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चेन्नई। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय (थलापति विजय) ने शुक्रवार, 28 अगस्त को सरकारी संस्थानों के कामकाज का जायजा लेने के लिए एक बार फिर औचक निरीक्षण किया। मुख्यमंत्री बिना किसी पूर्व सूचना के चेन्नई के पास स्थित पुझल सेंट्रल जेल और एम-3 पुझल पुलिस स्टेशन पहुंचे। उनके इस अचानक दौरे से जेल और पुलिस विभाग के अधिकारियों में भी हलचल मच गई।
यह निरीक्षण मुख्यमंत्री के हालिया सरप्राइज विजिट अभियान का हिस्सा माना जा रहा है, जिसके तहत वह सरकारी संस्थानों में व्यवस्थाओं, कर्मचारियों की कार्यप्रणाली और आम लोगों को मिल रही सेवाओं का सीधे मौके पर जाकर जायजा ले रहे हैं।
पुझल सेंट्रल जेल में कई घंटों तक लिया जायजा
मुख्यमंत्री विजय सबसे पहले पुझल सेंट्रल जेल-1 पहुंचे। पुझल का जेल परिसर देश के बड़े जेल परिसरों में शामिल है। मुख्यमंत्री ने यहां अलग-अलग हिस्सों का निरीक्षण किया और अधिकारियों से व्यवस्थाओं की जानकारी ली।
उन्होंने जेल के क्वारंटाइन जोन, विजिटर्स हॉल, जेल अस्पताल और डि-एडिक्शन रिहैबिलिटेशन सेंटर का दौरा किया। इसके अलावा उन्होंने कैदियों की शिक्षा और कौशल विकास से जुड़ी व्यवस्थाओं को भी देखा।
विजय ने महात्मा गांधी कम्युनिटी कॉलेज के क्लासरूम, लाइब्रेरी और कंप्यूटर ट्रेनिंग सेंटर का निरीक्षण किया। उन्होंने यह समझने की कोशिश की कि जेल में बंद कैदियों को शिक्षा और तकनीकी प्रशिक्षण किस तरह उपलब्ध कराया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने हाई-सिक्योरिटी ब्लॉक और फांसी वाले क्षेत्र का भी जायजा लिया। इस दौरान जेल अधिकारियों ने उन्हें सुरक्षा और प्रशासनिक व्यवस्थाओं से जुड़ी जानकारी दी।
कैदियों के बनाए सामान देखे
निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री जेल की व्यावसायिक वर्कशॉप में भी पहुंचे। यहां कैदियों को अलग-अलग तरह के कामों में प्रशिक्षित किया जा रहा था।
उन्होंने कैदियों द्वारा तैयार की जा रही सब्जी रैक, लिफाफे और फाइलें देखीं। इसके अलावा पावरलूम पर बनाए जा रहे कंबल और सिलाई इकाई में चल रहे काम का भी निरीक्षण किया।
विजय ने इस दौरान कैदियों के कौशल विकास और उन्हें जेल से बाहर निकलने के बाद आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों के बारे में अधिकारियों से जानकारी ली।
कैंटीन का खाना खुद चखा
मुख्यमंत्री ने जेल की कैंटीन का भी निरीक्षण किया और वहां तैयार भोजन को खुद चखकर उसकी गुणवत्ता परखी। उन्होंने भोजन की व्यवस्था और कैदियों को दिए जाने वाले खाने के संबंध में अधिकारियों से जानकारी ली।
इसके बाद उन्होंने कुछ कैदियों से सीधे बातचीत की और उनकी समस्याएं सुनीं। कैदियों ने अपनी जरूरतों और जेल से जुड़ी परेशानियों के बारे में मुख्यमंत्री को बताया।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि कैदियों के पुनर्वास, शिक्षा और पढ़ने के लिए किताबों की उपलब्धता पर विशेष ध्यान दिया जाए। उन्होंने कहा कि जेल व्यवस्था का उद्देश्य केवल सजा देना नहीं, बल्कि कैदियों को सुधार और पुनर्वास का अवसर देना भी होना चाहिए।
जेल से निकलते ही थाने पहुंचा काफिला
पुझल सेंट्रल जेल का निरीक्षण पूरा करने के बाद मुख्यमंत्री का काफिला वापस लौट रहा था। इसी दौरान उन्होंने अचानक एम-3 पुझल पुलिस स्टेशन पर रुकने का फैसला किया।
थाने में मुख्यमंत्री के अचानक पहुंचने से पुलिसकर्मियों में हलचल मच गई। विजय ने यहां भी औपचारिक निरीक्षण तक सीमित रहने के बजाय सीधे थाने के रोजमर्रा के कामकाज को समझने की कोशिश की।
इंस्पेक्टर की कुर्सी पर खुद नहीं बैठे मुख्यमंत्री
थाने में पहुंचने के बाद मुख्यमंत्री ने इंस्पेक्टर वसंत राजा से अपनी कुर्सी पर बैठे रहने को कहा। इसके बाद विजय खुद आम आगंतुकों के लिए रखी गई साधारण कुर्सी पर बैठ गए।
उनके इस अंदाज ने निरीक्षण को खास बना दिया। मुख्यमंत्री ने पुलिस स्टेशन में आने वाले आम लोगों की शिकायतों और उनके निस्तारण की प्रक्रिया के बारे में सीधे सवाल किए।
उन्होंने अधिकारियों से पूछा कि जब कोई नागरिक शिकायत लेकर थाने पहुंचता है तो उसके बाद क्या प्रक्रिया अपनाई जाती है और शिकायत के समाधान तक पुलिस किस तरह कार्रवाई करती है।
पेंडिंग मामलों और रजिस्टर की भी जांच
मुख्यमंत्री ने थाने के डेली ऑपरेशन्स रजिस्टर और लंबित मामलों की भी जानकारी ली। उन्होंने कंप्यूटर रूम का निरीक्षण किया और पुलिस स्टेशन के लॉक-अप को भी देखा।
इस दौरान उन्होंने पुलिस अधिकारियों से लंबित शिकायतों और मामलों के निस्तारण की स्थिति के बारे में जानकारी ली।
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट निर्देश दिया कि आम लोगों की शिकायतों पर अनावश्यक देरी नहीं होनी चाहिए। उन्होंने अधिकारियों से शिकायतों पर त्वरित, निष्पक्ष और नियमों के मुताबिक कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा।
सरकारी तंत्र को जमीन पर परख रहे विजय
मुख्यमंत्री बनने के बाद विजय के इस तरह के औचक निरीक्षणों को प्रशासनिक व्यवस्था को जमीन पर परखने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। बिना पूर्व सूचना सरकारी संस्थानों में पहुंचकर वह अधिकारियों और कर्मचारियों के कामकाज के साथ-साथ आम नागरिकों और संस्थानों में मौजूद लोगों से सीधे फीडबैक ले रहे हैं।
पुझल जेल और पुलिस स्टेशन के दौरे में भी उनका फोकस केवल अधिकारियों से रिपोर्ट लेने के बजाय मौके पर व्यवस्थाओं को देखने, लोगों की समस्याएं सुनने और लंबित कामों की स्थिति समझने पर रहा।
इस निरीक्षण के जरिए मुख्यमंत्री ने जेल प्रशासन को जहां पुनर्वास और शिक्षा पर जोर देने का संदेश दिया, वहीं पुलिस विभाग को त्वरित और निष्पक्ष शिकायत निवारण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।