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Villagers in the forest region of Kawardha have launched a protest against alleged religious conversions.
कवर्धा। जिले के पंडरिया विकासखंड के कुई-कुकदूर वनांचल क्षेत्र में कथित मतांतरण की गतिविधियों को लेकर ग्रामीणों ने विरोध जताया है। मंगलवार को 18 गांवों के ग्रामीण और समाज प्रमुख कलेक्ट्रेट पहुंचे तथा कलेक्टर तुलिका प्रजापति को मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा। उन्होंने क्षेत्र में चल रही मतांतरण की गतिविधियों की निष्पक्ष जांच कराने और इसमें शामिल लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।ग्रामीणों का दावा है कि क्षेत्र में 40 से अधिक स्थानों पर चर्च और प्रार्थना सभाएं संचालित हो रही हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि चर्च निर्माण के लिए सरकारी जमीन पर भी कब्जा किया जा रहा है। ग्रामीणों ने बैगा और आदिवासी समाज की पारंपरिक संस्कृति तथा पहचान पर संकट पैदा होने की आशंका जताई।
ज्ञापन में ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि आर्थिक रूप से कमजोर, अशिक्षित और भोले-भाले परिवारों को बहला-फुसलाकर तथा विभिन्न प्रकार के प्रलोभन देकर उनके मूल धर्म और परंपराओं से दूर किया जा रहा है। इस गतिविधि में बाहरी मिशनरियों के साथ कुछ स्थानीय मतांतरित लोगों की भूमिका होने का भी दावा किया गया है।
ग्रामीणों ने मतांतरण की गतिविधियों में कुछ सरकारी कर्मचारियों की कथित भूमिका की जांच कराने की मांग की है। ज्ञापन में शिक्षक, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिका, मितानिन, कोटवार सहित अन्य कर्मचारियों का उल्लेख किया गया है।आरोप है कि कुछ कर्मचारी स्वयं मतांतरित होने के बाद दूसरे लोगों को भी इसके लिए प्रेरित कर रहे हैं। ग्रामीणों ने प्रशासन से इन आरोपों की निष्पक्ष जांच कराकर उचित कार्रवाई करने का आग्रह किया है।
ग्रामीणों ने दावा किया कि पिछले तीन वर्षों में करीब 700 लोगों की घर वापसी कराई गई है। उन्होंने कहा कि बैगा और आदिवासी समाज की संस्कृति, परंपरा और पहचान की रक्षा के लिए प्रशासन को गंभीरता से कदम उठाने चाहिए।सर्वसमाज के नेतृत्व में कलेक्ट्रेट पहुंचे प्रतिनिधिमंडल में बैगा समाज के प्रदेश अध्यक्ष इतवारी बैगा, प्रदेश सलाहकार गौदूराम बैगा, अमरसिंह बैगा, भगऊराम धुर्वे, परसराम यादव, सुरेश मरावी और तिहारसिंह श्याम सहित अन्य लोग शामिल रहे। ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि मांगों पर कार्रवाई नहीं होने पर आंदोलन किया जाएगा।