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4,000 Municipal Corporation-owned shops to get digital identity; taxes can be paid from home.
रायपुर। राजधानी रायपुर के गोलबाजार, जवाहर मार्केट, नवीन मार्केट और गंज बाजार सहित अन्य क्षेत्रों में नगर निगम की दुकानों का संचालन करने वाले व्यापारियों को जल्द ही बड़ी राहत मिलने वाली है। अब उन्हें टैक्स जमा करने, भुगतान संबंधी जानकारी लेने और विभिन्न आवेदनों के लिए नगर निगम के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। निगम अपनी करीब 4 हजार किराए और लीज वाली दुकानों को डिजिटल पहचान देने जा रहा है। इसके लिए सॉफ्टवेयर तैयार कर लिया गया है और अगले सप्ताह इसकी शुरुआत करने की तैयारी है।नई व्यवस्था के तहत प्रत्येक दुकान को एक विशिष्ट डिजिटल आईडी नंबर और क्यूआर कोड दिया जाएगा। इसके माध्यम से दुकानदार घर बैठे ऑनलाइन टैक्स जमा कर सकेंगे। साथ ही दुकान से संबंधित जरूरी जानकारियां और भुगतान का रिकॉर्ड भी डिजिटल माध्यम से उपलब्ध रहेगा।
नगर निगम शुरुआत में लीज पर संचालित करीब 1100 दुकानों को इस व्यवस्था से जोड़ेगा। इसके लिए निगम के कर्मचारी संबंधित बाजारों में पहुंचकर दुकानदारों को डिजिटल आईडी और क्यूआर कोड उपलब्ध कराएंगे। साथ ही उन्हें ऑनलाइन भुगतान और अन्य सुविधाओं के इस्तेमाल की जानकारी भी दी जाएगी।पहले चरण का काम पूरा होने के बाद किराए पर संचालित बाकी दुकानों को भी इस प्रणाली से जोड़ा जाएगा। निगम का लक्ष्य चालू वित्तीय वर्ष के भीतर सभी दुकानों का डिजिटलीकरण पूरा करना है।
नगर निगम ने स्मार्ट सिटी परियोजना के अंतर्गत वर्ष 2022 में आवासीय और निजी व्यावसायिक संपत्तियों को डिजिटल डोर नंबर देने की पहल की थी। हालांकि, निगम की अपनी किराए और लीज पर दी गई दुकानें इस व्यवस्था से बाहर रह गई थीं।इन दुकानों का राजस्व रिकॉर्ड और टैक्स भुगतान अब तक पारंपरिक ऑफलाइन तरीके से संचालित हो रहा था। इससे दुकानदारों को भुगतान और दस्तावेजी प्रक्रियाओं में परेशानी होती थी। नई प्रणाली लागू होने के बाद व्यापारियों को सुविधा मिलने के साथ निगम के अधिकारियों को भी राजस्व वसूली और दुकानों से संबंधित रिकॉर्ड की निगरानी में आसानी होगी।
नगर निगम अपनी कुछ व्यावसायिक दुकानों को बेचने के लिए कई बार निविदाएं जारी कर चुका है, लेकिन इसके बावजूद खरीदार नहीं मिल रहे हैं। कुछ दुकानों के लिए 10 से 12 बार तक टेंडर निकाले जा चुके हैं।अब इन दुकानों की बिक्री बढ़ाने के लिए आरक्षण की मौजूदा 13 श्रेणियों को घटाकर पांच वर्गों में सीमित करने की तैयारी है। इसके अलावा जिन दुकानों का बाजार मूल्य अधिक है, उनकी कीमतों में भी कमी करने पर विचार किया जा रहा है।वहीं, जिन दुकानों की लीज अवधि समाप्त होने वाली है, उनके संबंध में भी निगम स्तर पर आगे की प्रक्रिया तय की जाएगी।
नगर निगम डिजिटल व्यवस्था का विस्तार केवल दुकानों तक सीमित नहीं रखना चाहता। शहर की आवासीय और व्यावसायिक संपत्तियों का भी लिडार तकनीक से सर्वे कराने की तैयारी है। इसके लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू की गई है।इस सर्वे के माध्यम से संपत्तियों का वास्तविक क्षेत्रफल, मौजूदा उपयोग और अन्य जरूरी जानकारियां जुटाई जाएंगी। प्रत्येक संपत्ति का रिकॉर्ड डिजिटल रूप में तैयार होगा। इसमें संबंधित भवन की तस्वीर, भौगोलिक स्थिति और विशिष्ट पहचान नंबर जैसी जानकारियां दर्ज की जाएंगी।इससे संपत्तियों के वास्तविक उपयोग और निगम के राजस्व रिकॉर्ड के बीच अंतर का पता लगाने में मदद मिलेगी।
नगर निगम की उपायुक्त डॉ. अंजलि शर्मा के मुताबिक, दुकानों को डिजिटल सुविधाओं से जोड़ने की तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। नई व्यवस्था लागू होने से दुकानदार समय पर ऑनलाइन टैक्स का भुगतान कर सकेंगे। इसके साथ ही निगम के पास सभी दुकानों का व्यवस्थित डिजिटल रिकॉर्ड भी उपलब्ध रहेगा।
नई पहल से राजधानी के प्रमुख बाजारों में दुकान संचालित करने वाले हजारों व्यापारियों को भुगतान संबंधी प्रक्रियाओं में सुविधा मिलने की उम्मीद है। वहीं, डिजिटल आईडी और क्यूआर कोड के जरिए निगम प्रत्येक दुकान का रिकॉर्ड व्यवस्थित रख सकेगा। इससे टैक्स वसूली में पारदर्शिता बढ़ाने और बकाया राजस्व की निगरानी करने में भी मदद मिलेगी।