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नई दिल्ली/रायपुर। प्रतिबंधित चाकू की ऑनलाइन डिलीवरी और उससे जुड़े आपराधिक मामले में अब सुप्रीम कोर्ट से भी बड़ी राहत मिली है। सुप्रीम कोर्ट ने मोहित कुमार की याचिका पर सुनवाई करते हुए देरी को माफ कर दिया और संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर चार सप्ताह में जवाब मांगा है। साथ ही कोर्ट ने रायपुर की अदालत में लंबित आपराधिक मामले की आगे की कार्यवाही पर फिलहाल रोक लगा दी है।
यह मामला Special Leave Petition (Criminal) Diary No. 40902/2026 से जुड़ा है, जो छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट, बिलासपुर के 1 जुलाई 2026 के आदेश के खिलाफ दायर की गई थी। हाईकोर्ट का यह आदेश CRMP No. 1617/2026 में पारित हुआ था।
सुप्रीम कोर्ट ने 25 अगस्त को की सुनवाई
मामले की सुनवाई 25 अगस्त 2026 को जस्टिस जे.बी. पार्डीवाला और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की पीठ ने की। सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने सबसे पहले पुनः दाखिल करने और कमियों को दूर करने में हुई देरी को माफ किया। इसके बाद कोर्ट ने संबंधित पक्षों को नोटिस जारी करते हुए चार सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया।
सुप्रीम कोर्ट के अंतरिम आदेश का सबसे अहम हिस्सा यह है कि इस बीच रायपुर की न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी (JMFC) अदालत में लंबित Criminal Case C.F. No. 213 of 2026 की आगे की कार्यवाही पर रोक रहेगी।
क्या है पूरा मामला?
मामला ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से प्रतिबंधित चाकू की डिलीवरी और उसके बाद हुई आपराधिक घटना से जुड़ा है। आरोपों के अनुसार, ऑनलाइन मंगाए गए चाकू लॉजिस्टिक्स नेटवर्क के माध्यम से डिलीवर किए गए थे और बाद में इन्हीं चाकुओं का इस्तेमाल हत्या और लूट की वारदात में किए जाने का आरोप सामने आया।
इस मामले में लॉजिस्टिक्स कंपनी से जुड़े कर्मचारियों के खिलाफ FIR दर्ज की गई थी। कर्मचारियों की ओर से अदालत में दलील दी गई कि उनका काम केवल सामान को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाना था और उन्हें पैकेट के अंदर मौजूद सामग्री की जानकारी नहीं थी।
हाईकोर्ट ने FIR रद्द करने से किया था इनकार
इससे पहले छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने आरोपित लॉजिस्टिक्स कर्मचारियों के खिलाफ दर्ज FIR को रद्द करने से इनकार कर दिया था। हाईकोर्ट ने माना था कि FIR में लगाए गए आरोप प्रथम दृष्टया संज्ञेय अपराध की ओर इशारा करते हैं और इस स्तर पर जांच को रोकना उचित नहीं होगा।
अदालत ने यह भी कहा था कि आरोपितों को चाकू की प्रकृति और उसके इस्तेमाल की जानकारी थी या नहीं, उन्होंने किसी तरह की लापरवाही की या नहीं और उन्हें Information Technology Act की Section 79 के तहत safe harbour protection मिल सकती है या नहीं—ये सभी सवाल जांच के दौरान तय किए जाने हैं।
अब सुप्रीम कोर्ट की रोक से बदली स्थिति
अब सुप्रीम कोर्ट के अंतरिम आदेश के बाद रायपुर की संबंधित अदालत में लंबित Criminal Case C.F. No. 213 of 2026 की आगे की कार्यवाही पर अस्थायी रोक लग गई है।
याचिका में मोहित कुमार याचिकाकर्ता हैं, जबकि छत्तीसगढ़ राज्य एवं अन्य को प्रतिवादी बनाया गया है। याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ दवे समेत अन्य अधिवक्ताओं ने पक्ष रखा।
हालांकि, सुप्रीम कोर्ट की ओर से दी गई राहत फिलहाल अंतरिम है। इसका मतलब यह नहीं है कि मामले में आरोप समाप्त हो गए हैं या अंतिम रूप से याचिकाकर्ता को दोषमुक्त कर दिया गया है। कोर्ट ने फिलहाल निचली अदालत की कार्यवाही पर रोक लगाई है और संबंधित पक्षों से जवाब मांगा है।
अब मामले में आगे की सुनवाई चार सप्ताह बाद होगी। उस समय पक्षों के जवाब और मामले के अन्य पहलुओं पर सुप्रीम कोर्ट आगे विचार कर सकता है।