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700 tons of garbage piles up on streets and in homes, sanitation workers on strike over 18 demands
रायपुर। राजधानी रायपुर में गुरुवार को सफाई व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई। कचरा वाहन कर्मियों की हड़ताल के चलते शहरभर से करीब 700 टन कचरा नहीं उठ पाया। हालात ऐसे बन गए कि कई इलाकों में घरों, गलियों और सड़कों पर कचरे के ढेर लग गए। शहर की सभी 258 कचरा गाड़ियां डिपो में खड़ी रहीं और कर्मचारी अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन करते रहे।कर्मियों और रामकी कंपनी के बीच बातचीत का कोई ठोस नतीजा नहीं निकल पाया है। ऐसे में शुक्रवार को भी कचरा गाड़ियों के नहीं निकलने की संभावना जताई जा रही है।
सिर्फ वेतन नहीं, 18 सूत्रीय मांगों पर अड़े कर्मचारी
हड़ताल कर रहे कर्मियों का कहना है कि मामला केवल वेतन भुगतान तक सीमित नहीं है। उन्होंने वेतन वृद्धि, पीएफ भुगतान, सुरक्षा उपकरण, ओवरटाइम, बीमा, नौकरी सुरक्षा और स्थायी सुविधाओं समेत 18 सूत्रीय मांगों को लेकर मोर्चा खोल दिया है।कर्मचारियों का आरोप है कि लंबे समय से उनकी समस्याएं लंबित हैं और समय पर वेतन नहीं मिलने से आर्थिक संकट गहरा गया है।
ड्राइवर-हेल्पर के वेतन बढ़ाने की मांग
कर्मचारी संघ ने हेल्परों का वेतन 20 हजार रुपये और ड्राइवरों का वेतन 22 हजार रुपये करने की मांग रखी है। उनका कहना है कि लगातार मेहनत और जोखिम भरे काम के बावजूद उन्हें उचित वेतन और सुविधाएं नहीं मिल रही हैं।
पीएफ घोटाले और 8 साल के एरियर का मुद्दा गरमाया
कर्मियों ने आरोप लगाया कि कई वर्षों से पीएफ और वेतन से जुड़ी समस्याएं बनी हुई हैं। संघ ने आठ साल के एरियर और कथित पीएफ घोटाले की राशि ब्याज सहित लौटाने की मांग उठाई है।इसके अलावा बेसिक सैलरी तय करने और परिवर्तनीय महंगाई भत्ता लागू करने की मांग भी प्रमुख मुद्दों में शामिल है।
ओवरटाइम, नौकरी सुरक्षा और नाइट ड्यूटी बंद करने की मांग
हड़ताली कर्मियों ने ओवरटाइम भुगतान, ग्रेच्युटी और सीनियरिटी का लाभ देने की मांग भी की है। उनका कहना है कि बिना गलती किसी कर्मचारी को नौकरी से नहीं हटाया जाना चाहिए।कर्मचारियों ने केवल मॉर्निंग शिफ्ट में ड्यूटी कराने और रात की ड्यूटी बंद करने की भी मांग रखी है। साथ ही कचरा वाहनों की समय पर मरम्मत और कर्मचारियों को आसान लोन सुविधा देने की बात भी कही गई है।
25 लाख बीमा और PPE किट की मांग
संघ ने सफाई कर्मियों के लिए नियमित PPE किट और सुरक्षा उपकरण उपलब्ध कराने की मांग की है। इसके साथ ही ड्यूटी के दौरान हादसे की स्थिति में 25 लाख रुपये का मृत्यु बीमा और पूरा मुआवजा देने की मांग भी रखी गई है।कर्मियों का कहना है कि वे रोजाना जोखिम भरे माहौल में काम करते हैं, लेकिन सुरक्षा और स्वास्थ्य सुविधाएं पर्याप्त नहीं हैं।
स्वच्छता सर्वेक्षण से पहले बढ़ी प्रशासन की चिंता
इस हड़ताल ने नगर निगम की चिंता बढ़ा दी है, क्योंकि जल्द ही स्वच्छता सर्वेक्षण की टीम रायपुर का दौरा करने वाली है। ऐसे समय में शहर की सफाई व्यवस्था ठप पड़ना प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बन गया है।महापौर मीनल चौबे ने कहा कि शहर की सफाई व्यवस्था से कोई समझौता नहीं किया जाएगा और कंपनी को जल्द समाधान निकालने के निर्देश दिए गए हैं।
वहीं रामकी कंपनी के रायपुर हेड योगेश कुमार ने कहा कि कर्मचारियों से लगातार बातचीत जारी है और उनकी मांगों पर निगम अधिकारियों को भी अवगत कराया गया है। जल्द तय मानकों के अनुरूप निर्णय लेने की कोशिश की जा रही है।