

Copyright © 2026 rights reserved by Inkquest Media
अन्य समाचार

A large cache of Naxal weapons was hidden in the forest prior to the surrender; a search revealed preparations that heightened the security forces' concerns.
सुकमा। जिले के चिंतलनार इलाके में सुरक्षा बलों को नक्सलियों के एक पुराने डंप का पता चला है। आत्मसमर्पण कर चुके नक्सलियों से मिली जानकारी के आधार पर चिन्नाबोड़केल के पहाड़ी और घने जंगल वाले क्षेत्र में तलाशी अभियान चलाया गया। इस दौरान हथियार बनाने में इस्तेमाल होने वाली सामग्री, विस्फोटक और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बरामद किए गए।पुलिस के अनुसार, बरामद सामान को नक्सलियों ने आत्मसमर्पण से पहले जंगल में छिपाकर रखा था। तलाशी में कुल 57 पाइप मिले हैं, जिन्हें बैरल ग्रेनेड लॉन्चर यानी बीजीएल तैयार करने के लिए इस्तेमाल किए जाने की बात सामने आई है।
आत्मसमर्पित नक्सलियों ने पुलिस को जंगल में छिपाए गए डंप की जानकारी दी थी। इसके बाद सुरक्षा बलों ने चिन्नाबोड़केल के पहाड़ी इलाके में सर्च ऑपरेशन शुरू किया।तलाशी के दौरान जमीन के नीचे छिपाकर रखी गई एक देसी भरमार बंदूक बरामद हुई। इसके बाद जवानों ने आसपास के क्षेत्र में सघन तलाशी अभियान चलाया, जिसमें अन्य हथियार सामग्री और संदिग्ध सामान बरामद हुआ।
जांच में सामने आया कि जंगल में रखे गए 57 पाइप का इस्तेमाल बीजीएल बनाने में किया जाना था। इसके अलावा विस्फोटक सामग्री और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण भी डंप से मिले हैं।सुरक्षा एजेंसियां अब बरामद सामग्री की प्रकृति और उसके संभावित इस्तेमाल की जांच कर रही हैं। यह भी पता लगाया जा रहा है कि डंप को तैयार करने और जंगल में छिपाने में कितने लोग शामिल थे।
पुलिस के मुताबिक, आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों ने पुनर्वास नीति पर भरोसा जताते हुए संगठन से जुड़ी कई जानकारियां सुरक्षा एजेंसियों को दी हैं। इसी दौरान जंगल में छिपाकर रखे गए हथियार और अन्य सामग्री के डंप की जानकारी भी मिली।इस सूचना के आधार पर सुरक्षाबलों ने कार्रवाई की और जमीन के भीतर छिपाए गए सामान तक पहुंच बनाई।
बरामदगी के बाद सुरक्षा बल यह पता लगाने में जुटे हैं कि यह सामग्री कब और किस उद्देश्य से जंगल में जमा की गई थी। साथ ही आसपास के इलाकों में ऐसे अन्य छिपे हुए डंप होने की आशंका को देखते हुए तलाशी अभियान आगे भी जारी रहने की संभावना है।आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों से मिल रही सूचनाओं के आधार पर जंगलों में छिपाए गए हथियारों और विस्फोटक सामग्री तक पहुंचना सुरक्षा बलों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।