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Latest News: Speculation increased from the list of Rajya Sabha candidates, is there going to be a big change in Modi's cabinet!
नई दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी (BJP) द्वारा 18 जून को होने वाले राज्यसभा चुनाव के लिए 11 उम्मीदवारों की सूची जारी किए जाने के बाद राजनीतिक हलकों में मोदी मंत्रिमंडल में बड़े फेरबदल की चर्चाएं तेज हो गई हैं। इस चर्चा की सबसे बड़ी वजह केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू और जॉर्ज कुरियन को राज्यसभा टिकट न मिलना माना जा रहा है।
जॉर्ज कुरियन वर्तमान में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकार में इकलौते ईसाई मंत्री हैं और मध्य प्रदेश से राज्यसभा सांसद हैं। वहीं रवनीत सिंह बिट्टू राजस्थान से राज्यसभा सदस्य हैं। दोनों नेताओं का कार्यकाल जल्द समाप्त होने वाला है, लेकिन पार्टी ने उन्हें दोबारा उम्मीदवार नहीं बनाया है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि बिट्टू और कुरियन को राज्यसभा में दोबारा नहीं भेजा जाता है तो उनके मंत्री पद पर बने रहने की अवधि सीमित रह जाएगी। नियमों के मुताबिक राज्यसभा कार्यकाल समाप्त होने के बाद भी वे अधिकतम छह महीने तक मंत्री पद पर बने रह सकते हैं।
मंत्रिमंडल में बदलाव की अटकलों को इस तथ्य से भी बल मिला है कि केंद्र सरकार के दो जूनियर मंत्रियों को पहले ही संगठन में नई जिम्मेदारियां दी जा चुकी हैं। पंकज चौधरी को उत्तर प्रदेश बीजेपी का अध्यक्ष बनाया गया है, जबकि हर्ष मल्होत्रा को दिल्ली बीजेपी की कमान सौंपी गई है।
साल 2022 में भी ऐसा ही घटनाक्रम देखने को मिला था, जब तत्कालीन केंद्रीय मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी और आरसीपी सिंह को दोबारा राज्यसभा नहीं भेजा गया था और बाद में उन्होंने मंत्री पद छोड़ दिया था।
इस बार बीजेपी ने राज्यसभा टिकट वितरण में ‘नो रिपीट’ रणनीति अपनाई है। पार्टी ने अपने किसी भी निवर्तमान सांसद को दोबारा मौका नहीं दिया। टिकट कटने वाले प्रमुख नेताओं में गुजरात से रामभाई मोकारिया, अमीन नरहरि और रमीला बारा, राजस्थान से राजेंद्र गहलोत, मध्य प्रदेश से सुमेर सिंह सोलंकी, मणिपुर से लीशेम्बा सनाजाओबा और अरुणाचल प्रदेश से नबाम रेबिया शामिल हैं।
इसके विपरीत, पार्टी ने संगठन में सक्रिय नेताओं और नए चेहरों को प्राथमिकता दी है। बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुघ और राजस्थान के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनिया को राज्यसभा भेजने का फैसला इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
बीजेपी ने उम्मीदवारों के चयन में क्षेत्रीय और जातीय संतुलन पर भी विशेष ध्यान दिया है। गुजरात से चार नए चेहरों को मौका दिया गया है, जिनमें राजूभाई शुक्ला, मुकेशभाई राठवा, मानसिंह परमार और जितेंद्र कंजारिया शामिल हैं। इनमें ओबीसी और आदिवासी समुदायों को प्रतिनिधित्व देने की कोशिश साफ दिखाई दे रही है।
पंजाब में आगामी विधानसभा चुनावों को देखते हुए पार्टी ने जाट सिख समुदाय को साधने की रणनीति अपनाई है। केवल सिंह ढिल्लों को प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया है, जबकि तरुण चुघ को राज्यसभा उम्मीदवार बनाकर पारंपरिक वोट बैंक को मजबूत करने का प्रयास किया गया है।
पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह के पोते रवनीत सिंह बिट्टू को टिकट न मिलने से राजनीतिक गलियारों में कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। माना जा रहा है कि पार्टी उन्हें पंजाब चुनावों में बड़ी भूमिका दे सकती है।
वहीं केरल से आने वाले वरिष्ठ नेता जॉर्ज कुरियन हाल ही में विधानसभा चुनाव हार गए थे। ऐसे में उनका भविष्य भी राजनीतिक चर्चाओं का केंद्र बना हुआ है।
बीजेपी ने अभी तक झारखंड और कर्नाटक से अपने उम्मीदवारों की घोषणा नहीं की है। दोनों राज्यों से पार्टी को एक-एक सीट मिलने की संभावना है। ऐसे में कयास लगाए जा रहे हैं कि पार्टी इन सीटों के जरिए अपने कुछ मौजूदा मंत्रियों को समायोजित कर सकती है।