव सिंधिया के निधन (2001) के बाद यह कानूनी लड़ाई उनके बेटे ज्योतिरादित्य सिंधिया और उनकी बुआओं के बीच जारी रही।
2010 में दायर हुआ था मुकदमा
वर्ष 2010 में वसुंधरा राजे, यशोधरा राजे और उषा राजे ने ग्वालियर जिला न्यायालय में मुकदमा दायर कर दावा किया था कि पिता की पैतृक संपत्ति में बेटियों का भी समान अधिकार है। उन्होंने संपत्ति के बराबर बंटवारे की मांग की थी।
कोर्ट के बाहर बनी सहमति
हाल ही में अदालत ने दोनों पक्षों को आपसी सहमति से विवाद सुलझाने का अवसर दिया था। इसके बाद सभी पक्ष समझौते पर राजी हो गए। न्यायालय ने समझौते को स्वीकार करते हुए मामले का निपटारा कर दिया। बताया जा रहा है कि समझौते के तहत संपत्ति के बंटवारे पर सहमति बनी है।
40 हजार करोड़ रुपये की बताई जाती है संपत्ति
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, सिंधिया राजघराने की कुल संपत्ति का अनुमान करीब 40 हजार करोड़ रुपये लगाया जाता है। इसमें देश के कई शहरों में स्थित महल, ऐतिहासिक इमारतें, जमीनें और अन्य संपत्तियां शामिल हैं।
38 साल पुराने विवाद का अंत
करीब चार दशक तक चले इस विवाद के समाप्त होने के साथ ही सिंधिया परिवार के भीतर चल रहा एक बड़ा कानूनी और पारिवारिक विवाद भी खत्म हो गया है। इसे देश के सबसे चर्चित राजघराना संपत्ति विवादों में से एक माना जाता है।