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CG News: Garbage remains uncollected in Raipur for the fourth day, with workers adamant over salary disputes, and citywide filth exacerbating the problem.
रायपुर। राजधानी रायपुर में डोर टू डोर कचरा कलेक्शन व्यवस्था लगातार चौथे दिन भी पूरी तरह पटरी पर नहीं लौट सकी। रामकी कंपनी के ड्राइवर और हेल्पर वेतन गड़बड़ी की जांच की मांग पर अड़े हुए हैं, जिसके चलते शहर के अधिकांश इलाकों में रविवार को भी कचरा नहीं उठ पाया।हालात ऐसे बन गए हैं कि कई वार्डों में सड़कों, गलियों और बाजारों में कूड़े के ढेर लग गए हैं। बारिश के बाद स्थिति और खराब हो गई है। बदबू, गंदगी और नालियों में जमा कचरे से लोगों की परेशानी लगातार बढ़ती जा रही है।
200 गाड़ियां डिपो में खड़ी, केवल 50 वाहनों से हुई सीमित सफाई
नगर निगम की अनुबंधित एजेंसी रामकी कंपनी ने वैकल्पिक व्यवस्था के तहत करीब 50 गाड़ियों को चलाने की कोशिश की, लेकिन लगभग 200 कचरा वाहन रविवार को भी डिपो में खड़े रहे।सीमित संसाधनों के कारण केवल कुछ इलाकों में ही कचरा उठाया जा सका। शहर के अधिकांश मोहल्लों में लोग सुबह से कचरा गाड़ी का इंतजार करते रहे, लेकिन वाहन नहीं पहुंचने पर लोगों ने मजबूरी में कचरा सड़क और नालियों में फेंकना शुरू कर दिया।
कर्मचारियों का आरोप- आठ साल से वेतन में हो रही गड़बड़ी
हड़ताली कर्मचारियों का आरोप है कि कंपनी को प्रति सफाईकर्मी लगभग 9750 रुपये का भुगतान मिलता है, लेकिन कर्मचारियों को केवल सात से आठ हजार रुपये तक ही दिए जा रहे हैं।कर्मचारियों का कहना है कि पिछले आठ वर्षों से वेतन भुगतान में गड़बड़ी हो रही है। जब तक पूरे मामले की जांच के लिए कमेटी नहीं बनाई जाएगी, तब तक वे काम पर वापस नहीं लौटेंगे।कर्मचारियों ने यह भी आरोप लगाया कि पुलिस ने उन्हें डिपो में धरना देने से रोका और दबाव बनाकर हटाया गया।
नई भर्ती के पोस्टर से और भड़के कर्मचारी
हड़ताल के बीच रामकी कंपनी ने ड्राइवर और हेल्पर भर्ती के पोस्टर जारी कर दिए। इसे देखकर पुराने कर्मचारी नाराज हो गए और कई कर्मचारी वापस काम पर नहीं लौटे।इसके बाद निगम के सफाई कर्मचारियों और रामकी के सुपरवाइजर्स ने मिलकर सीमित स्तर पर कचरा उठाने की कोशिश की, लेकिन व्यवस्था सामान्य नहीं हो सकी।
80 करोड़ से ज्यादा भुगतान अटका, कंपनी ने निगम पर लगाया आरोप
रामकी कंपनी ने नगर निगम पर करीब 88 करोड़ रुपये का भुगतान लंबित रखने का आरोप लगाया है। कंपनी का कहना है कि मार्च 2025 से भुगतान नहीं होने के कारण डीजल, गाड़ियों के रखरखाव और कर्मचारियों के वेतन पर दबाव बढ़ गया है।कंपनी का दावा है कि कर्मचारियों को कलेक्टर दर के अनुसार भुगतान किया जा रहा है, लेकिन कर्मचारी तय राशि से अधिक वेतन की मांग कर रहे हैं।
स्वच्छता सर्वेक्षण के बीच बिगड़ी शहर की सफाई व्यवस्था
राजधानी में यह संकट ऐसे समय खड़ा हुआ है जब केंद्रीय स्वच्छता सर्वेक्षण की प्रक्रिया चल रही है। लगातार चार दिनों से कचरा नहीं उठने के कारण नगर निगम की चिंता बढ़ गई है।शहर के कई प्रमुख बाजारों और सड़कों पर गंदगी का अंबार लग गया है। शास्त्री बाजार, बॉम्बे मार्केट, एवरग्रीन चौक, मौदहापारा और मीट मार्केट जैसे इलाकों में बदबू फैलने लगी है।
बारिश ने बढ़ाई मुश्किल, नालियों से सड़क पर आया कचरा
पिछले दो दिनों में हुई बारिश के कारण नालियों में जमा कचरा भी सड़कों पर फैल गया। कई जगहों पर जलभराव जैसी स्थिति बनने लगी है।एकात्म परिसर और आसपास के इलाकों में नालियों से निकाला गया कचरा सड़क किनारे पड़ा हुआ है, जिसका उठाव नहीं हो सका।
लोग बोले- घरों का कचरा अब गलियों में फेंकने की मजबूरी
शहरवासियों का कहना है कि चार दिनों से कचरा गाड़ी नहीं आने के कारण अब घरों का कचरा सड़क और गलियों में फेंकना पड़ रहा है।गुढ़ियारी निवासी जितेंद्र कुमार ने बताया कि घरों से निकलने वाला किचन वेस्ट सड़ने लगा है। बारिश के बाद हालात और खराब हो गए हैं।
नगर निगम का दावा- सोमवार से सामान्य होगी व्यवस्था
नगर निगम के अपर आयुक्त विनोद पांडेय ने कहा कि रविवार को लगभग 50 गाड़ियों से कचरा कलेक्शन कराया गया। उम्मीद है कि सोमवार से सभी गाड़ियां नियमित रूप से घर-घर जाकर कचरा उठाएंगी।वहीं महापौर मीनल चौबे ने कहा कि अधिकांश सेवाएं शुरू हो चुकी हैं। कुछ कर्मचारियों के नहीं लौटने से परेशानी हुई है, लेकिन जल्द व्यवस्था पूरी तरह सामान्य कर ली जाएगी।