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जगदलपुर। वामपंथी उग्रवाद के खिलाफ चल रहे अभियानों के बीच बड़ी सफलता मिली है। Communist Party of India (Maoist) के 130 माओवादी कैडरों ने तेलंगाना में सुरक्षा बलों के सामने आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा में लौटने का निर्णय लिया।
सुरक्षा अधिकारियों के अनुसार आत्मसमर्पण करने वाले कैडरों ने 124 हथियारों के साथ बड़ी मात्रा में गोला-बारूद भी जमा कराया है। यह घटनाक्रम दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी और तेलंगाना राज्य कमेटी क्षेत्र में माओवादी गतिविधियों को समाप्त करने के लिए चल रहे प्रयासों के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।

जानकारी के मुताबिक आत्मसमर्पण करने वालों में पीएलजीए के वरिष्ठ कमांडर और संगठन के महत्वपूर्ण ढांचे से जुड़े सदस्य भी शामिल हैं। इससे माओवादी संगठन की संरचना कमजोर होने के संकेत मिल रहे हैं।
सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि यह घटनाक्रम पिछले कई महीनों से Chhattisgarh, Telangana, Andhra Pradesh, Maharashtra, Odisha और Jharkhand समेत नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में चलाए जा रहे समन्वित सुरक्षा अभियानों का परिणाम है। आसूचना आधारित कार्रवाई, सुरक्षा ढांचे के विस्तार और दूरस्थ क्षेत्रों में फॉरवर्ड ऑपरेटिंग बेस स्थापित किए जाने से माओवादी कैडरों की गतिविधियों और आवाजाही पर बड़ा असर पड़ा है।

सुरक्षा बलों द्वारा बस्तर और आसपास के वन क्षेत्रों में लगातार चलाए जा रहे अभियानों ने माओवादी गढ़ों को कमजोर किया है। इससे संगठन के कैडरों पर हिंसा का रास्ता छोड़कर मुख्यधारा में लौटने का दबाव बढ़ा है।
इसी के साथ केंद्र और राज्य सरकारों की ओर से आदिवासी इलाकों में सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा और आजीविका से जुड़ी योजनाओं के विस्तार ने भी स्थानीय लोगों का लोकतांत्रिक व्यवस्था पर भरोसा मजबूत किया है। इससे माओवादी प्रचार का प्रभाव भी कम हुआ है।

इस संबंध में Sundarraj P, पुलिस महानिरीक्षक, Bastar Range ने कहा कि बड़ी संख्या में माओवादी कैडरों का आत्मसमर्पण करना इस बात का संकेत है कि सुरक्षा बलों की कार्रवाई और शासन की बढ़ती पहुंच का संयुक्त प्रभाव सामने आ रहा है। उन्होंने कहा कि जैसे-जैसे विकास और कल्याणकारी योजनाएं दूरस्थ गांवों तक पहुंचेंगी, वैसे-वैसे क्षेत्र में स्थायी शांति और विकास का मार्ग और मजबूत होगा।