

Copyright © 2026 rights reserved by Inkquest Media
अन्य समाचार

csmcl overtime scam former md arunpati tripathi arrested eow remand
रायपुर। छत्तीसगढ़ स्टेट मार्केटिंग कॉर्पोरेशन लिमिटेड (CSMCL) में कथित ओवरटाइम भुगतान घोटाले की जांच ने बड़ा मोड़ ले लिया है। आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (EOW) ने सीएसएमसीएल के तत्कालीन प्रबंध संचालक (एमडी) अरुणपति त्रिपाठी को गिरफ्तार कर लिया है। 17 जुलाई को हिरासत में लेने के बाद शनिवार को उन्हें विशेष न्यायालय में पेश किया गया, जहां अदालत ने उन्हें 20 जुलाई तक पुलिस रिमांड पर भेज दिया।
ईओडब्ल्यू का मानना है कि त्रिपाठी से पूछताछ के दौरान भुगतान की मंजूरी, कथित कमीशन नेटवर्क और इस पूरे मामले में शामिल अन्य अधिकारियों एवं मैनपावर एजेंसियों की भूमिका से जुड़े अहम खुलासे हो सकते हैं।
ईडी की कार्रवाई के बाद खुला मामला
इस कथित घोटाले की शुरुआत 29 नवंबर 2023 को हुई थी, जब प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने रायपुर में कार्रवाई करते हुए तीन लोगों के पास से 28.80 लाख रुपये नकद बरामद किए थे। इसके बाद ईडी ने मामले से जुड़ी जानकारी राज्य सरकार को भेजी। इसी आधार पर ईओडब्ल्यू-एसीबी ने एफआईआर दर्ज कर विस्तृत जांच शुरू की।
जांच के दौरान यह सामने आया कि वित्तीय वर्ष 2019-20 से 2023-24 के बीच कर्मचारियों के ओवरटाइम, बोनस, अतिरिक्त चार कार्यदिवस और सर्विस चार्ज के नाम पर मैनपावर एजेंसियों को नियमों के विपरीत करोड़ों रुपये का भुगतान किया गया।
182.98 करोड़ रुपये के अतिरिक्त भुगतान का आरोप
जांच एजेंसियों के अनुसार इस अवधि में कुल 182.98 करोड़ रुपये का अतिरिक्त भुगतान किया गया। इसमें—
101.20 करोड़ रुपये ओवरटाइम के नाम पर,
12.21 करोड़ रुपये बोनस,
54.46 करोड़ रुपये अतिरिक्त चार कार्यदिवस,
15.11 करोड़ रुपये सर्विस चार्ज के रूप में जारी किए गए।
ईओडब्ल्यू का आरोप है कि इन भुगतानों का बड़ा हिस्सा कथित रूप से कमीशन के जरिए एक सिंडिकेट के माध्यम से विभिन्न लोगों तक पहुंचाया गया। फिलहाल एजेंसी पूरे वित्तीय लेन-देन, भुगतान की स्वीकृति प्रक्रिया और धन के प्रवाह की जांच कर रही है।
कई मैनपावर एजेंसियां जांच के घेरे में
जांच में कई निजी मैनपावर एजेंसियों की भूमिका भी सामने आई है। इनमें सुमित फैसिलिटीज, प्राइमवन वर्कफोर्स, ए-टू-जेड इंफ्रासर्विसेज, अलर्ट कमांडोज और ईगल हंटर सॉल्यूशंस शामिल हैं।
ईओडब्ल्यू यह पता लगाने में जुटी है कि इन एजेंसियों को भुगतान किस आधार पर स्वीकृत किया गया, वास्तविक कर्मचारियों तक कितनी राशि पहुंची और क्या भुगतान प्रक्रिया में सरकारी नियमों का पालन किया गया था या नहीं।
पहले ही 12 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट
इस मामले में ईओडब्ल्यू-एसीबी पहले ही 12 आरोपियों के खिलाफ विशेष न्यायालय में अभियोग पत्र दाखिल कर चुकी है। इनमें अनवर ढेबर, नवीन प्रताप सिंह तोमर, तिजऊराम निर्मलकर, अभिषेक सिंह, नीरज कुमार चौधरी, अजय लोहिया, अजीत नरबले, अमित प्रभाकर सालुंके, अमित मित्तल, एन. उदय राव, राजीव द्विवेदी और संजीव जैन के नाम शामिल हैं।
जांच एजेंसी द्वारा पहले गिरफ्तार किए गए सभी आरोपियों को न्यायिक अभिरक्षा में भेजा जा चुका है। अब पूर्व एमडी अरुणपति त्रिपाठी से पूछताछ के आधार पर जांच को आगे बढ़ाया जा रहा है।
जांच में हो सकते हैं नए खुलासे
ईओडब्ल्यू को उम्मीद है कि पुलिस रिमांड के दौरान पूछताछ से कथित घोटाले की पूरी कार्यप्रणाली, भुगतान स्वीकृति की प्रक्रिया, कमीशन नेटवर्क और इसमें शामिल अन्य अधिकारियों व संबंधित लोगों की भूमिका पर महत्वपूर्ण जानकारी सामने आएगी। आने वाले दिनों में इस मामले में और गिरफ्तारियां या नए खुलासे होने की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा रहा है।