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उज्जैन। प्रसिद्ध खड़े हनुमान मंदिर की प्रतिमा को लेकर चल रहे विवाद के बीच जिला प्रशासन ने बड़ा बयान जारी किया है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि श्रद्धालुओं और विभिन्न हिंदू संगठनों की भावनाओं का सम्मान करते हुए बिना आपसी सहमति के मंदिर या हनुमान प्रतिमा को हटाने का कोई निर्णय नहीं लिया गया है। प्रशासन के इस रुख के बाद विवाद फिलहाल शांत होता नजर आ रहा है, वहीं मंदिर परिसर और आसपास श्रद्धालुओं की भीड़ बढ़ गई है।
हिंदू संगठनों और श्रद्धालुओं ने खोला मोर्चा
प्रतिमा को हटाए जाने की आशंका के विरोध में मंगलवार और बुधवार शाम बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर परिसर में पहुंचे। इस दौरान हिंदू संगठनों और स्थानीय लोगों ने हनुमान चालीसा का पाठ किया। मंदिर परिसर में ढोल-ताशे भी बजाए गए और श्रद्धालुओं ने जय श्रीराम के नारे लगाए।
प्रदर्शन कर रहे लोगों की मांग है कि हनुमान प्रतिमा को उसी स्थान पर सुरक्षित रखा जाए और मंदिर का यथास्थान संरक्षण किया जाए। उनका कहना है कि विकास कार्यों के नाम पर धार्मिक आस्था से जुड़े इस प्राचीन स्थल को हटाना उचित नहीं होगा।
सड़क चौड़ीकरण परियोजना की जद में आया मंदिर
दरअसल, यह पूरा विवाद सिंहस्थ कुंभ 2028 की तैयारियों से जुड़ा हुआ है। उज्जैन में शहर की यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाने और सड़क चौड़ीकरण के लिए कई विकास कार्य किए जा रहे हैं। इसी परियोजना की जद में करीब 170 साल पुराना खड़े हनुमान मंदिर भी आया है।
प्रशासन की योजना सड़क चौड़ीकरण और यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाने की है। इसी क्रम में मंदिर की चारदीवारी और भवन के कुछ हिस्सों को हटाए जाने की कार्रवाई की गई थी। हालांकि, मंदिर में स्थापित हनुमानजी की प्रतिमा को लेकर श्रद्धालुओं की भावनाएं जुड़ी होने के कारण मामला संवेदनशील हो गया।
प्रतिमा को दूसरी जगह ले जाने की कोशिश हुई, लेकिन…
अखबार में प्रकाशित जानकारी के मुताबिक, प्रशासन की ओर से मंदिर में मौजूद हनुमान प्रतिमा को सुरक्षित तरीके से दूसरी जगह स्थानांतरित करने की कोशिश की गई, लेकिन यह प्रयास सफल नहीं हो सका। इसके बाद प्रतिमा को फिलहाल सुरक्षित रखा गया है।
प्रतिमा को हटाने की खबर फैलते ही श्रद्धालुओं और हिंदू संगठनों में नाराजगी बढ़ गई। स्थानीय लोगों ने मौके पर पहुंचकर विरोध शुरू कर दिया और प्रशासन से प्रतिमा को नहीं हटाने की मांग की।
प्रशासन ने कहा- आस्था और विकास दोनों का रखा जाएगा ध्यान
विवाद बढ़ने के बाद जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया कि किसी की आस्था और भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाला निर्णय नहीं लिया जाएगा। प्रशासन का कहना है कि सिंहस्थ कुंभ 2028 के विकास कार्य जरूरी हैं, लेकिन इसके साथ उज्जैन की धार्मिक विरासत और आस्था के केंद्रों का संरक्षण भी महत्वपूर्ण है।
प्रशासन ने यह भी संकेत दिया है कि मंदिर और प्रतिमा को लेकर आगे की कार्रवाई आपसी सहमति और सभी पक्षों से चर्चा के बाद ही की जाएगी।
मौके पर पहुंच रहे श्रद्धालु, बढ़ी उत्सुकता
खड़े हनुमान मंदिर को लेकर विवाद सामने आने के बाद श्रद्धालुओं की आवाजाही भी बढ़ गई है। मंदिर के आसपास बंदरों की मौजूदगी और धार्मिक माहौल ने लोगों का ध्यान और आकर्षित किया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि मंदिर से उनकी लंबे समय से आस्था जुड़ी हुई है और वे किसी भी स्थिति में हनुमानजी की प्रतिमा को हटते हुए नहीं देखना चाहते।
फिलहाल प्रशासन के बयान के बाद श्रद्धालुओं को राहत मिली है। सवाल अब यह है कि सिंहस्थ 2028 की विकास योजनाओं और करीब 170 साल पुरानी धार्मिक विरासत के बीच ऐसा क्या रास्ता निकलेगा, जिससे सड़क चौड़ीकरण भी हो और खड़े हनुमान मंदिर की आस्था भी सुरक्षित रहे।