

Copyright © 2026 rights reserved by Inkquest Media
अन्य समाचार

A new era of industrialization begins in Chhattisgarh... ₹1,100-crore semiconductor project to boost the high-tech sector.
रायपुर। छत्तीसगढ़ का औद्योगिक विकास अब सिर्फ कोयला, स्टील और सीमेंट जैसे पारंपरिक क्षेत्रों तक सीमित नहीं रहने वाला है। राज्य में नई अर्थव्यवस्था से जुड़े सेक्टरों को बढ़ावा देने की दिशा में काम तेज हुआ है। करीब 1100 करोड़ रुपए की सेमीकंडक्टर परियोजना पर काम शुरू हो चुका है। इसके साथ ही आईटी, फार्मा, टेक्सटाइल और ग्रीन एनर्जी जैसे क्षेत्रों में निवेश बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है।मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने शुक्रवार को रायपुर के साइंस कॉलेज मैदान में लघु उद्योग भारती के तीन दिवसीय इंडिया इंडस्ट्रियल फेयर 2026 का शुभारंभ करते हुए राज्य में हो रहे औद्योगिक बदलाव की जानकारी दी। कार्यक्रम में उपमुख्यमंत्री अरुण साव और उद्योग मंत्री लखन लाल देवांगन भी मौजूद रहे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ के पास खनिज, ऊर्जा, वन संपदा, जल संसाधन और मानव संसाधन की मजबूत उपलब्धता है। अब इन संसाधनों को आधुनिक तकनीक और बेहतर अधोसंरचना से जोड़कर राज्य को बड़े औद्योगिक और निवेश केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में काम किया जा रहा है।सरकार का प्रयास पारंपरिक उद्योगों के साथ ऐसे क्षेत्रों को भी विस्तार देने का है, जिनमें आने वाले वर्षों में तकनीक और रोजगार की बड़ी संभावनाएं हैं।
नवा रायपुर को आधुनिक टेक्नोलॉजी हब के तौर पर विकसित करने पर भी जोर दिया जा रहा है। यहां तकनीक आधारित कंपनियों और नए उद्योगों के लिए अनुकूल माहौल तैयार करने की योजना है।इसके साथ ही टेक्नोलॉजी हब और इंडस्ट्री एक्सीलेंस हब विकसित करने की दिशा में भी काम किया जा रहा है। इसका उद्देश्य नए उद्योगों को बेहतर सुविधाएं और निवेश के लिए जरूरी वातावरण उपलब्ध कराना है।
छत्तीसगढ़ की नई औद्योगिक विकास नीति 2024-30 में स्थानीय रोजगार को प्राथमिकता दी गई है। ज्यादा स्थानीय युवाओं को रोजगार देने वाले उद्योगों के लिए विशेष प्रोत्साहन का प्रावधान रखा गया है।इस नीति के जरिए निवेश आकर्षित करने के साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ाने और उद्योगों के विस्तार को गति देने पर जोर है।
सेमीकंडक्टर आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग का अहम हिस्सा है। स्मार्टफोन, वाहन, मेडिकल उपकरण और कई तरह की तकनीकी मशीनों में इसका इस्तेमाल होता है।छत्तीसगढ़ में 1100 करोड़ रुपए की परियोजना शुरू होने से हाईटेक क्षेत्र में रोजगार के नए अवसर पैदा होने की संभावना है। इसके साथ ही तकनीक आधारित कंपनियों और बड़े आईटी ब्रांड्स के लिए राज्य में निवेश का आकर्षण बढ़ सकता है। लंबे समय में इससे छत्तीसगढ़ को वैश्विक चिप सप्लाई चेन से जोड़ने में मदद मिल सकती है।
आईटी, फार्मा, टेक्सटाइल और ग्रीन एनर्जी जैसे क्षेत्रों में निवेश बढ़ने से राज्य की औद्योगिक अर्थव्यवस्था में विविधता आने की संभावना है। इससे अलग-अलग कौशल वाले युवाओं के लिए रोजगार के नए विकल्प बन सकते हैं।नए सेक्टरों का विस्तार होने से उद्योगों के साथ स्टार्टअप और उद्यमिता के अवसर भी बढ़ सकते हैं। इससे युवाओं के लिए पारंपरिक नौकरियों के अलावा अपना कारोबार शुरू करने के रास्ते भी खुलेंगे।
राज्य में 1200 से अधिक औद्योगिक इकाइयों के विस्तार पर भी जोर दिया जा रहा है। एमएसएमई क्षेत्र को रोजगार सृजन का महत्वपूर्ण माध्यम माना जाता है, क्योंकि अपेक्षाकृत कम निवेश में इस क्षेत्र में बड़ी संख्या में रोजगार के अवसर तैयार किए जा सकते हैं।औद्योगिक इकाइयों के विस्तार और नए सेक्टरों में निवेश से स्थानीय युवाओं को अपने ही राज्य में काम और कारोबार के अवसर मिलने की संभावना बढ़ सकती है। इसके साथ ही छोटे उद्यमों के विस्तार से रोजगार देने वाले नए कारोबारी भी तैयार हो सकते हैं।