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Balod has created history, with no child marriages in three years; the
रायपुर। छत्तीसगढ़ का बालोद जिला अब पूरे देश के लिए मिसाल बनता जा रहा है। जिस कुरीति को खत्म करना वर्षों से बड़ी चुनौती माना जाता था, उसे बालोद ने जमीनी जागरूकता और महिलाओं की ताकत के दम पर लगभग खत्म कर दिया है। पिछले तीन वर्षों में जिले में बाल विवाह का एक भी मामला सामने नहीं आया है।अब राज्य सरकार बालोद की इसी सफलता को पूरे छत्तीसगढ़ में लागू करने जा रही है। सरकार ने वर्ष 2028-29 तक प्रदेश को पूरी तरह बाल विवाह मुक्त बनाने का लक्ष्य तय किया है।
महिलाओं की ताकत बनी बदलाव की सबसे बड़ी वजह
बालोद में इस बदलाव के पीछे प्रशासन और ग्रामीण महिलाओं की साझेदारी सबसे बड़ी ताकत बनी। महिला स्व सहायता समूहों, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, मितानिनों, शिक्षिकाओं और लखपति दीदियों ने गांव-गांव जाकर लोगों की सोच बदलने का काम किया।ग्रामीण चौपालों, घर-घर संपर्क और सामाजिक संवाद के जरिए लोगों को बाल विवाह के नुकसान समझाए गए।जिले में 90 हजार से ज्यादा महिलाओं ने इस अभियान में सक्रिय भूमिका निभाई। यही वजह रही कि जहां कहीं बाल विवाह की कोशिश हुई, वहां प्रशासन और गांव की महिला टीमों ने समय रहते हस्तक्षेप कर विवाह रुकवा दिया।
कलेक्टर दिव्या मिश्रा की रणनीति ने बदली तस्वीर
बालोद कलेक्टर दिव्या उमेश मिश्रा और जिला पंचायत सीईओ सुनील चंद्रवंशी की रणनीति को इस सफलता का बड़ा आधार माना जा रहा है।प्रशासन ने केवल सरकारी बैठकों तक सीमित रहने के बजाय सीधे गांवों में पहुंचकर संवेदनशील पंचायतों की पहचान की।अक्षय तृतीया जैसे अवसरों पर विशेष निगरानी रखी गई। हर शादी का रिकॉर्ड तैयार किया गया और बाल विवाह मुक्त पंचायतों को सम्मानित भी किया गया।कलेक्टर दिव्या मिश्रा ने कहा कि प्रशासन ने उन इलाकों पर सबसे ज्यादा फोकस किया जहां पहले बाल विवाह की शिकायतें आती थीं। लगातार संवाद और निगरानी ने बड़ा बदलाव पैदा किया।
अब पूरे प्रदेश में लागू होगा ‘बालोद मॉडल’
राज्य सरकार ने बालोद की इस सफलता को पूरे छत्तीसगढ़ में लागू करने का फैसला लिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘बाल विवाह मुक्त भारत’ अभियान के तहत अब प्रदेशभर में इसी तर्ज पर काम किया जाएगा।महिला एवं बाल विकास विभाग की सचिव शहला निगार ने कहा कि बालोद आज पूरी तरह बाल विवाह मुक्त जिला बन चुका है और यह अन्य जिलों के लिए प्रेरणा है।उन्होंने बताया कि जैसे-जैसे पंचायतें तय मापदंड पूरे करेंगी, उन्हें भी बाल विवाह मुक्त घोषित किया जाएगा।
2028-29 तक पूरा छत्तीसगढ़ होगा बाल विवाह मुक्त
राज्य सरकार ने चरणबद्ध लक्ष्य तय किए हैं।
2025-26 तक 40 प्रतिशत पंचायतों और नगरीय निकायों को बाल विवाह मुक्त बनाने का लक्ष्य
2026-27 तक 60 प्रतिशत
2027-28 तक 80 प्रतिशत
2028-29 तक 100 प्रतिशत लक्ष्य हासिल करने की तैयारी
आंकड़े बता रहे बदलाव की बड़ी कहानी
प्रदेश की कुल 11,693 ग्राम पंचायतों में से अब तक 7,498 पंचायतों को बाल विवाह मुक्त घोषित किया जा चुका है।वहीं 196 नगरीय निकायों में से 85 निकाय इस श्रेणी में शामिल हो चुके हैं।हालांकि राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वे के अनुसार छत्तीसगढ़ में अभी भी बाल विवाह की औसत दर करीब 12 प्रतिशत है।सूरजपुर, बलरामपुर और बस्तर जैसे आदिवासी व दूरस्थ जिलों में यह दर 34 प्रतिशत तक बताई गई है। ऐसे में सरकार अब इन इलाकों पर विशेष फोकस कर रही है।
गांव-गांव पहुंची जागरूकता की आवाज
जिला पंचायत सीईओ सुनील चंद्रवंशी ने कहा कि यह केवल प्रशासनिक अभियान नहीं था, बल्कि सामाजिक चेतना का आंदोलन बन गया।महिलाओं ने घर-घर जाकर लोगों को समझाया कि कम उम्र में शादी से लड़कियों की शिक्षा, स्वास्थ्य और भविष्य पर गंभीर असर पड़ता है।आज बालोद की यही सफलता पूरे छत्तीसगढ़ के लिए उम्मीद और बदलाव का नया मॉडल बन चुकी है।