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कोलकाता: पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर बड़ा राजनीतिक संकट खड़ा होता दिखाई दे रहा है। विधानसभा चुनाव में हार के बाद विपक्ष की भूमिका निभा रही तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर अंदरूनी कलह अब खुलकर सामने आने लगी है। पार्टी से निष्कासित विधायक ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व में बागी खेमे ने दावा किया है कि उन्हें 60 विधायकों का समर्थन प्राप्त है और वे विधानसभा अध्यक्ष से मिलकर अपने गुट को असली TMC के रूप में मान्यता देने तथा नेता प्रतिपक्ष का पद देने की मांग करेंगे।
सूत्रों के अनुसार, ऋतब्रत बनर्जी विधानसभा अध्यक्ष रथेंद्र बसु को 60 विधायकों के हस्ताक्षरों वाला पत्र सौंपने की तैयारी में हैं। बागी विधायकों में संदीपन साहा, सबीना यास्मीन, अखरुज्जमां सहित कई अन्य नाम शामिल बताए जा रहे हैं। संदीपन साहा ने दावा किया है कि उनके साथ दो-तिहाई से अधिक विधायक हैं।
इस बीच TMC विधायक मुस्तफिज़ुर रहमान ने कहा कि उन्होंने भी हस्ताक्षर किए हैं और उन्हें बाहर से जानकारी मिली है कि लगभग 59 विधायकों का समर्थन पत्र तैयार हो चुका है। वहीं विधायक प्रिया पॉल ने इस मुद्दे पर टिप्पणी करने से पहले पार्टी बैठक का इंतजार करने की बात कही। स्पीकर को संबोधित पत्र में विधानसभा की पुरानी परंपराओं का हवाला देते हुए बागी खेमे ने नेता प्रतिपक्ष और अन्य पदों पर अपने प्रतिनिधियों को मान्यता देने की मांग की है। पत्र में 2001, 2006, 2011, 2016 और 2021 के उदाहरणों का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि पहले भी संबंधित दलों की सिफारिश पर नेता प्रतिपक्ष की नियुक्ति की जाती रही है।
बागी गुट ने शोभनदेव चट्टोपाध्याय को नेता प्रतिपक्ष नियुक्त किए जाने की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए हैं और दावा किया है कि इसके लिए कोई औपचारिक प्रस्ताव पारित नहीं किया गया था। राज्य के मंत्री तपस रॉय ने भी दावा किया है कि TMC अब एक ऐसे दौर में पहुंच गई है जहां पार्टी में टूट को रोकना मुश्किल हो गया है। उन्होंने कहा कि अनुभवहीन लोगों को पार्टी में अहम स्थान दिए जाने के कारण अंदरूनी मतभेद बढ़े हैं और इसका असर अब खुलकर दिखाई दे रहा है। तपस रॉय ने यहां तक दावा किया कि पिछले 15 वर्षों तक राज्य की राजनीति पर प्रभाव रखने वाली TMC भविष्य में राजनीतिक नक्शे से गायब हो सकती है।
दूसरी ओर TMC नेतृत्व ने बगावत की आशंकाओं को खारिज कर दिया है। पार्टी के वरिष्ठ नेता शोभनदेव चट्टोपाध्याय ने कहा कि अधिकांश विधायक पार्टी प्रमुख ममता बनर्जी के साथ हैं और किसी बड़े विद्रोह की संभावना नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि सत्ताधारी दल विपक्ष को कमजोर करने और विधायकों को तोड़ने की कोशिश कर रहा है। शोभनदेव ने कहा कि पार्टी का चुनाव चिह्न और संगठनात्मक नियंत्रण ममता बनर्जी के पास ही रहेगा। ऋतब्रत बनर्जी ने स्वीकार किया कि वह कुछ विधायकों से मिले थे, लेकिन उन्होंने 50 से अधिक विधायकों के समर्थन की खबरों पर सीधे तौर पर कोई टिप्पणी नहीं की। उन्होंने कहा कि वह हर दिन की राजनीति को उसी दिन के हिसाब से देखते हैं।
294 सदस्यीय पश्चिम बंगाल विधानसभा में TMC ने हालिया चुनाव में 80 सीटें जीतकर मुख्य विपक्षी दल का दर्जा हासिल किया था। हालांकि हाल ही में पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में दो विधायकों को निष्कासित किए जाने के बाद राजनीतिक संकट और गहरा गया है। अब सभी की नजर विधानसभा अध्यक्ष के फैसले और TMC के भीतर चल रही इस सियासी खींचतान पर टिकी हुई है, जो आने वाले दिनों में पश्चिम बंगाल की राजनीति की दिशा तय कर सकती है।