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नई दिल्ली। देश की अदालतों की गरिमा बनाए रखने और न्यायिक प्रक्रिया की निष्पक्षता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से सुप्रीम कोर्ट ने अदालत परिसरों और वकालत से जुड़े पेशेवर आचरण को लेकर नई आचार संहिता लागू की है। बार काउंसिल ऑफ इंडिया (बीसीआई) द्वारा जारी इस संहिता के तहत अब कोर्ट परिसर में रील्स, प्रचारात्मक वीडियो और सोशल मीडिया के लिए कंटेंट बनाने पर रोक लगा दी गई है। साथ ही वकीलों के लिए सोशल मीडिया के उपयोग और ऑनलाइन प्रचार को लेकर भी सख्त नियम तय किए गए हैं।
नई व्यवस्था के अनुसार कोई भी अधिवक्ता कोर्ट परिसर, न्यायालय कक्ष, गलियारों, सीढ़ियों, कैंटीन या अन्य न्यायिक परिसरों में रील, वीडियो, लाइव स्ट्रीम या प्रचारात्मक सामग्री तैयार नहीं कर सकेगा। अदालत की कार्यवाही का फोटो, वीडियो या ऑडियो रिकॉर्ड करना और उसे सोशल मीडिया पर साझा करना भी प्रतिबंधित रहेगा। नियमों का उल्लंघन करने पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकती है।
सोशल मीडिया पर भी लगेंगी सीमाएं
बार काउंसिल ऑफ इंडिया की नई आचार संहिता के अनुसार वकील अपने पेशे के प्रचार के लिए सोशल मीडिया का उपयोग नहीं कर सकेंगे। फेसबुक, इंस्टाग्राम, यूट्यूब, एक्स (पूर्व में ट्विटर) या अन्य प्लेटफॉर्म पर ग्राहकों को आकर्षित करने वाले विज्ञापन, प्रचारात्मक पोस्ट, पेड प्रमोशन या स्वयं को बढ़ा-चढ़ाकर पेश करने वाली सामग्री साझा करने पर रोक रहेगी।
हालांकि, कानूनी जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से सामान्य कानूनी जानकारी, कानूनों की व्याख्या या शैक्षणिक सामग्री साझा करने की अनुमति होगी, लेकिन उसमें किसी प्रकार का प्रचार या ग्राहकों को आकर्षित करने का प्रयास नहीं होना चाहिए।
फर्जी दावों और विज्ञापनों पर भी प्रतिबंध
नई आचार संहिता के तहत अधिवक्ता अपनी वेबसाइट, सोशल मीडिया या अन्य माध्यमों पर खुद को "सर्वश्रेष्ठ", "सबसे सफल", "विशेषज्ञ" या इस तरह के भ्रामक दावे नहीं कर सकेंगे। किसी भी प्रकार के पेड विज्ञापन, प्रमोशनल कैंपेन, फर्जी रिव्यू या क्लाइंट हासिल करने के लिए मार्केटिंग गतिविधियों पर भी रोक लगा दी गई है।
एआई और डीपफेक पर विशेष प्रावधान
बार काउंसिल ने पहली बार कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और डीपफेक तकनीक के दुरुपयोग को भी नियमों में शामिल किया है। किसी न्यायाधीश, अदालत, अधिवक्ता या न्यायिक कार्यवाही से संबंधित एआई जनित वीडियो, डीपफेक, फर्जी ऑडियो या भ्रामक डिजिटल कंटेंट तैयार करना या प्रसारित करना गंभीर अनुशासनहीनता माना जाएगा।
नए वकीलों के लिए भी सख्त नियम
बीसीआई ने कानून के छात्रों और नए अधिवक्ताओं के लिए भी सोशल मीडिया आचार संहिता लागू की है। नामांकन के समय उन्हें यह शपथ या अंडरटेकिंग देनी होगी कि वे सोशल मीडिया के नियमों का पालन करेंगे और वकालत की गरिमा के अनुरूप आचरण बनाए रखेंगे।
15 सितंबर 2026 से लागू होंगे नियम
बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने इन नियमों को अधिसूचित कर दिया है। यह नई आचार संहिता 15 सितंबर 2026 से प्रभावी होगी। इसका उद्देश्य न्यायपालिका की गरिमा बनाए रखना, वकालत के पेशे को व्यावसायिक प्रचार से दूर रखना और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर बढ़ते दुरुपयोग को रोकना बताया गया है।