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वाशिंगटन। भारत समेत पूरी दुनिया के लिए एक बहुत बड़ी राहत की खबर सामने आ रही है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने एक बार फिर दावा किया है कि ईरान के साथ युद्ध समाप्त करने का समझौता लगभग पूरा हो चुका है। इस ऐतिहासिक समझौते पर इसी सप्ताहांत यूरोप में हस्ताक्षर होने की उम्मीद जताई जा रही है, जिसमें उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के भी शामिल होने की संभावना है।
ट्रम्प के इस ऐलान का ग्लोबल मार्केट पर सीधा और सकारात्मक असर देखा जा रहा है। वैश्विक बाजार में कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) की कीमतों में करीब 4% की भारी गिरावट आई है, जिससे ब्रेंट क्रूड 87 प्रति बैरल पर आ गया है। वहीं, भारतीय शेयर बाजार में जबरदस्त बूम देखने को मिला; सेंसेक्स 1,695 अंक (2.3%) की छलांग लगाकर 75,528 के स्तर पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी भी 461 अंक (2%) की बढ़त के साथ 23,645 पर पहुंच गया। भारतीय रुपया भी 77 पैसे मजबूत होकर 95/ पर पहुंच गया है।
डोनाल्ड ट्रम्प इससे पहले भी 24 मार्च, 1 अप्रैल और 8 अप्रैल 2026 को इस तरह के युद्ध विराम या समझौते के दावे कर चुके हैं, जो बाद में पूरी तरह धरातल पर नहीं उतर पाए। लेकिन इस बार बाजार का उत्साह और कूटनीतिक समीकरण कुछ अलग बयां कर रहे हैं:
राजनीतिक सूत्रों के मुताबिक, दोनों देशों के बीच हुआ अंतरिम समझौता केवल युद्धविराम नहीं बल्कि लंबे समय तक शांति का रास्ता साफ करेगा। होर्मुज जलमार्ग फिर से खुलेगा और ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर सीधी बातचीत होगी।
शहबाज शरीफ की पुष्टि: पाकिस्तानी पीएम शहबाज शरीफ ने भी पुष्टि की है कि दोनों देश शांति समझौते के अंतिम मसौदे पर सहमत हो चुके हैं।
कतर के अमीर शेख तमीम बिन हमद अल-थानी की मध्यस्थता से एक नया ड्राफ्ट फ्रेमवर्क तैयार किया गया है, जिससे कम से कम 60 दिनों तक युद्ध पूरी तरह रुका रहेगा। सूत्रों के मुताबिक रविवार को जिनेवा में हस्ताक्षर समारोह हो सकता है।
लेकिन पेंच यहां है— ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने 'एक्स' (पहले ट्विटर) पर पोस्ट कर कहा है कि “समझौता पहले कभी इतने करीब नहीं था, लेकिन अभी अंतिम फैसला नहीं हुआ है, अंतिम समझौता अभी लंबित है।”
अमेरिका और ईरान के बीच जंग रुकवाने के लिए जिस मसौदे पर बात चल रही है, उसे 'इस्लामाबाद समझौता' कहा जा रहा है। इसकी 5 प्रमुख शर्तें इस प्रकार हैं:
60 दिनों का युद्धविराम तत्काल लागू किया जाएगा।
होर्मुज जलमार्ग तुरंत बिना किसी शुल्क के व्यापार के लिए खोला जाएगा और 30 दिनों में यातायात युद्ध-पूर्व स्तर पर आ जाएगा।
ईरानी बंदरगाहों से अमेरिकी नाकेबंदी पूरी तरह हटाई जाएगी।
ईरान परमाणु हथियार न बनाने और अपने यूरेनियम भंडार को नियंत्रित करने पर सहमत होगा।
हालांकि, रोके गए अरबों डॉलर के ईरानी फंड को लेकर स्थिति अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं है।
इसी रिपोर्ट के साथ देश के भीतर तेल संकट को नियंत्रित करने के लिए सरकार ने एक बड़ा फैसला लिया है। सरकार ने औद्योगिक, कमर्शियल और संस्थागत खरीदारों के रिटेल पेट्रोल पंपों से ईंधन खरीदने पर 90 दिनों की रोक लगा दी है।
अब थोक उपभोक्ताओं को सीधे बल्क सेल पॉइंट्स या कंज्यूमर पंपों से ही तेल लेना होगा।
दिल्ली में जहां रिटेल पंप पर डीजल 95.20 रुपये लीटर है, वहीं बल्क रेट 134.50 रुपये है।
आम गाड़ियों के लिए रिटेल पंपों पर तेल मिलता रहेगा, लेकिन प्रति ग्राहक या वाहन अधिकतम 200 लीटर रोजाना की सीमा तय कर दी गई है।