

Copyright © 2026 rights reserved by Inkquest Media
अन्य समाचार

CG Breaking: 108 Maoists surrender in Bastar, return to the mainstream with weapons
जगदलपुर। छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग में नक्सलवाद के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के बीच बुधवार को बड़ी खबर सामने आ रही है। दक्षिण बस्तर डिविजनल कमेटी (DKSZC) से जुड़े कुल 108 माओवादियों ने हथियारों सहित आत्मसमर्पण कर दिया। आत्मसमर्पण कार्यक्रम जगदलपुर के लालबाग स्थित शौर्य भवन में आयोजित किया गया, जहां पुलिस, केंद्रीय सुरक्षा बलों और प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी में नक्सलियों ने औपचारिक रूप से हथियार डाले।
जानकारी के अनुसार आत्मसमर्पण करने वाले माओवादी लंबे समय से बस्तर के अलग-अलग इलाकों में सक्रिय थे। लगातार चल रहे सुरक्षा अभियानों और सरकार की पुनर्वास नीति से प्रभावित होकर उन्होंने हिंसा का रास्ता छोड़कर मुख्यधारा में लौटने का फैसला किया। जिन 108 माओवादियों ने सरेंडर किया है, उनमें बीजापुर के 37, नारायणपुर के 4, बस्तर के 16, कांकेर के 3, सुकमा के 18 और दंतेवाड़ा के 30 नक्सली शामिल हैं।

सुरक्षा एजेंसियों की कार्रवाई के दौरान माओवादियों से करीब 3 करोड़ 61 लाख रुपये नकद और लगभग 1 किलो सोना भी जब्त किया गया है। उन्होंने इसे सुरक्षा बलों के लिए बड़ी सफलता बताया। बरामद हथियारों में AK-47 राइफल – 6, INSAS राइफल – 11, कार्बाइन – 5, .303 LMG – 20, .303 राइफल – 25, 12 बोर राइफल – 11, .315 बोर राइफल – 13 सहित अन्य हथियार शामिल हैं।
पुनर्वास नीति के तहत मिलेगी सहायता
प्रशासन के अनुसार आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों को राज्य सरकार की पुनर्वास नीति के तहत आर्थिक सहायता, प्रशिक्षण और अन्य सुविधाएं दी जाएंगी, ताकि वे समाज की मुख्यधारा में शामिल होकर सामान्य जीवन जी सकें। अधिकारियों ने कहा कि जो भी नक्सली हिंसा का रास्ता छोड़ना चाहते हैं, उन्हें सरकार हर संभव सहयोग देगी।
2026 तक नक्सलवाद खत्म करने का लक्ष्य
विधानसभा में चर्चा के दौरान उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि राज्य सरकार ने 31 मार्च 2026 तक सशस्त्र नक्सलवाद के खात्मे का लक्ष्य तय किया है। उन्होंने यह भी बताया कि बस्तर क्षेत्र में तैनात अधिकांश केंद्रीय सुरक्षा बलों को 31 मार्च 2027 तक चरणबद्ध तरीके से वापस बुलाने की योजना बनाई गई है।
उन्होंने बताया कि वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए पुलिस विभाग के मुख्य बजट में 7,721.01 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, ताकि सुरक्षा अभियान और मजबूत किए जा सकें।