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vijay baghel privilege committee complaint against bhilai municipal officers chhattisgarh news
दुर्ग। दुर्ग लोकसभा क्षेत्र के सांसद विजय बघेल ने राज्य प्रशासनिक सेवा (SAS) के दो अधिकारियों के खिलाफ लोकसभा की विशेषाधिकार हनन समिति में शिकायत दर्ज कराई है। सूत्रों के अनुसार, समिति इस मामले को गंभीरता से लेते हुए जल्द ही छत्तीसगढ़ सरकार से जवाब तलब कर सकती है। यदि ऐसा होता है तो यह मामला प्रशासनिक और राजनीतिक दोनों स्तरों पर चर्चा का विषय बन सकता है।
जानकारी के मुताबिक, विदेश दौरे पर रवाना होने से पहले सांसद विजय बघेल ने भिलाई नगर निगम के तत्कालीन आयुक्त राजीव पांडे और भिलाई-चरौदा नगर निगम के आयुक्त डी.एस. राजपूत के खिलाफ लोकसभा की विशेषाधिकार हनन समिति में शिकायत भेजी थी। हालांकि इस संबंध में मीडिया द्वारा पूछे जाने पर सांसद विजय बघेल ने सीधे तौर पर कोई टिप्पणी करने से इनकार कर दिया।
योजनाओं के क्रियान्वयन को लेकर विवाद
सूत्रों के अनुसार, सांसद विजय बघेल के प्रयासों से दोनों नगर निगमों को केंद्र और अन्य योजनाओं के तहत विभिन्न विकास कार्यों के लिए अलग-अलग मदों में राशि स्वीकृत हुई थी। इसके बाद संबंधित कार्यों के लिए टेंडर प्रक्रिया भी पूरी की गई, लेकिन कथित तौर पर टेंडरों को एक से अधिक बार निरस्त कर दिया गया, जिससे विकास कार्य शुरू नहीं हो सके।
बताया जा रहा है कि सांसद लगातार इन परियोजनाओं को शुरू कराने के लिए अधिकारियों से संपर्क करते रहे। आरोप है कि इसके बावजूद दोनों अधिकारियों ने न केवल कार्यों में अपेक्षित प्रगति नहीं की, बल्कि बाद में सांसद के फोन कॉल का जवाब देना भी बंद कर दिया। इसके बाद सांसद ने पहले शासन स्तर पर शिकायत की और समाधान नहीं मिलने पर मामला लोकसभा की विशेषाधिकार हनन समिति तक पहुंचा दिया।
एक अधिकारी का तबादला, दूसरा अब भी पदस्थ
इस बीच भिलाई नगर निगम के तत्कालीन आयुक्त राजीव पांडे का तबादला हो चुका है, जबकि डी.एस. राजपूत अभी भी भिलाई-चरौदा नगर निगम के आयुक्त के पद पर कार्यरत हैं। सूत्रों का कहना है कि लोकसभा की विशेषाधिकार हनन समिति जल्द ही इस मामले में संबंधित अधिकारियों और राज्य सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांग सकती है।
पहले भी सामने आ चुका है ऐसा मामला
गौरतलब है कि इससे पहले रायपुर सांसद बृजमोहन अग्रवाल की शिकायत पर भी लोकसभा की विशेषाधिकार हनन समिति ने स्वास्थ्य सचिव अमित कटारिया के खिलाफ जांच शुरू की थी। ऐसे में दुर्ग सांसद विजय बघेल की शिकायत को भी राजनीतिक और प्रशासनिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
यदि समिति नोटिस जारी करती है और जांच आगे बढ़ती है, तो यह मामला प्रदेश के प्रशासनिक तंत्र और जनप्रतिनिधियों के अधिकारों से जुड़ी एक अहम मिसाल बन सकता है। फिलहाल शिकायत पर आधिकारिक रूप से समिति की ओर से कोई सार्वजनिक बयान जारी नहीं किया गया है, लेकिन मामले पर राजनीतिक हलकों की नजर बनी हुई है।