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50 officers in the circle of corruption in Chhattisgarh
प्रदेश में छत्तीसगढ़ भ्रष्टाचार जांच के तहत 50 वरिष्ठ अधिकारी जांच के दायरे में हैं। इनमें आईएएस, आईपीएस और आईएफएस अधिकारी शामिल हैं। आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) और एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) ने इन अधिकारियों के खिलाफ जांच प्रस्ताव शासन को भेजे हैं, लेकिन नौ मामलों में अब भी अनुमति लंबित है।
नेता प्रतिपक्ष चरणदास महंत के सवाल के जवाब में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने 13 दिसंबर 2023 से 31 दिसंबर 2025 तक का लिखित ब्यौरा सदन में पेश किया।
चर्चित घोटालों में बड़े नाम
सरकार द्वारा पेश रिपोर्ट में कई चर्चित मामलों का उल्लेख है, जिनमें शामिल हैं:
महादेव एप सट्टा घोटाला
कोयला लेवी घोटाला
शराब घोटाला
वन विभाग की योजनाओं में अनियमितताएं
इन मामलों में कई वरिष्ठ अधिकारियों पर आरोप तय किए गए हैं।
इन अधिकारियों पर अनुमति का इंतजार
EOW-ACB ने कई गंभीर मामलों में राज्य सरकार से जांच की अनुमति मांगी है, जो महीनों से लंबित है।
आईएएस अधिकारी
इफ्फत आरा – पाठ्यपुस्तक निगम में कागज खरीदी और परिवहन निविदा गड़बड़ी (लंबित: 13 अप्रैल 2024 से)
संजय अलंग – समाज कल्याण विभाग में निराश्रित राशि अनियमितता (लंबित: 29 जनवरी 2025 से)
सुधाकर खलखो – माटीकला बोर्ड में सरकारी धन दुरुपयोग
आईएफएस अधिकारी
अनूप भल्ला, रमेश चंद्र दुग्गा, केके खेलवार, लक्ष्मण सिंह, चूड़ामणि और एसपी मशीह के खिलाफ भी जांच अनुमति प्रतीक्षित है।
जनवरी 2026 में आईएएस समीर बिश्नोई के खिलाफ जांच की अनुमति मिलने के बाद अन्य मामलों पर भी नजर टिकी है।
पुलिस और वन विभाग में भी हलचल
महादेव एप सट्टा घोटाला के चलते पुलिस विभाग की छवि प्रभावित हुई है। आईपीएस आनंद छाबड़ा, अजय यादव, आरिफ शेख, प्रशांत अग्रवाल, अभिषेक पल्लव और ओपी पाल के खिलाफ जांच जारी है। इन पर सट्टा प्रमोटरों को संरक्षण देने और अवैध वसूली के आरोप हैं।
वन विभाग में नीलगिरी पौधों की खरीदी और कैंपा मद के दुरुपयोग के मामलों में आईएफएस अरुण प्रसाद, एके बोआज और विवेक आचार्य समेत अन्य अधिकारियों के खिलाफ अनुमति अभी तक नहीं मिल पाई है।
स्वास्थ्य और राजस्व विभाग भी जांच के दायरे में
स्वास्थ्य विभाग के CGMSC निविदा घोटाले में आईएएस चंद्रकांत वर्मा, अभिजीत सिंह, सीआर प्रसन्ना और कार्तिकेय गोयल के खिलाफ जांच जारी है।
राजस्व विभाग में पटवारी भर्ती परीक्षा गड़बड़ी मामले में आईएएस रमेश शर्मा का नाम सामने आया है।
इसके अलावा कौशल, भीम सिंह और जय प्रकाश मौर्य जैसे अधिकारियों पर भी जांच की आंच पहुंच चुकी है। शराब घोटाले में पूर्व मुख्य सचिव विवेक ढांड, अनिल टुटेजा और निरंजन दास पहले से ही जांच एजेंसियों के रडार पर हैं।
जांच की धीमी रफ्तार पर सवाल
हालांकि, नौ अधिकारियों के खिलाफ जांच अनुमति शासन स्तर पर अटकी होने से जांच की रफ्तार धीमी बनी हुई है। विपक्ष ने इस पर सवाल उठाए हैं, जबकि सरकार का कहना है कि नियमानुसार कार्रवाई की जा रही है।