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रायपुर: छत्तीसगढ़ प्रदेश सरकार ने महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में एक और कदम बढ़ाते हुए लखपति दीदी भ्रमण योजना की शुरुआत करने की घोषणा की है। इस योजना का उद्देश्य प्रदेश की महिलाओं को दिल्ली-मुंबई जैसे बड़े व्यापारिक केंद्रों से जोड़कर उन्हें वैश्विक स्तर पर एक्सपोजर दिलाना है, ताकि वे केवल लाभार्थी न होकर खुद के उद्यम स्थापित कर सकें और आर्थिक भागीदार के रूप में अपनी पहचान बना सकें।
इससे पहले प्रदेश सरकार ने *लखपति दीदी* योजना के तहत 8 लाख महिलाओं को सशक्त किया है, और इसका लक्ष्य अब 10 लाख महिलाओं तक पहुंचने का है। इस पहल के तहत महिलाओं को न केवल आर्थिक स्वतंत्रता मिल रही है, बल्कि उन्हें व्यवसाय संचालन और वित्तीय नियमों के प्रति जागरूक भी किया जा रहा है।
नई योजना में महिलाओं को विभिन्न व्यापारिक केंद्रों का दौरा कराते हुए उन्हें सफल बिजनेस मॉडल और उद्यमिता के बारे में प्रत्यक्ष अनुभव मिलेगा। यह अनुभव उन्हें अपने कारोबार को और अधिक सशक्त बनाने के लिए प्रेरित करेगा। साथ ही, महतारी सदन के माध्यम से उन्हें एक साझा मंच भी प्रदान किया जाएगा, जहां वे संगठित होकर अपने उद्यम चला सकेंगी।
महिलाओं को अब सीधे बैंकिंग प्रणाली से जोड़ने की योजना बनाई गई है। महिलाओं को उनके बैंक खातों के माध्यम से लेन-देन करने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। इससे न केवल उनकी क्रेडिट रेटिंग बेहतर होगी, बल्कि वे वित्तीय नियमों को भी आसानी से समझ सकेंगी। इससे महिला उद्यमिता को बढ़ावा मिलेगा और उन्हें वित्तीय स्वतंत्रता मिलेगी।
पिछली व्यवस्था में विभागों के माध्यम से महिला उद्यमियों को लोन दिया जाता था, लेकिन प्रशिक्षण और निगरानी की कमी के कारण कई महिलाएं डिफॉल्टर हो जाती थीं। अब सरकार ने राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (NRLM) के तहत एक नई और सक्षम प्रणाली तैयार की है, जो महिलाओं को लोन के साथ-साथ बाजार से भी जोड़ने का काम करेगी। इस योजना में प्रशिक्षण, मार्गदर्शन, और निगरानी सुनिश्चित की जाएगी ताकि महिलाएं बेहतर तरीके से अपना व्यापार चला सकें।
प्रदेश सरकार ने राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (NRLM) के बजट को 560 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 850 करोड़ रुपये कर दिया है, जो 2026-27 तक लागू रहेगा। पिछले 22 वर्षों में महिला कोष से केवल 137 करोड़ रुपये का लोन दिया गया था, जबकि नई व्यवस्था में अब तक 11,000 करोड़ रुपये से अधिक का बैंक क्रेडिट लिंकेज महिलाओं को दिया गया है। दिलचस्प बात यह है कि इस व्यवस्था में NPA (नॉन परफॉर्मिंग एसेट) केवल 3% से भी कम है, जो इस योजना की सफलता को दर्शाता है।
यह योजना न केवल प्रदेश की महिलाओं को आर्थिक तौर पर सशक्त करेगी, बल्कि पूरे समाज के लिए एक नई दिशा और प्रेरणा का काम करेगी। महिलाएं अब खुद के पैरों पर खड़ी होंगी और अपने उद्यम के जरिए समाज में बदलाव ला सकेंगी। सरकार का यह कदम महिलाओं को सिर्फ घर की चारदीवारी से बाहर निकालने का नहीं, बल्कि उन्हें एक सक्षम और आत्मनिर्भर उद्यमी के रूप में स्थापित करने का है।