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A major change in fertilizer subsidies? Preparations underway to transfer money directly into farmers' accounts.
नई दिल्ली। केंद्र सरकार करीब दो लाख करोड़ रुपये की वार्षिक खाद सब्सिडी सीधे किसानों के खाते में देने की संभावना पर गंभीरता से विचार कर रही है। फिलहाल यह सब्सिडी उर्वरक कंपनियों को दी जाती है। इसी कारण 2,400 रुपये लागत वाली यूरिया की बोरी किसानों को लगभग 265–270 रुपये में मिलती है। नई व्यवस्था लागू होने पर सब्सिडी डीबीटी (डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर) के जरिए सीधे किसानों तक पहुंचेगी। इससे पारदर्शिता बढ़ेगी और किसान अपनी जरूरत के अनुसार उर्वरक खरीद सकेंगे।
कृषि नीति में संरचनात्मक बदलाव के संकेत
नई दिल्ली स्थित भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (पूसा) में आयोजित कृषि विज्ञान मेले में केंद्रीय कृषि मंत्री Shivraj Singh Chouhan ने इस दिशा में विचार की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि इतनी बड़ी राशि सीधे किसानों को देना अधिक व्यावहारिक हो सकता है। इसे कृषि नीति में बड़े संरचनात्मक बदलाव के संकेत के रूप में देखा जा रहा है। साथ ही, कीटनाशक लाइसेंस प्रणाली को भी सरल, समयबद्ध और पारदर्शी बनाने की तैयारी है।
एमएसपी खरीद एक महीने में पूरी करने पर जोर
सरकार एमएसपी पर खरीद प्रक्रिया को अधिकतम एक महीने में पूरा करने पर भी जोर दे रही है। अभी कई राज्यों में यह प्रक्रिया तीन महीने तक चलती है, जिससे छोटे किसानों को भुगतान में देरी होती है। भुगतान में देरी रोकने के लिए एजेंसियों पर 12% ब्याज का प्रावधान किया गया है। केंद्र अपने हिस्से की राशि सीधे किसानों के खातों में भेजने के विकल्प पर काम कर रहा है।