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रायपुर। छत्तीसगढ़ स्टेट मार्केटिंग कॉर्पोरेशन लिमिटेड (CSMCL) के बहुचर्चित 172 करोड़ रुपये के कथित ओवरटाइम भुगतान घोटाले में गिरफ्तार पूर्व प्रबंध संचालक (एमडी) अरुणपति त्रिपाठी की पुलिस रिमांड 25 जुलाई तक बढ़ा दी गई है। विशेष न्यायालय ने आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (EOW) की मांग स्वीकार करते हुए चार दिन की अतिरिक्त रिमांड मंजूर की है। जांच एजेंसी को उम्मीद है कि पूछताछ के दौरान घोटाले से जुड़े कई अहम खुलासे हो सकते हैं।
तीन दिन की रिमांड पूरी होने के बाद अदालत में पेशी
ईओडब्ल्यू ने तीन दिन की प्रारंभिक रिमांड समाप्त होने के बाद सोमवार को अरुणपति त्रिपाठी को विशेष न्यायालय में पेश किया। जांच एजेंसी ने अदालत को बताया कि मामले में अभी कई महत्वपूर्ण पहलुओं की जांच बाकी है और आरोपी से विस्तृत पूछताछ आवश्यक है। इसके बाद अदालत ने 25 जुलाई तक पुलिस रिमांड बढ़ाने का आदेश दिया।
कमीशन नेटवर्क और अवैध भुगतान की जांच
ईओडब्ल्यू अधिकारियों के अनुसार पूछताछ का मुख्य फोकस उन अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका पर है, जिन्होंने कथित रूप से नियमों के विरुद्ध भुगतान को मंजूरी दी। इसके अलावा यह भी जांच की जा रही है कि ओवरटाइम और अन्य मदों में जारी की गई राशि का कितना हिस्सा कथित कमीशन के रूप में बांटा गया और इस पूरे नेटवर्क में किन-किन लोगों की भूमिका रही।
जांच एजेंसी जरूरत पड़ने पर अरुणपति त्रिपाठी का अन्य आरोपियों के साथ आमना-सामना भी करा सकती है, ताकि भुगतान प्रक्रिया, फाइलों की स्वीकृति और कथित साजिश की पूरी श्रृंखला स्पष्ट हो सके।
2019-20 से 2023-24 के बीच हुआ कथित घोटाला
ईओडब्ल्यू की जांच के अनुसार वर्ष 2019-20 से 2023-24 के बीच छत्तीसगढ़ स्टेट मार्केटिंग कॉर्पोरेशन लिमिटेड में ओवरटाइम, बोनस, अतिरिक्त चार कार्य दिवस और सर्विस चार्ज के नाम पर नियमों के विपरीत 172 करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान किया गया।
जांच में यह भी आरोप है कि सर्विस चार्ज के नाम पर जारी की गई राशि का बड़ा हिस्सा कथित तौर पर कमीशन के रूप में एक सिंडिकेट के जरिए वितरित किया गया। अब जांच एजेंसी इस रकम के लेन-देन, बैंक खातों और लाभार्थियों की पहचान करने में जुटी हुई है।
पहले ही दाखिल हो चुकी है चार्जशीट
इस मामले में ईओडब्ल्यू-एसीबी पहले ही कारोबारी अनवर ढेबर समेत 12 आरोपियों के खिलाफ विशेष न्यायालय में चार्जशीट पेश कर चुकी है। वहीं जांच के दायरे में कई मैनपावर एजेंसियां भी हैं, जिनमें सुमित फैसिलिटीज, प्राइमवन वर्क फोर्स, ए-टू-जेड इंफ्रा सर्विसेज, अलर्ट कमांडोज और ईगल हंटर सॉल्यूशंस शामिल हैं।
जांच में हो सकते हैं नए खुलासे
जांच एजेंसी का मानना है कि अरुणपति त्रिपाठी से पूछताछ के दौरान भुगतान की मंजूरी देने की प्रक्रिया, अधिकारियों की भूमिका, मैनपावर एजेंसियों के साथ वित्तीय लेन-देन और कथित कमीशन नेटवर्क से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्य सामने आ सकते हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में इस मामले में और गिरफ्तारियां या नए खुलासे होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।