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1,364 students of NIT Raipur received their degrees; Aatmika Gangele emerged as the overall topper.
रायपुर। राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईटी) रायपुर के 17वें दीक्षा समारोह में मंगलवार को 1,364 विद्यार्थियों को उपाधियां प्रदान की गईं। पंडित दीनदयाल उपाध्याय सभागार में आयोजित कार्यक्रम में स्नातक के 976, स्नातकोत्तर के 283 और पीएचडी के 105 शोधार्थियों को डिग्री दी गई। शैक्षणिक क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को 25 स्वर्ण और 25 रजत पदकों से सम्मानित किया गया।बीटेक कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग की छात्रा आत्मिका गंगेले ने संस्थान का स्वर्ण पदक हासिल करने के साथ स्नातक वर्ग में ओवरऑल टॉपर का स्थान प्राप्त किया। समारोह के मुख्य अतिथि केंद्रीय कोयला एवं खान मंत्री जी. किशन रेड्डी ने विद्यार्थियों से अपने तकनीकी ज्ञान और कौशल का उपयोग राष्ट्र निर्माण में करने का आह्वान किया।कार्यक्रम में सांसद बृजमोहन अग्रवाल और वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर) की महानिदेशक डॉ. नल्लाथम्बी कलाइसेल्वी सहित अन्य अतिथि मौजूद रहे। वक्ताओं ने नवाचार, अनुसंधान और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) को देश के विकास के लिए महत्वपूर्ण बताया।
केंद्रीय मंत्री जी. किशन रेड्डी ने कहा कि भारत की अर्थव्यवस्था के विस्तार के साथ ऊर्जा की मांग भी बढ़ेगी। ऐसे में युवाओं को ऊर्जा, स्वास्थ्य, कृषि और रोजगार जैसे क्षेत्रों की चुनौतियों का समाधान खोजने के लिए आगे आना चाहिए।उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि जहां दूसरे लोग बाधाएं देखते हैं, वहां वे नए अवसर और समाधान तलाशें। ऊर्जा, आपूर्ति श्रृंखला, स्वास्थ्य सेवाओं, रोजगार सृजन और कृषि विकास जैसे क्षेत्रों में तकनीकी ज्ञान का इस्तेमाल देश को आत्मनिर्भर बनाने में मददगार होगा। उन्होंने विकसित भारत के लक्ष्य को पूरा करने में युवाओं की भूमिका को अहम बताया।बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के अध्यक्ष डॉ. सुरेश हावरे ने कहा कि दीक्षा समारोह केवल डिग्री हासिल करने का अवसर नहीं, बल्कि जीवन की नई जिम्मेदारियों और संभावनाओं की शुरुआत है।
दीक्षा समारोह से पहले केंद्रीय मंत्री जी. किशन रेड्डी और अन्य अतिथियों ने संस्थान के हीरा हॉल में सात उत्कृष्टता केंद्रों का उद्घाटन किया। इनमें इंडिया एआई छत्तीसगढ़ सेंटर ऑफ एक्सीलेंस, सेंटर ऑफ एक्सीलेंस ऑन क्रिटिकल मिनरल्स, कंप्यूटेशनल मैकेनिक्स, सेंटर ऑफ स्पेस एंड इंटरप्लेनेटरी एक्सप्लोरेशन (कोसाईन), मैराल सेंटर फॉर इनोवेशन इन रूरल एंड ट्राइबल हेल्थ, एयरोस्पेस एंड ऑटोनॉमस टेक्नोलॉजीज तथा नैनोसाइंस एंड सस्टेनेबल एनर्जी टेक्नोलॉजीज केंद्र शामिल हैं।इन केंद्रों के जरिए उन्नत अनुसंधान और तकनीकी नवाचार को प्रोत्साहन मिलेगा। साथ ही, नई तकनीकों और सामाजिक चुनौतियों से जुड़ी समस्याओं पर शोध और समाधान विकसित किए जाएंगे।
सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि नवाचार और अनुसंधान किसी भी राष्ट्र की प्रगति के प्रमुख आधार हैं। उन्होंने विशेष रूप से क्रिटिकल मिनरल्स के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता हासिल करने की आवश्यकता पर जोर दिया।सीएसआईआर की महानिदेशक डॉ. नल्लाथम्बी कलाइसेल्वी ने धातुकर्म अनुसंधान, ऊर्जा संक्रमण और कार्बन उत्सर्जन कम करने वाली तकनीकों को समय की जरूरत बताया। उन्होंने विद्यार्थियों से वैज्ञानिक सोच विकसित कर देश के विकास में नेतृत्वकारी भूमिका निभाने की अपील की।संस्थान के निदेशक प्रो. एन.वी. रमना राव ने वार्षिक रिपोर्ट प्रस्तुत की और एनआईटी रायपुर की उपलब्धियों, शैक्षणिक प्रगति तथा अनुसंधान गतिविधियों की जानकारी दी।