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Annamalai parts ways with BJP, announces formation of a new party in Tamil Nadu; gears up to contest the 2031 elections.
नई दिल्ली। तमिलनाडु भाजपा के पूर्व अध्यक्ष के. अन्नामलाई ने भाजपा की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा देकर नई राजनीतिक पारी की शुरुआत कर दी है। उनका इस्तीफा 2 जून को दिया गया था, जिसे पार्टी नेतृत्व ने स्वीकार कर लिया है। इसके बाद अन्नामलाई ने तमिलनाडु में नई राजनीतिक पार्टी बनाने की घोषणा की है।
अन्नामलाई ने कहा कि उनकी नई पार्टी वर्ष 2031 का तमिलनाडु विधानसभा चुनाव लड़ेगी। उन्होंने 'वी द लीडर्स' नाम से एक नए जनआंदोलन की भी शुरुआत की है और इसके लिए एक अलग मंच लॉन्च किया है।
राजनीति में बदलाव लाने का दावा
अन्नामलाई का कहना है कि उनका उद्देश्य तमिलनाडु की राजनीति में नई सोच और नई कार्यसंस्कृति लाना है। उनके मुताबिक राज्य की जनता वर्षों से चली आ रही पारंपरिक राजनीति से परेशान है और बदलाव चाहती है।
उन्होंने कहा कि राजनीति केवल प्रभावशाली परिवारों या चुनिंदा लोगों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। आम नागरिकों को भी नेतृत्व करने और राजनीतिक व्यवस्था का हिस्सा बनने का अवसर मिलना चाहिए।
वंशवाद और व्यक्ति पूजा के खिलाफ अभियान
अन्नामलाई के नए आंदोलन का मुख्य लक्ष्य वंशवादी राजनीति और व्यक्ति पूजा की संस्कृति को चुनौती देना है। उन्होंने कहा कि उनकी पहल जनता की जरूरतों और जनहित के मुद्दों को केंद्र में रखकर आगे बढ़ेगी। उनका नारा है- 'बदलेंगे और बदलाव लाएंगे', जिसके जरिए वे राज्य में नई राजनीतिक सोच विकसित करना चाहते हैं।
भाजपा नेतृत्व से मतभेद का किया जिक्र
अन्नामलाई ने स्वीकार किया कि भाजपा के शीर्ष नेतृत्व के साथ कई मुद्दों पर उनके विचार अलग थे। उन्होंने कहा कि एक समय ऐसा आया जब उन्हें यह फैसला करना पड़ा कि पार्टी में बने रहें या तमिलनाडु के लोगों की अपेक्षाओं और अपने विचारों के साथ आगे बढ़ें।
उन्होंने बताया कि दिसंबर 2025 में ही पार्टी नेतृत्व को अपने इस्तीफे के फैसले की जानकारी दे दी गई थी।
आईपीएस से राजनीति तक का सफर
अन्नामलाई कर्नाटक कैडर के पूर्व आईपीएस अधिकारी हैं। उन्होंने सरकारी सेवा छोड़कर वर्ष 2020 में भाजपा जॉइन की थी। इसके बाद पार्टी ने उन्हें प्रदेश उपाध्यक्ष और फिर तमिलनाडु भाजपा अध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी।
अपने कार्यकाल के दौरान वे आक्रामक राजनीतिक शैली और मुखर बयानों के कारण चर्चा में रहे। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि प्रदेश अध्यक्ष पद से हटाए जाने और एआईएडीएमके के साथ भाजपा के गठबंधन को लेकर उनकी नाराजगी भी इस फैसले की एक बड़ी वजह रही है।
तमिलनाडु की राजनीति में बढ़ेगी हलचल
अन्नामलाई के इस कदम को तमिलनाडु की राजनीति में बड़े बदलाव के संकेत के रूप में देखा जा रहा है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि उनकी नई पार्टी आने वाले वर्षों में राज्य की राजनीति में कितना प्रभाव छोड़ पाती है और 2031 के चुनाव में क्या भूमिका निभाती है।