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400-year-old Ashtadhatu cannon stolen; serious questions raised about security at Narwar Fort.
शिवपुरी। मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले में स्थित ऐतिहासिक नरवर किले से करीब 400 साल पुरानी अष्टधातु की एक विशाल तोप चोरी हो गई है। यह किला भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के संरक्षण में है। चोरी हुई तोप 17वीं शताब्दी की बताई जा रही है और इसका वजन लगभग 10 क्विंटल है। यह कचहरी महल में रखी 14 ऐतिहासिक तोपों में शामिल थी।
जानकारी के अनुसार, चार जुलाई को अज्ञात लोगों ने इस तोप को उसके स्टैंड से नीचे गिरा दिया था। इसके बाद कई दिन तक तोप उसी स्थान पर पड़ी रही। इसी का फायदा उठाते हुए 14 और 15 जुलाई की रात बदमाश इसे चोरी कर ले गए।घटनास्थल पर मिले साक्ष्यों से पता चलता है कि चोरों ने भारी भरकम तोप को ले जाने के लिए पूरी तैयारी की थी। उन्होंने बेयरिंग लगी लकड़ी की फ्रेम का उपयोग किया, जिससे तोप को घसीटकर आगे बढ़ाया जा सके। कुछ स्थानों पर रस्सियों की मदद से उसे टांगा गया और नुकसान से बचाने के लिए गद्दों में भी लपेटा गया। इसके बाद तोप को किले के पिछले हिस्से में स्थित उरवाई गेट तक ले जाकर नीचे उतारा गया और वाहन में रखकर फरार हो गए।
शिवपुरी के पुलिस अधीक्षक यांगचेन डोलकर भूटिया ने बताया कि जिस रास्ते से तोप ले जाई गई, उसकी बारीकी से जांच की जा रही है। उन्होंने बताया कि किले की सुरक्षा के लिए छह गार्ड तैनात हैं, लेकिन घटना वाली रात ड्यूटी पर मौजूद गार्ड रात करीब आठ बजे ही घर चले गए थे। इसके बाद चोरी की वारदात हुई। मामले की जांच के लिए विशेष जांच दल गठित किया गया है और अज्ञात आरोपियों के खिलाफ प्रकरण दर्ज कर लिया गया है।
चोरी हुई तोप की लंबाई करीब पांच फीट 10 इंच और मोटाई लगभग 30 इंच बताई गई है। यह अष्टधातु से बनी थी। माना जा रहा है कि इस मिश्र धातु में सोने की भी कुछ मात्रा हो सकती है। इसी वजह से आशंका जताई जा रही है कि बदमाश इसे बेचने के बजाय गलाकर कीमती धातु निकालने की योजना बना रहे हों।
नरवर किला लंबे समय से चोरों और दफीना तलाशने वाले गिरोहों के निशाने पर रहा है। सिंधिया रियासत के समय का यह किला अपनी ऐतिहासिक और सामरिक महत्ता के लिए जाना जाता है। यहां छिपे खजाने की चर्चाओं के कारण पहले भी कई बार अवैध गतिविधियां सामने आ चुकी हैं।हाल ही में बदमाशों ने कचहरी महल की दिशा में एक लंबी सुरंग भी खोद डाली थी। वहां से खुदाई में इस्तेमाल होने वाले औजार और काले कंबल भी बरामद हुए थे। इससे साफ संकेत मिलता है कि किले की ऐतिहासिक धरोहरों पर अपराधियों की लगातार नजर बनी हुई है।
नरवर किले में 15 से 18 फीट लंबाई तक की कई ऐतिहासिक तोपें मौजूद हैं। वर्ष 2011 में भी किले के पास से एक तोप बरामद की गई थी। अब एक बार फिर हुई इस बड़ी चोरी ने किले की सुरक्षा व्यवस्था और ऐतिहासिक धरोहरों की निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।