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अंबिकापुर। झारखंड के धनबाद (वासेपुर) का कुख्यात गैंगस्टर सब्बीर आलम कई वर्षों से छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर में पहचान छिपाकर रह रहा था। उसकी तलाश में पहुंची झारखंड की धनबाद पुलिस ने शहर में छापेमारी की, लेकिन स्थानीय लोगों के विरोध और अफरा-तफरी का फायदा उठाकर सब्बीर आलम मौके से फरार हो गया। इस घटना की पुष्टि सरगुजा के राजेश अग्रवाल ने की है।
पुलिस के अनुसार, सब्बीर आलम वर्ष 2001 में हुए चर्चित दोहरे हत्याकांड का मुख्य आरोपी है। उसने अपने भाई शाहीद आलम और साथियों के साथ मिलकर 18 अक्टूबर 2001 को वासेपुर के डॉन फहीम खान की मां नाजमा खातून और चाची शाहनाज खातून की धनबाद के डायमंड क्रॉसिंग के पास गोली मारकर हत्या कर दी थी। बताया जाता है कि यह वारदात दोनों गैंगों की पुरानी दुश्मनी का नतीजा थी।
इस मामले में सब्बीर आलम, शाहीद आलम समेत सात आरोपियों को गिरफ्तार किया गया था। हालांकि, हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान सब्बीर आलम पुलिस को चकमा देकर फरार हो गया था। बाद में वर्ष 2018 में धनबाद की अदालत ने शाहीद आलम सहित अन्य आरोपियों को उम्रकैद की सजा सुनाई, जबकि सब्बीर आलम तब से फरार चल रहा था।
अंबिकापुर में छापेमारी के दौरान भाग निकला
सूचना मिलने पर धनबाद पुलिस की टीम अंबिकापुर पहुंची और रिंग रोड स्थित एक होटल के पास छापेमारी की। पुलिसकर्मी सादे कपड़ों में थे, जिससे स्थानीय लोगों को संदेह हुआ और उन्होंने विरोध शुरू कर दिया। इसी दौरान सब्बीर आलम मौके का फायदा उठाकर फरार हो गया।
बताया गया कि धनबाद पुलिस ने इस कार्रवाई की पूर्व सूचना सरगुजा पुलिस को नहीं दी थी। आरोपी के फरार होने के बाद स्थानीय पुलिस को जानकारी दी गई, जिसके बाद संयुक्त रूप से उसकी तलाश शुरू की गई।
एसएसपी ने क्या कहा?
सरगुजा एसएसपी राजेश अग्रवाल ने बताया कि धनबाद पुलिस एक वारंटी की तलाश में अंबिकापुर आई थी, लेकिन स्थानीय पुलिस को पहले सूचना नहीं दी गई। आरोपी के हाथ नहीं आने के बाद सरगुजा पुलिस को जानकारी दी गई और संयुक्त प्रयास से उसकी तलाश की गई, लेकिन वह नहीं मिला। पुलिस उसकी तलाश में लगातार अभियान चला रही है।
गैंग्स ऑफ वासेपुर से जुड़ा है मामला
धनबाद के वासेपुर में वर्षों तक चले गैंगवार और कोयला माफिया की पृष्ठभूमि पर वर्ष 2012 में निर्देशक अनुराग कश्यप ने चर्चित फिल्म गैंग्स ऑफ वासेपुर बनाई थी। फिल्म की कहानी वासेपुर के गैंगवार और वहां के अपराध जगत से प्रेरित मानी जाती है, जिसमें फहीम खान और प्रतिद्वंद्वी गिरोहों के संघर्ष को प्रमुखता से दिखाया गया है।