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अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच जारी सैन्य तनाव थमने का नाम नहीं ले रहा है। एक ओर अमेरिका और इजरायल लगातार ईरान पर हमले कर रहे हैं, तो दूसरी ओर ईरान भी जवाबी कार्रवाई कर रहा है। इस बढ़ते टकराव के बीच स्पेन ने अमेरिका को स्पष्ट चेतावनी देते हुए कहा है कि उसके संयुक्त सैन्यअड्डों का उपयोग ईरान पर हमलों के लिए नहीं किया जा सकता।
स्पेन के दक्षिणी शहर रोटा और मोरॉन में अमेरिका और स्पेन के संयुक्त सैन्यअड्डे संचालित होते हैं। हालांकि ये अड्डे संयुक्त रूप से उपयोग में हैं, लेकिन वे स्पेन की संप्रभुता के अधीन हैं।
स्पेन के विदेश मंत्री जोसे मैनुएल अल्बारेस ने स्पष्ट कहा कि स्पेन अपने सैन्यअड्डों का इस्तेमाल किसी भी ऐसे ऑपरेशन के लिए नहीं होने देगा जो संयुक्त राष्ट्र चार्टर या अमेरिका-स्पेन समझौते के अनुरूप न हो। उन्होंने यह भी दोहराया कि ईरान पर हालिया हमलों की स्पेन पहले ही निंदा कर चुका है।
फ्लाइट ट्रैकिंग वेबसाइट FlightRadar24 के अनुसार, ईरान पर हमले शुरू होने के बाद से रोटा और मोरॉन सैन्यअड्डों से कम से कम 15 अमेरिकी विमान उड़ान भर चुके हैं। इनमें से कम से कम सात विमान जर्मनी के रामस्टीन एयरबेस पर उतरते हुए देखे गए।
सूत्रों के मुताबिक, कुछ विमान फ्रांस की ओर भी रवाना हुए। स्पेन की सख्त चेतावनी के बाद इन विमानों की गतिविधि ने कूटनीतिक हलकों में हलचल पैदा कर दी है।
इस बीच ब्रिटेन ने शुरुआत में अपने सैन्यअड्डों के उपयोग की अनुमति देने से इनकार कर दिया था। लेकिन बाद में प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने ‘कलेक्टिव सेल्फ डिफेंस’ के तहत सीमित उपयोग को मंजूरी दे दी।
स्पेन के प्रधानमंत्री पेड्रो सांचेज पहले ही अमेरिका-इजरायल की सैन्य कार्रवाई की आलोचना कर चुके हैं। ऐसे में स्पेन का यह रुख उसे यूरोप में एक अलग स्थिति में खड़ा करता है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे वॉशिंगटन और मैड्रिड के बीच कूटनीतिक तनाव बढ़ सकता है।
अल्बारेस ने एक स्पेनिश चैनल से बातचीत में दोहराया कि स्पेन के सैन्यअड्डों का इस ऑपरेशन में उपयोग नहीं किया जा रहा है और न ही भविष्य में किसी ऐसे अभियान के लिए किया जाएगा जो अंतरराष्ट्रीय कानून के खिलाफ हो।
मध्य पूर्व में तेजी से बदलते हालात के बीच अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच टकराव ने वैश्विक राजनीति को भी प्रभावित किया है। स्पेन का यह कदम संकेत देता है कि यूरोपीय देशों के भीतर भी इस संघर्ष को लेकर एकरूपता नहीं है।
अब नजर इस बात पर है कि स्पेन की चेतावनी के बाद अमेरिका अपनी सैन्य रणनीति में क्या बदलाव करता है और क्या यह कदम पश्चिमी गठबंधन के भीतर नई दरार पैदा करेगा।