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Chhattisgarh: Internet will run on light, research in Nava Raipur has opened new doors to speed.
रायपुर। नवा रायपुर स्थित रायपुर इंटरनेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ इन्फार्मेशन टेक्नोलाजी की शोधकर्ता प्रियंका गुप्ता ने इंटरनेट तकनीक में बड़ा बदलाव लाने वाला अभिनव शोध किया है। इस तकनीक की सबसे खास बात यह है कि इसमें डेटा ट्रांसफर पारंपरिक तारों की बजाय रोशनी के माध्यम से होगा। इससे इंटरनेट की स्पीड सैद्धांतिक रूप से सैकड़ों से लेकर हजार गुना तक बढ़ सकती है, जबकि डेटा ट्रांसफर में देरी लगभग खत्म होने की संभावना है।
5 से 10 साल में आम लोगों तक पहुंचेगी नई तकनीक
शोध के मुताबिक, यह तकनीक आने वाले पांच से दस वर्षों में आम उपयोगकर्ताओं तक पहुंच सकती है। इसके लागू होने से भारत की डिजिटल व्यवस्था को नई गति मिलेगी और ग्रामीण से शहरी क्षेत्रों तक मजबूत कनेक्टिविटी स्थापित होगी। साथ ही बड़े डेटा केंद्रों में ऊर्जा खपत घटेगी और नेटवर्क अधिक सक्षम बनेगा।
ओडिशा से नवा रायपुर तक का सफर, पांच साल की मेहनत का परिणाम
ओडिशा के कोरापुट की रहने वाली प्रियंका गुप्ता ने वर्ष 2020 से 2025 तक इस प्रोजेक्ट पर लगातार काम किया। उनका उद्देश्य ऑप्टिकल फाइबर की मौजूदा स्पीड लिमिट को पार करना था, जिसमें अब उन्हें बड़ी सफलता मिली है। यह पूरा शोध संस्थान के रजिस्ट्रार पुण्य प्रसन्ना पलटानी के मार्गदर्शन में संपन्न हुआ।
आल ऑप्टिकल सिस्टम: बिना रुकावट के डेटा ट्रांसमिशन
इस नई तकनीक की नींव आल ऑप्टिकल सिस्टम पर आधारित है। मौजूदा सिस्टम में डेटा को बार बार इलेक्ट्रिकल और ऑप्टिकल सिग्नल में बदलना पड़ता है, जिससे समय और ऊर्जा दोनों की हानि होती है। लेकिन इस शोध में विकसित सिस्टम में डेटा केवल प्रकाश के माध्यम से ही ट्रांसफर होता है, जिससे गति और दक्षता दोनों बढ़ती है।
बस्तर जैसे क्षेत्रों के लिए बनेगा गेम चेंजर
यह तकनीक खास तौर पर बस्तर जैसे दूरस्थ और वनांचल क्षेत्रों के लिए बेहद फायदेमंद साबित हो सकती है। यहां स्थिर और तेज इंटरनेट पहुंचने से शिक्षा, स्वास्थ्य और डिजिटल सेवाओं में बड़ा सुधार संभव है। इससे डिजिटल गैप को कम करने में भी मदद मिलेगी।
फोटोनिक क्रिस्टल रिंग रेजोनेटर: स्पीड और सटीकता का नया आधार
इस तकनीक की प्रमुख विशेषता फोटोनिक क्रिस्टल रिंग रेजोनेटर है, जो डेटा ट्रांसफर को तेज और अधिक सटीक बनाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह नवाचार आने वाले समय में 5G और 6G नेटवर्क की मजबूत नींव तैयार कर सकता है।
वाइफाइ बनाम लाइफाइ: इंटरनेट का बदलता चेहरा
जहां वाइफाइ तकनीक में डेटा ट्रांसफर के लिए रेडियो तरंगों का उपयोग होता है, वहीं नई तकनीक में एलईडी लाइट के जरिए डेटा भेजा जाएगा। यानी घरों में जलने वाली साधारण रोशनी ही भविष्य में इंटरनेट का माध्यम बन सकती है।
डिजिटल भारत को मिलेगी नई रफ्तार
यह शोध न केवल तकनीकी क्षेत्र में नई दिशा दिखाता है, बल्कि भारत के डिजिटल भविष्य को भी मजबूत करने की क्षमता रखता है। यदि यह तकनीक बड़े स्तर पर लागू होती है, तो इंटरनेट उपयोग का पूरा अनुभव बदल सकता है।